विदेशी दवा कंपनियों मॉडर्ना और फाइजर द्वारा राज्यों को टीके की आपूर्ति से इनकार किए जाने के बाद केंद्र इस संकट के समाधान में पहल कर सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज कहा कि केंद्र नियामकीय मंजूरी और खुराकों की खरीद के लिए टीके बनाने वाली वैश्विक कंपनियों से सीधे बात करेगा।
देश में कोविड के हालात पर बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा, ‘हम केंद्र के स्तर पर टीका विनिर्माताओं के साथ बात कर रहे हैं। फाइजर और मॉडर्ना के पास हमेशा बेशुमार ऑर्डर होते हैं। वे अपने पास उपलब्ध अतिरिक्त स्टॉक के आधार पर भारत सरकार से बात करेंगे।’
अग्रवाल ने कहा कि वे भारत को कितनी आपूर्ति कर सकते हैं, उसके आधार पर केंद्र सरकार राज्यों को टीकों की आपूर्ति में मदद देगी। फाइजर और मॉडर्ना जैसी विदेशी दवा कंपनियों ने संकेत दिया है कि वे महामारी के दौरान कोविड-19 टीकों की आपूर्ति के लिए केवल केंद्र सरकार से ही बात करेंगी। वे राज्य सरकारों के साथ अलग-अलग बातचीत नहींं करेंगी।
फाइजर के प्रवक्ता ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘हमने शुरुआत से ही कहा है कि इस महामारी के दौरान फाइजर दुनिया भर में कोविड-19 टीके की आपूर्ति राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रमों के लिए केवल केंद्र सरकारों और वैश्विक संगठनों को करेगी। किसी देश में खुराकों का आवंटन एवं क्रियान्वयन योजना स्थानीय सरकारों का फैसला है।’
कंपनी ने कहा कि देश भर में इस्तेमाल के लिए फाइजर-बायोनटेक टीके मुहैया कराने को लेकर भारत सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अग्रवाल से सवाल पूछा गया कि दो टीकों कोविशील्ड और कोवैक्सीन की कुल मासिक उत्पादन क्षमता 8 करोड़ खुराक है, लेकिन मई के आखिर तक केवल 5 करोड़ खुराकों की ही आपूर्ति क्यों की गई। इस पर उन्होंने कहा कि उत्पादन की तुरंत आपूर्ति संभव नहीं होती है। अग्रवाल ने कहा, ‘इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रियाएं हैं। जो खुराक आज बनती है उसे उपलब्ध कराने में 7 से 9 दिन का समय लगता है।’
उन्होंने कहा कि फैक्टरी परिसर में उत्पादन के बाद स्टेबिलिटी एवं स्टेरिलिटी अध्ययन किया जाता है, जिसमें एक सप्ताह तक का समय लग सकता है। इसलिए टीके बैच में उपलब्ध कराए जाते हैं और सबसे पहले परीक्षण के लिए कसौली स्थित केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला में भेजे जाते हैं, जहां दूसरा दिन लग जाता है। इसके बाद टीकों को पूरे देश में आपूर्ति शृंखला नेटवर्क के जरिये पहुंचाया जाता है। संयुक्त सचिव ने कहा, ‘हमें अपना लॉजिस्टिक एवं स्टॉक प्रबंधन मजबूत करना होगा।’