केंद्र सरकार कमजोर प्रतिरोधी क्षमता वाले या कम से कम स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को कोविड-19 संक्रमण से बचाव के टीके की तीसरी खुराक लगाने की आवश्यकता की समीक्षा कर रही है। कई सरकारी एवं उद्योग जगत के सूत्रों ने कहा कि इस विषय पर गंभीरता से मंथन चल रहा है। सरकारी सूत्रों ने ऐसे संकेत दिए हैं कि टीकाकरण पर गठित राष्टï्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई ने इस पहलू पर विचार करना शुरू कर दिया है कि देश में कुछ खास समूह के लोगों को तीसरी खुराक लगाई जाए या नहीं।
इस विषय पर के चेयरमैन एन के अरोड़ा से संपर्क नहीं हो पाया। एक सूत्र ने बताया, ‘टीकाकरण पर कोई भी निर्णय वैज्ञानिक पहलुओं पर आधारित होगा। हम तीसरी खुराक या बूस्टर डोज के कारगर होने संबंधी दुनिया में उपलब्ध आंकड़ों पर विचार कर रहे हैं और स्थानीय स्तर पर भी आंकड़ों का अध्ययन कर रहे हैं। इस विषय पर भारत में भी अध्ययन चल रहा है।’
स्वास्थ्य मंत्रालय और इसकी सलाहकार इकाइयां तीसरी खुराक देने के विषय पर सतर्क रवैया अपना रहे हैं। इस बारे में सूत्र ने कहा, ‘देश में एक बड़ी आबादी को अब तक पहली खुराक भी नहीं लग पाई है। इस लिहाज से देश में कुछ खास क्षेत्रों के लोगों को तीसरी खुराक देने के संभावित लाभ का आकलन करना जरूरी होगा। इस संबंध में कोई भी निर्णय तथ्यों एवं आंकड़ों पर आधारित होगा।’
कोविड-19 संक्रमण की वजह से देश में काफी लोगों के शरीर में इस विषाणु से लडऩे की क्षमता उत्पन्न हो गई है। अधिकारी ने कहा कि इन हालात में यह विचार करना जरूरी है कि क्या तीसरी खुराक वाकई दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘एनटीएजीआई इन मामलों पर विचार कर रहा है। टीके की तीसरी खुराक लगाने से फायदा होगा या नहीं इस पर पिछले कुछ समय अध्ययन चल रहा है।’ इस बीच, अस्पताल उद्योग के सूत्रों ने कहा कि कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर की आशंका के बीच स्वास्थ्य कर्मियों को टीके की तीसरी खुराक लगाने की मांग जोर पकड़ रही है।
उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के संस्थापक निदेशक शुचिन बजाज का कहना है कि उन्होंने कुछ दिन पहले डॉक्टर और नर्सों को तीसरी खुराक लगाने की जरूरत के बारे में दिल्ली सरकार से संपर्ककिया था। बजाज ने कहा कि यह निर्णय वस्तुत: केंद्र सरकार को लेना है इसलिए इस मामले में स्वास्थ्य मंत्रालय से भी जल्द संपर्क साधा जाएगा। मुंबई स्थित एक अस्पताल के एक वरिष्ठï कर्मी ने कहा कि कई औद्योगिक इकाइयों ने कोविड-19 से लड़ाई में आगे रहने वाले लोगों को तीसरी खुराक लगाने के विषय पर केंद्र से आग्रह किया है।
हालांकि, देश में एक बड़ी आबादी को अब तक पहली खुराक भी मयस्सर नहीं हो पाई है इसलिए इस वक्त तीसरी खुराक देने का निर्णय लेना सरकार के लिए भी आसान नहीं होगा। इस कर्मी ने कहा कि अगर तीसरी खुराक की जरूरत महसूस होती है तो इसका एक मतलब यह भी निकाला जा सकता है कि कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिए दो खुराक शायद पर्याप्त नहीं है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सरकार सतर्कता के साथ इस मामले में कदम बढ़ा रही है।
अगस्त में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सितंबर के अंत तक दुनिया के देशों से तीसरी खुराक लगाने का सिलसिला शुरू नहीं करने का आह्वïान किया था। डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि अब तक कई देशों में सभी नागरिकों को पहली खुराक भी नहीं लग पाई है इसलिए तीसरी खुराक का निर्णय फिलहाल टाल देना चाहिए। इजरायल और जर्मनी जैसे देशों ने अपने नागरिकों को तीसरी खुराक लगाना शुरू कर दिया है। कनाडा के कुछ प्रातों में भी तीसरी खुराक लगाई जा रही है।