निजी क्षेत्रों को कम टीका आपूर्ति

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 2:42 AM IST

निजी टीकाकरण केंद्रों में टीकाकरण की धीमी रफ्तार पर बढ़ी चिंता के बीच निजी अस्पतालों ने टीके के नए स्टॉक की कमी, भुगतान वाले टीके की कम मांग और कुछ मामलों में टीके कम लेने से राज्यों द्वारा कोई आवंटन नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया है। कई बड़ी हॉस्पिटल चेन पहले ऑर्डर से ही बचे हुए टीके से अपना काम चला रही हैं जबकि छोटे अस्पतालों को किसी भी माध्यम से टीका लेने में मुश्किल आ रही है।
 
उजाला साइनस ग्रुप ऑफ  हॉस्पिटल्स के संस्थापक निदेशक, शुचिन बजाज ने कहा, ‘हमें सरकार या टीका निर्माताओं की तरफ  से कोई टीका नहीं मिला है जबकि हम कोविन पर पंजीकरण भी करा चुके हैं। हमें इसका कारण नहीं पता है।’ उद्योग के सूत्रों ने कहा कि दूसरी ओर बड़ी कॉरपोरेट हॉस्पिटल चेन के पास टीके का अच्छा स्टॉक है, नतीजतन उन्होंने कोविन पर जुलाई में कम ही ऑर्डर दिए।
 
मिसाल के तौर पर दक्षिण भारत के दो बड़े कॉरपोरेट हॉस्पिटल ने कहा कि उनके पास अभी टीके का पर्याप्त स्टॉक है और वे टीकाकरण का दायरा बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। मणिपाल हॉस्पिटल्स के प्रबंध निदेशक दिलीप जोस ने कहा, ‘हमने अभी तक कोविन का इस्तेमाल नहीं किया है क्योंकि हमारे पास पहले दिए गए ऑर्डर का स्टॉक उपलब्ध था।’ हालांकि, कई बड़े अस्पतालों का स्टॉक भी पहले ही समाप्त हो गया है। अब उन्हें टीके बेहद कम मिल रहे हैं और टीका खरीदने की प्रक्रिया भी काफी जटिल है। 
 
फोर्टिस हेल्थकेयर के प्रवक्ता ने कहा, ‘कई राज्यों में अभी भी इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि हम टीके कैसे खरीद सकते हैं और वितरण के लिए समय-सीमा क्या है। मुफ्त टीकाकरण के व्यापक प्रचार के कारण भुगतान करके टीके लेने वालों की संख्या में तेजी से कमी आई है।’ हालांकि केंद्र ने राज्यों से निजी कोविड टीकाकरण केंद्रों द्वारा टीकों की खरीद में आने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए कहा है, वहीं कंपनियों का मानना है कि निजी क्षेत्र में टीकाकरण की धीमी रफ्तार के लिए टीके की कीमत भी जिम्मेदार है। सरकार ने कोविशील्ड और कोवैक्सीन टीके की कीमत 250 रुपये तक तय की थी जबकि अब कोविशील्ड की कीमत 780 रुपये और कोवैक्सीन 1,410 रुपये में उपलब्ध है।
 
नैटहेल्थ के अध्यक्ष हर्ष महाजन ने कहा, ‘अधिकांश निजी केंद्रों में जहां टीके का स्टॉक उपलब्ध है वहां अपेक्षाकृत कम लोग ही आ रहे हैं। ऐसा लगता है कि लोग सरकारी टीकाकरण केंद्रों में मुफ्त टीका लेने का इंतजार करने के लिए तैयार हैं।’ देश में 1,800 से अधिक निजी कोविड टीकाकरण केंद्र हैं जबकि 29,000 से अधिक टीकाकरण केंद्र सरकार चला रही है। निजी अस्पतालों ने यह भी देखा है कि टीकाकरण की मांग प्रमुख शहरों में कम होने लगी है जहां आबादी के एक बड़े वर्ग को टीके लगाए जा चुके हैं।
 
मुंबई के एक अस्पताल के प्रबंधक ने कहा, ‘वरिष्ठ नागरिकों के टीकाकरण की प्रक्रिया मार्च में शुरू की गई। प्रमुख शहरों में रहने वाली बुजुर्ग आबादी के एक बड़े हिस्से को टीका लग चुका है। कई अन्य पात्र नागरिकों के लिए कोविन पर स्लॉट बुक करना मुश्किल हो गया है। कुछ लोग टीका लेने में संकोच कर रहे हैं जबकि कई लोग अपनी पसंद के टीके का इंतजार कर रहे हैं। इसी वजह से प्रमुख महानगरों में मांग घटी है।’
 
इस बीच 21 जून को लागू हुए नए टीका दिशानिर्देशों के तौर पर नगर निकाय, निजी अस्पतालों की मांग को राज्य सरकारों को बढ़ा रहे हैं। बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) के अतिरिक्त आयुक्त सुरेश काकणी ने कहा कि वे मुंबई में निजी अस्पतालों की मांग का संदेश राज्य सरकार तक पहुंचाते हैं जो इसे केंद्र  के साथ साझा करता है। काकणी ने कहा, ‘इससे उन्हें निजी क्षेत्र से अपेक्षित मांग का अंदाजा मिल जाता है।’ एक छोटे अस्पताल चेन के मालिक ने कहा कि उनके पास स्थानीय अधिकारियों को भुगतान करने के लिए संसाधन नहीं हैं जो प्रत्येक निजी अस्पताल को आवंटित किए जाने वाले टीकों की राशि पर हस्ताक्षर करते हैं। उन्होंने कहा, ‘जिला स्तर पर स्थानीय अधिकारी टीका आवंटन को मंजूरी देते हैं जिसे इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से मंजूरी दी जाती है। हमें यह पता लगाना होगा कि बैक चैनल में कैसे काम करना है।’
 
कोविड टीकाकरण के लिए संशोधित दिशानिर्देशों के तहत टीका विनिर्माताओं के पास 25 प्रतिशत स्टॉक निजी अस्पतालों द्वारा खरीद के लिए उपलब्ध है। राज्यों को अपनी कुल मांग तय करने और ऑर्डर देने के लिए बैक एंड प्रबंधन उपकरण के रूप में कोविन मंच का इस्तेमाल करने की आवश्यकता होती है। स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बुधवार को एक समीक्षा बैठक में बताया था कि कई निजी केंद्रों ने कोविड टीकों की निर्धारित मात्रा के लिए ऑर्डर नहीं दिए थे। अगर कुछ मामलों में ऑर्डर दिया भी गया तो टीके का भुगतान नहीं किया गया। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कुछ मामलों में दिए गए ऑर्डर के लिए भी कोई भुगतान नहीं किया गया। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि राज्यों और निजी अस्पतालों के पास लगभग 2 करोड़ खुराक उपलब्ध हैं जबकि टीके की 83 लाख खुराक पाइपलाइन में हैं।

First Published : July 16, 2021 | 12:02 AM IST