बच्चों के पहले देसी टीके को मंजूरी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 1:43 AM IST

भारत में भी बच्चों के लिए पहला कोविड-19 रोधी टीका आ गया है। देश के औषध महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने कैडिला हेल्थकेयर (जाइडस कैडिला) के स्वदेश में ही विकसित जाइकोव-डी के आपात इस्तेमाल की आज इजाजत दे दी। तीन खुराकों वाला यह टीका 12 साल और अधिक उम्र वाले किशोरों को लगाया जाएगा।
इस टीके के साथ कई खासियत हैं। यह डीएनए प्लाज्मिड तकनीक से बना दुनिया का पहला टीका है। इसे सुई के बगैर ही लगाया जाएगा और यह सामान्य तापमान पर भी तीन महीने तक सुरक्षित रह सकता है। इसकी तीन खुराकें होंगी। पहली खुराक लगने के 28 दिन बाद दूसरी और 56 दिन बाद तीसरी खुराक दी जाएगी। इस बीच जाइडस ने दो खुराकों वाले टीके के परीक्षण का प्रतिरक्षा संबंधी ब्योरा भी डीसीजीआई के पास जमा करा दिया है। परीक्षण के मुताबिक दो खुराकों वाला टीका भी तीन खुराकों वाले टीके के बराबर कारगर है। इसलिए माना जा रहा है कि दो खुराकों वाले टीके को भी जल्द ही मंजूरी दे दी जाएगी।
सूत्रों का दावा है कि विशेषज्ञ समिति ने और भी ब्योरा मांगा है, जिसकी समीक्षा की जा सकती है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव और बिराक की चेयरपर्सन रेणु स्वरूप ने कहा, ‘यह बहुत गर्व की बात है कि आज जाइडस द्वारा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के साथ मिलकर बनाए गए कोविड-19 टीके जाइकोव-डी को इस्तेमाल की मंजूरी मिल गई है। दुनिया के इस पहले डीएनए कोविड-19 टीके को मिशन कोविड सुरक्षा के जरिये सहायता दी गई है।’

28,000 से अधिक वॉलंटियर्स पर किए तीसरे चरण के परीक्षण में मिले अंतरिम नतीजे बताते हैं कि आरटी-पीसीआर पॉजिटिव मामलों में यह टीका 66.6 फीसदी कारगर है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि भारत में कोविड-19 टीके का यह सबसे बड़ा परीक्षण है।

First Published : August 21, 2021 | 1:24 AM IST