भारत के चुनाव आयुक्त अशोक लवासा को एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के उपाध्यक्ष पद की पेशकश की गई है। लवासा अभी मुख्य चुनाव आयुक्त बनने की दौड़ में हैं और इसके पहले वह भारत सरकार के वित्त सचिव और नागरिक उड्डयन सचिव पदों पर काम कर चुके हैं। अगर वह पेशकश से इनकार नहीं करते हैं तो वह चुनाव आयुक्त पद से इस्तीफा देने के बाद एडीबी के उपाध्यक्ष नियुक्त हो सकते हैं।
इस सिलसिले में पूछे जाने पर लवासा ने कहा, ‘इसके बारे में मुझे कोई सूचना नहीं है। यह फैसला बैंक द्वारा लिया जाएगा।’
एडीबी के मुख्यालय मनीला से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में लवासा के उपाध्यक्ष पद पर नियुक्त किए जाने की घोषणा की गई है। एडीबी 3 साल के लिए उपाध्यक्ष की नियुक्ति करता है, जिसे 2 साल के लिए और बढ़ाया जा सकता है। एडीबी के अध्यक्ष प्रबंधन दल का नेतृत्व करते हैं, जिनमेंं 6 उपाध्यक्ष होते हैं। केंद्र सरकार को इस तरह की सभी नियुक्तियों को अनुमति देती है इसलिए लवासा की मौजूदा नियुक्ति सरकार का समर्थन है।
लवासा मौजूदा उपाध्यक्ष दिवाकर गुप्ता की जगह लेंगे, जो निजी क्षेत्र के परिचालन और सार्वजनिक निजी हिस्सेदारी के प्रभारी हैं। गुप्ता का कार्यकाल 31 अगस्त को पूरा हो रहा है।
लवासा ने 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान सुर्खियां बटोरी थीं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगा था और उन्होंने सार्वजनिक रूप से चुनाव आयोग के कदम का विरोध किया था।
चुनाव के तुरंत बाद लवासा की पत्नी समेत उनके परिवार के 3 सदस्य आयकर विभाग की जांच के घेरे में आ गए थे, और उन पर आमदनी व संपत्तियां घोषित न करने का आरोप लगा था। उनके पुत्र अबीर की कंपनी (नॉरिस ऑर्गेनिक) और अशोक लवासा की बहन शकुंतला लवासा को आयकर विभाग का नोटिस मिला था, जो बाल रोग विशेषज्ञ हैं। परिवार के सदस्योंं ने आईटी विभाग की ओर से लगाए गए आरोपों से इनकार किया था।
लवासा ने 23 जनवरी 2018 को चुनाव आयुक्त का पदभार संभाला था। वह हरियाणा कैडर के 1980 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। 2001-02 में आर्थिक मामलों के विभाग के संयुक्त सचिव पद पर रहते हुए वह एडीबी से जुड़े मामले देख चुके हैं। चुनाव आयुक्त पद से हटने पर सरकार को ज्यादा उधार अधिकारी को इस पद पर नियुक्त करने का मौका मिल सकेगा।