कोविड का केवल एक टीका!

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 1:17 AM IST

भारत कोविड-19 के लिए एक अंब्रेला टीका यानी ऐसा टीका विकसित करने पर काम कर रहा है, जो इस वायरस के सभी स्वरूपों पर असरदार  होगा। यह विभिन्न तरह के फ्लू के लिए बाजार में उपलब्ध टीके की तरह ही होगा। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने जानकारी दी कि सरकारी संस्थान उद्योग के साथ मिलकर यह पता लगाने का काम कर रहे हैं कि दो टीकों के मिश्रण (कॉकटेल) से बना कोविड टीका वायरस के विभिन्न स्वरूपों पर असरदार रहता है या नहीं।
हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि कौन सा संस्थान इस तरह का टीका विकसित करने पर काम कर रहा है मगर यह जरूर बताया कि सरकार उद्योग के साथ मिलकर इस तरह का टीका विकसित कर रही है। उक्त अधिकारी ने बताया, ‘टीका अभी तैयार नहीं हुआ है और इस पर काम चल रहा है। इसमें थोड़ा वक्त लगेगा। टीका बनने के बाद उसका क्लीनिकल परीक्षण किया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि मूल रूप से विज्ञान संस्थान, उद्योग और उद्योग के विज्ञानी नई पीढ़ी का कोविड टीका विकसित करने के लिए साथ मिलकर काम कर रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि यह वैज्ञानिक प्रयास है और और इस पर काम चल रहा है।

टीका उद्योग से जुड़े सूत्रों का दावा है कि इस पर दो दृष्टिïकोण के साथ काम किया जा रहा है। पहला, ऐसा टीका विकसित करना है जो वायरस के वुहान स्वरूप के अलावा इसके विभिन्न स्वरूपों जैसे डेल्टा आदि पर भी असरदार हो। दूसरा, दो स्वरूपों को मिलाकर देखा जाएगा कि इससे बेहतर नतीजे मिलते हैं या नहीं।
उदाहरण के लिए अहमदाबाद की कंपनी जायडस कैडिला अपने डीएनए-प्लाज्मिड कोविड टीके के साथ डेल्टा स्वरूप के लिए टीका विकसित करने पर काम कर रही है। जायडस के डीएनए-प्लाज्मिड टीके को देश में सीमित आपात उपयोग की मंजूरी मिल चुकी है। कंपनी प्रयोगशाला में विभिन्न स्वरूपों के लिए टीका विकसित करने पर भी काम कर रही है। 

बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में जायडस कैडिला के प्रबंध निदेशक शर्विल पटेल ने कहा, ‘हम डेल्टा स्वरूप की संरचना बना रहे हैं और हम परीक्षण के जरिये देखेंगे कि यह डेल्टा स्वरूप को बेहतर तरीके से निष्क्रिय कर सकता है या नहीं। अन्य स्वरूपों पर भी इसे आजमाया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि अगर यह मौजूदा वुहान स्वरूप की तुलना में वायरस के विभिन्न स्वरूपों पर कारगर साबित होता है तो टीके को भविष्य में उन्नत बनाया जा सकता है।
पटेल ने सदरलैंड यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है। उन्हें स्तन कैंसर पर शोध के लिए पीएचडी की डिग्री मिली है। उन्होंने दूसरे दृष्टिïकोण के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, ‘हम एक टीके में वायरस के दो स्वरूप मिलाएंगे- डेल्टा और कोई अन्य स्वरूप। यह फ्लू के टीके की तरह होगा जिसमें फ्लू के तीन या चार स्वरूपों को मिलाकर एक टीका तैयार किया जाता है। हालांकि अभी सभी शोध शुरुआती चरण में हैं और इसके नतीजे तुंरत आने की उम्मीद नहीं है। व्यावहारिक तौर पर इसमें कम से कम 5 से 6 महीने का वक्त लग सकता है।’

First Published : September 6, 2021 | 11:40 PM IST