सरकार नियंत्रित भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने तीन हवाईअड्डों-मंगलूरु, लखनऊ और अहमदाबाद- में अपने नाम का इस्तेमाल करने के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज के खिलाफ आपत्ति दर्ज की है। प्राधिकरण ने कहा कि अदाणी ने केवल अपने नाम का इस्तेमाल कर दोनों पक्षों के बीच हुए कन्सेशन एग्रीमेंट का उल्लंघन किया है। कन्सेशन एग्रीमेंट के अनुसार हवाईअड्डों के नाम किसी खास कंपनी या शेयरधारकों को प्रमुखता देने के लिए नहीं बदले जा सकते हैं। एएआई ने 21 दिसंबर को मंगलूरु एयरपोर्ट को इस संबंध में एक पत्र लिखा था। पत्र में कहा गया है, ‘ऐसा पाया गया है कि हवाईअड्डों पर अदाणी समूह के नाम जिस तरह दर्शाए गए हैं वे कन्सेशन एग्रीमेंट की तय शर्तों के खिलाफ जाते हैं। कुछ जगहों पर अदाणी एयरपोट्र्स लिखा पाया गया है, जो समझौते का सरासर उल्लंघन है।’
लखनऊ और अहमदाबाद हवाईअड्डों को भी इस संबंध में पत्र लिखे गए हैं। अदाणी समूह ने प्रत्येक हवाईअड्डों के लिए पृथक सहायक कंपनियां गठित की हैं। एएआई की आपत्ति पर अदाणी समूह की प्रतिक्रिया जानने के लिए भेजे गए सवालों का समाचार लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया था। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने भी कन्सेशन एग्रीमेंट का अध्ययन किया है। इसमें कहा गया है कि अगर कोई कंपनी अपने नाम का इस्तेमाल करना चाहती है तो उसे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के नाम एवं प्रतीक चिह्न (लोगो) को भी समान जगह देनी होगी। ये समझौते फिलहाल सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। समझौते के के अनुसार, ‘हवाईअड्डा या इसके किसी हिस्से का इस्तेमाल किसी भी रूप में समझौते में शामिल कंपनी या शेयरधारकों के विज्ञापन, उनकी प्रदर्शनी या नाम एवं पहचान के लिए नहीं किया जा सकता।’ एक दूसरे प्रावधान के तहत व्यवस्था है कि अगर कोई कंपनी किसी सार्वजनिक जगह पर अपना या शेयरधारकों के नाम प्रदर्शित करना चाहती है तो इससे पहले उसे एएआई का नाम इंगित करना होगा।
एएआई के एक निदेशकमंडल ने कहा कि प्राधिकरण की कानूनी टीम और संयुक्त उद्यम विभाग चिह्न पट्टिका (साइनबोर्ड) पर एएआई के नाम एवं इसके लोगो को समान स्थान देने के लिए अदाणी समूह से बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि इस मामले का हल जल्द ही खोज लिया जाएगा। हवाईअड्डे परिचालन प्रबंधन एवं विकास पट्टे पर अदाणी समूह को सौंपे गए हैं और एक बार अनुबंध समाप्त होने पर हवाईअड्डे दोबारा एएआई के पास आ जाएंगे। इस वजह से हमने आपत्ति दर्ज कराई है। समझौते के तहत कानूनी प्रावधानों का सभी पक्षों को पालन करना होगा।’ केंद्र सरकार ने हवाईअड्डों के निजीकरण की पहल के तहत पिछले वर्ष देश के छह हवाईअड्डे पट्टे पर दिए थे। इनमें तिरुवनंतपुरम, अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, मंगलूरु और गुवाहाटी हवाईअड्डा शामिल हैं। ये हवाईअड्डे सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत पट्टे पर दिए गए हैं। बोली प्रक्रिया में सबसे ऊंची बोली लगाने के बाद अदाणी समूह को 50 वर्षों के लिए इन हवाईअड्डों के परिचालन का अधिकार दिया गया था।