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स्वास्थ्य सेवा पर राज्यों की रैंकिंग संभव

Last Updated- December 15, 2022 | 5:11 AM IST

वैश्विक महामारी कोविड-19 को देखते हुए 15वां वित्त आयोग राज्यों में सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढाचा सुविधायों के आधार पर राज्यों तुलना कर उनकी रैंकिंग पर विचार कर रहा है। बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक इसके अलावा वित्त आयोग इस प्रदर्शन के आधार पर अनुदान की सिफारिश कर सकता है।
अगर इस कदम को अंतिम रूप दे दिया जाता है तो वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के लिए यह वित्त आयोग की दूसरी रिपोर्ट होगी। यह रिपोर्ट 30 अक्टूबर को पेश किए जाने की संभावना है।
जिन मानकों के आधार पर राज्यों की स्थिति के बारे में फैसला किया जा सकता है, उनमें राज्य के बजट या राज्य सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत में स्वास्थ्य सेवाओंं पर खर्च, मृत्यु दर,  आबादी के हिसाब से डॉक्टरों व नर्सों का अनुपात, क्लीनिक की संख्या, अस्पतालों की संख्या, केयर सेंटर, मेडिकल कॉलेज और इस तरह की अन्य सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।
आयोग के भीतर चर्चा के बारे में जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि जिन राज्यों में इन सेवाओं का अभाव है, उन्हें सशर्त अनुदान के साथ इस क्षेत्र पर ज्यादा खर्च करने को प्रोत्साहित किया जा सकता है।  व्यक्ति ने कहा, ‘ऐतिहासिक रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र को उतना नहीं मिला, जितना मिलना चाहिए। ऐसा इसलिए नहीं हो सका क्योंकि राज्य सरकारें कर्जमाफी जैसे राजनीतिक रूप से लाभ देने वाले लोकप्रिय कदम उठाती रही हैं।’
अधिकारी ने कहा कि बिहार या उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने दक्षिण भारत के राज्यों की तुलना में स्वास्थ्य पर प्रति व्यक्ति कम खर्च किया है। कुल मिलाकर पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में स्वास्थ्य मानक कमजोर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘मसला यह है कि हम राजस्व के सीमित संसाधनों की समस्या से जूझ रहे हैं और भविष्य में भी यह जारी रह सकता है। आप सभी चीजों पर नहीं खर्च कर सकते और राज्यों को खर्च को लेकर प्राथमिकता तय करनी होती है कि उन्हें स्वास्थ्य पेशेवरों पर धन खर्च करना है या ज्यादा स्वाथ्य केंद्र बनाने हैं या और कुछ खर्च करना है।’
व्यक्ति ने यह भी कहा कि आयोग जो भी अंतिम फैसला करता है, वह उसके द्वारा गठित स्वास्थ्य क्षेत्र पर बनी उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों पर निर्भर होगा। समूह ने अपनी रिपोर्ट पिछले साल आयोग को सौंपी थी, लेकिन महामारी को देखते हुए पुनरीक्षित रिपोर्ट सौंपी गई है। स्वास्थ्य समिति में एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया, नारायण हॉस्पिटल के देवी शेट्टी, मेदांता के नरेश त्रेहन व अन्य शामिल हैं।

First Published - July 6, 2020 | 11:24 PM IST

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