‘टीका विकास तथा वितरण रणनीतियों के साथ तैयार है भारत’

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 3:45 AM IST

बीएस बातचीत
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक बलराम भार्गव ने रुचिका चित्रवंशी को बताया कि उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही टीका विकसित हो जाएगा तथा इसके वितरण के लिए कई देश भारत के साथ संपर्क में हैं। ई-मेल साक्षात्कार के संपादित अंश:

जहां तक भारत बायोटेक के टीके का सवाल है, इसके लिए 15 अगस्त कोई समयसीमा नहीं है। टीका आने की उम्मीद कब तक है? 
महामारी के प्रकोप को देखते हुए यह भारत का नैतिक कर्तव्य है कि वह विज्ञान, गुणवत्ता एवं नैतिकता के साथ समझौता किए बिना तेजी के साथ टीके को विकसित करे। हम किसी भी अहम प्रक्रिया को छोड़े बिना महामारी को खत्म करने के लिए टीका विकिसत करने में लगे हैं। भारत की दो घरेलू कंपनियां टीके के विकास को लेकर चिकित्सकीय परीक्षण के स्तर पर हैं। इन दोनों ने जानवरों में दवाई की विषाक्तता का अध्ययन सफलतापूर्वक कर लिया है और दवा नियंत्रक को डेटा पेश किया है। हम इस साल के अंत तक या अगले साल की शुरुआत में टीके की उम्मीद कर रहे हैं। हमारे परीक्षण सर्वोत्तम प्रथाओं एवं विश्व स्तर पर स्वीकृत मानदंडों का पालन करते हुए किए जा रहे हैं और आवश्यकतानुसार डेटा सुरक्षा निगरानी बोर्ड द्वारा समीक्षा की जाएगी।

प्लाज्मा थेरेपी परीक्षणों की स्थिति क्या है और परिणाम अभी तक घोषित क्यों नहीं हुए हैं?
प्लाज्मा थेरेपी पर अध्ययन जारी हैं और जब ये परीक्षण पूरा हो जाएंगे तथा डेटा का विश्लेषण किया जाएगा तो परिणाम की घोषणा की जाएगी।

हमारी एस्ट्राजेनेका के साथ साझेदारी है तो मॉडर्ना टीके को लेकर आईसीएमआर का दृष्टिकोण क्या है और भारत कैसे कर सकता है?
मॉडर्ना टीका अभी भी परीक्षण के चरण में है। भारत में भी दो स्वदेशी कंपनियां टीके का विकास कर रही हैं। भारत को दुनिया की फार्मेसी कहा जाता है और टीकों की आपूर्ति में भारत की अहम भूमिका रही है। अगर कोई दूसरा देश टीका विकसित करने में सफल होता है, तो भी भारत या चीन को अंतत: इसके विस्तार में अपनी भूमिका निभानी होगी। कई देश टीका वितरण के लिए भारत के साथ बातचीत कर रहे हैं।

क्या अगस्त के बाद संक्रमण के मामलों में गिरावट आ सकती है और अगर भविष्य में तेजी आती है तो क्या हम उसके लिए तैयार हैं?
इस समय ज्यादातर सक्रिय मामले महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों तक ही सीमित हैं। कई अन्य राज्यों में मामले कुछ जिलों तक ही सीमित हैं। संक्रमित रोगियों की संख्या में वृद्धि का मुख्य कारण देश में परीक्षणों की संख्या में तेजी आना है। अब हम शुरुआती स्तर पर मामलों का पता लगाने में सक्षम हैं, इसलिए आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार होने के आसार हैं, जिससे रिकवरी दर तेज हो सकती है। कोरोना एक नए तरह का संक्रमण है और हम अभी भी इस रोग को अलग-अलग पैमानों पर समझने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए संक्रमण के मामलों में वृद्धि या कमी की भविष्यवाणी करना बहुत मुश्किल है। हालांकि, देश की विशाल एवं विविध आबादी देखते हुए भारत ने अब तक बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है।

एक बार ठीक हुए मरीजों में दोबारा बीमारी के लक्षण देखे जाने की खबरें हैं। इम्युनिटी को लेकर इससे क्या पता चलता है?
यह सत्य नहीं है। अब तक, छिटपुट मामले हुए हैं और यह दोबारा संक्रमित होने जैसा नहीं है। एक संभावना यह है कि ठीक होने के बाद भी संक्रमित व्यक्ति में ऐंटीबॉडी का सही स्तर विकसित न हुआ हो। वहीं, कई दूसरे सिद्धांत भी हैं और ठोस सबूत मिलने तक ये सभी शोध का विषय हैं।

First Published : August 6, 2020 | 12:07 AM IST