वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण पूरी दुनिया में आर्थिक गतिविधियां ठहर गई, खासकर कैलेंडर वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून 2020) में इसका व्यापक असर रहा। इसका विश्व के प्रमुख शहरों की आवासीय संपत्तियोंं पर विपरीत असर पड़ा है।
नाइट फ्रैंक के प्राइम ग्लोबल सिटीज इंडेक्स में 45 शहरोंं के दाम होते हैं। इस सूचकांक में अक्टूबर-दिसंबर 2009 तिमाही (2009 की चौथी तिमाही) में जब पूरी दुनिया में वित्तीय संकट था, के बाद की सबसे बड़ी गिरावट आई है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि 2021 की रिकवरी के पहले 2020 की दूसरी छमाही में वृद्धि स्थिर रहेगी। सोमवार को जारी नाइट फ्रैंक के सर्वे में कहा गया है, ‘जून 2020 तिमाही में कीमतों में बढ़ोतरी 0.9 प्रतिशत रही है, जो मार्च 2020 तिमाही में 2.3 प्रतिशत थी।’
इसके बावजूद प्रमुख भारतीय शहरों में कीमतों मेंं सालाना वृद्धि के हिसाब से बेंगलूरु दुनिया का 26वां तेजी से बढ़ता प्रमुख आवासीय बाजार है। वहीं नई दिल्ली में 2020 की दूसरी तिमाही में पिछले साल की समान अवधि की तुनलना मेंं कीमतों में 0.6 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है और 19,727 रुपये प्रति वर्गफुट दाम रहे। नई दिल्ली का वैश्विक सूचकांक में 27वां स्थान है।
बहरहाल मुंबई में पिछले सा की तुलना में कीमतोंं में 0.6 प्रतिशत ीक गिरावट आी है और शहर का सूचकांक में 32वां स्थान है।
सर्वे के मुताबिक 45 शहरों में से सिर्फ 16 शहरों में पूंजीगत मूल्य में गिरावट आई है। बैंकॉक, नैरोबी, लंदन, हॉन्गकॉन्ग और डबलिन सूचकांक में निचले स्तर पर हैं, जहां 38 से 5.8 प्रतिशत तक दाम गिरे हैं। वहींं मनीला, टोक्यो, स्टॉकहोम, मॉस्को और जिनेवा में पूंजीगत मूल्य में इस अवधि के दौरान पिछले साल की तुलना में सबसे ज्यादा दाम बढ़े हैं।