अमेरिका की दिग्गज दवा कंपनी फाइजर ने भारतीय दवा नियामक के समक्ष अपने एमआरएन टीके के आपात इस्तेमाल के लिए आवेदन किया है। कंपनी ने जर्मनी की बायोएनटेक के साथ मिलकर यह टीका विकसित किया है। कंपनी अपने टीके के लिए शीत भंडारण योजना पर भी काम कर रही है। फाइजर के टीके के लिए शून्य से 70 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे तापमान की जरूरत होगी। भारतीय दवा नियामक से कोविड-19 से रोकथाम के टीके की मंजूरी के लिए आवेदन करने वाली फाइजर पहली दवा निर्माता कंपनी बन गई है। कंपनी ने 4 दिसंबर को टीके के लिए आवेदन किया है। हालांकि फि लहाल यह स्पष्ट नहीं है कि भारतीय दवा नियामक (डीसीजीआई) सुरक्षा मानदंडों पर परखने से संबंधित अनिवार्यता से कंपनी को छूट देगी या नहीं। तकनीकी तौर पर दवा एवं प्रयोगशाला परीक्षण नियम, 2019 के तहत ऐसा प्रावधान मौजूद है, जिसके तहत किसी कंपनी को स्थानीय प्रयोगशालाओं में परीक्षण से छूट मिल सकती है। पहले दवा कंपनियों को भारत में उत्पाद उतारने से पहले स्थानीय स्तर पर परीक्षण करना अनिवार्य था। एच1एन1 महामारी के दौरान भारत सरकार ने 2010 में फाइजर को टीके परीक्षण के लिए कहा था, लेकिन इस संबंध में बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई।
अब तक भारत में एआरएनए तकनीक आधारित किसी टीके को भारत में मंजूरी नहीं दी गई है। केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के सूत्रों के अनुसार बिना परीक्षण के अनुमति दिए जाने की उम्मीद नहीं है। इस बीच, फाइजर के प्रवक्ता ने कहा कि वह सरकारी अनुबंधों के जरिये और नियामक की अनुमति मिलने के बाद ही टीके की आपूर्ति करेगी। प्रवक्ता ने कहा, ‘हम भारत सरकार के साथ काम करने और देश में इस्तेमाल के लिए टीका उपलब्ध कराने की संभावनाएं तलाशने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।’
कंपनी ने शीत भंडारण सुविधाओं पर अपनी योजना का भी खुलासा किया है। प्रवक्ता ने कहा, ‘हमने टीके के निर्बाध परिवहन के लिए प्रभावी परिवहन एवं रखरखाव योजना तैयार की है। वैश्विक स्तर पर हम अपने प्रमुख परिवहन साझेदारों के साथ सड़क एवं वायु मार्ग से टीके के परिहवन की व्यवस्था करेंगे। दुनिया के जिस हिस्से में भी टीके का इस्तेमाल होगा, उन जगहों के लिए उसी अनुसार हमने परिवहन एवं रखरखाव का इंतजाम किया है।’ फाइजर टीके के भंडारण के लिए तीन विकल्पों पर काम कर रही है। पहला विकल्प अत्यधिक कम तापमान वाले फ्रीजर है, जो व्यावसायिक तौर पर उपलब्ध हैं और छह महीने तक ये टीका सुरक्षित रख सकते हैं। दूसरे विकल्प के रूप में विशेष रूप से तैयार तापमान नियंत्रित थर्मल शिपर्स तैयार किए गए हैं। कंपनी के अनुसार इनका इस्तेमाल अस्थायी भंडारण सुविधाओं के रूप में किया जा सकता है। प्रवक्ता नेक हा कि तीसरे विकल्प के तौर पर रेफ्रिजरेशन यूनिट का इस्तेमाल होगा, जो अस्पतालों में उपलब्ध रहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इतने कम तापमान पर रखने की कड़ी शर्तों के साथ टीके की गुणवत्ता बनाए रखना आसान नहीं होगा। कोल्ड चेन उपकरण बनाने वाले एक विनिर्माता के अनुसार भारत में इतने कम तापमान वाले फ्रीजर की सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। इस बारे में एक सूत्र ने कहा, ‘सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में फ्रीजर उपलब्ध हैं, जिनमें 2 से 8 डिग्री तक तापमान रह सकता है। इससे कम तापमान के लिए बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी। सुदूर क्षेत्रों में इंतजाम दुरुस्त रखने और इनकी निगरानी की भी जरूरत होगी।’ नीति आयोग के सदस्य विनोद पॉल ने संकेत दिया था कि फाइजर के टीके लिए भंडारण से जुड़ी चिंता एक बड़ी चुनौती है, साथ ही सीमित संख्या में इसकी खुराक उपलब्ध होने से भी भारत की जरूरतें पूरी नहीं होंगी। ब्लू स्टार में महानिदेशक बी त्यागराजन ने कहा,’हमारे पास तापमान शून्य से नीचे रखने के लिए तकनीक उपलब्ध है। इसके लिए मेडिक ल फ्रीजर की जरूरत होगी, जिसकी कीमत करीब 5 लाख रुपये है। शून्य से 15 से 25 डिग्री तक तापमान बनाए रखने के फ्रीजर पर करीब 2.5 लाख रुपये खर्च आएगा। हमारे पास ऐसी सुविधाएं मौजूद हैं।’