वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण राजस्व की खराब स्थिति और वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत राज्यों के राजस्व में आई कमी के लिए जीएसटी मुआवजे की व्यवस्था पर चर्चा शुक्रवार को परिषद की बैठक के एजेंडे में अहम होंगे।
अप्रैल और मई महीने में कुल मिलाकर सरकार को जीएसटी संग्रह के रूप में महज 95,000 करोड़ रुपये मिले हैं, जो पिछले साल के समान महीनों के दौरान हुए कर संगग्रह की तुलना में आधे से भी कम है। इसकी वजह से राज्यों को दिए जाने वाले मुआवजे का बोझ बढ़ रहा है।
मुआवजा कोष में उपकर संग्रह कम होने की वजह से परिषद धन संग्रह के वैकल्पिक साधनों पर विचार करेगी, जिसमें बाजार से उधारी लिया जाना और उपकर की अवधि एक या दो साल के लिए और बढ़ाया जाना शामिल है, जिससे कि ली गई उधारी चुकाई जा सके।
जीएसटी परिषद की 40वीं बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगी। इसमें विभिन्न क्षेत्रों और कारोबारों को राहत देने पर भी चर्चा होगी, जो कोविड-19 के कारण प्रभावित हुए हैं। साथ ही जीएसटी रिटर्न दाखिल न करने पर लगने वाले विलंब शुल्क को माफ करने पर भी चर्चा होगी, जिन्होंने 2017 में इसे लागू किए जाने के बाद रिटर्न नहीं दाखिल किया है। इस बैठक में जीएसटी दरों को लेकर कोई फैसला होने की संभावना कम है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘राज्य सरकारें गंभीर वित्तीय संकट में हैं, क्योंकि कोविड-19 के कारण उनकी खर्च की जरूरतें बढ़ गई हैं और राजस्व के साधन बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। ऐसे में मुख्य एजेंडा राज्यों का मुआवजा होगा। बाजार से उधारी व्यावहारिक समाधान नजर आता है क्योंकि इस वित्त वर्ष में राजस्व की स्थिति खराब नजर आ रही है।’
उन्होंने कहा कि अप्रैल और मर्ई महीने में संग्रह सामान्य की तुलना में आधे से भी कम रहा है, ऐसी स्थिति में दरों में बदलाव शायद व्यावहारिक नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘इसी तरह से मांग बढ़ाने के लिए दरों में कटौती से संभवत: मदद नहीं मिलेगी क्योंकि जरूरी सामान पर दरें पहले ही बहुत कम हैं और विवेक से खर्च करने वाले धन में महामारी की वजह से कटौती हुई है। इसके अलावा ऐसा कोई अध्ययन नहीं है, जिससे यहपता चले कि दरों में कटौती से इस समय मांग पर क्या असर पड़ेगा। शेष राज्यों पर निर्भर है।’
परिषद की बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी और राज्यों के वित्त मंत्री सदस्य के रूप में बैठक में हिस्सा लेंगे।