facebookmetapixel
JioBlackRock MF ने लॉन्च किए 2 नए डेट फंड, ₹500 से SIP शुरू; इन फंड्स में क्या है खास?Titan Share: ऑल टाइम हाई पर टाटा का जूलरी स्टॉक, अब आगे क्या करें निवेशक; जानें ब्रोकरेज की रायQ3 नतीजों से पहले चुनिंदा शेयरों की लिस्ट तैयार: Airtel से HCL Tech तक, ब्रोकरेज ने बताए टॉप पिकBudget 2026: बजट से पहले सुस्त रहा है बाजार, इस बार बदलेगी कहानी; निवेशक किन सेक्टर्स पर रखें नजर?LIC के शेयर में गिरावट का संकेत! डेली चार्ट पर बना ‘डेथ क्रॉस’500% टैरिफ का अल्टीमेटम! ट्रंप ने भारत को सीधे निशाने पर लियाAmagi Media Labs IPO: 13 जनवरी से खुलेगा ₹1,789 करोड़ का इश्यू, प्राइस बैंड तय; चेक करें जरुरी डिटेल्स$180 मिलियन के शेयर सौदे पर सेबी की सख्ती, BofA पर गोपनीय जानकारी लीक करने का आरोपसोने को पछाड़कर आगे निकली चांदी, 12 साल के निचले स्तर पर पहुंचा गोल्ड-सिल्वर रेशियोStock To Buy: हाई से 40% नीचे मिल रहा आईटी स्टॉक, ब्रोकरेज ने कहा- खरीद लें; 71% तक चढ़ सकता है शेयर

Trump का बड़ा ऐलान, भारत-चीन पर जल्द लगेगा जवाबी शुल्क

Trump ने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साफ बता दिया है कि भारत को अमेरिकी जवाबी शुल्क से कोई छूट नहीं मिलेगी।

Last Updated- February 23, 2025 | 8:37 AM IST
President Donald Trump
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप (PTI)

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने कहा है कि उनकी सरकार भारत और चीन जैसे देशों पर जल्द ही जवाबी शुल्क (reciprocal tariffs) लगाएगी। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका उन देशों पर उतना ही शुल्क लगाएगा, जितना वे अमेरिका से वसूलते हैं।

ट्रंप ने शुक्रवार को वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के शपथ ग्रहण समारोह में कहा, “अगर कोई देश हमसे शुल्क लेता है, तो हम भी उन पर उतना ही शुल्क लगाएंगे। यह बहुत सीधा-साधा नियम है। हम निष्पक्ष होना चाहते हैं, इसलिए जवाबी शुल्क जरूरी है।”

इससे पहले मंगलवार को ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साफ बता दिया है कि भारत को अमेरिकी जवाबी शुल्क से कोई छूट नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा, “इस मुद्दे पर कोई भी मुझसे बहस नहीं कर सकता।”

यह भी पढ़ें: चीनी रिसर्चर्स ने एक नए कोरोना वायरस की खोज की, लेकिन क्या इंसानों को इससे खतरा हो सकता है?

ट्रंप ने यह बयान फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में दिया, जिसे मंगलवार रात प्रसारित किया गया। इसी इंटरव्यू में अरबपति ईलॉन मस्क (Elon Musk) भी मौजूद थे।

गौरतलब है कि 13 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की व्हाइट हाउस में बैठक से कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने जवाबी शुल्क की घोषणा कर दी थी। उनके मुताबिक, अमेरिका अपने हर विदेशी व्यापारिक साझेदार पर बराबर का शुल्क लगाएगा।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को नए वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक की तारीफ की और कहा कि हावर्ड को बिजनेस की अच्छी समझ है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि कोविड से पहले अमेरिका की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे बेहतरीन थी। उन्होंने आगे जोड़ा, “लेकिन अब टैरिफिंग बहुत दिलचस्प होने वाली है और इसकी जिम्मेदारी हावर्ड के पास होगी।”

यह भी पढ़ें: FBI के नए डायरेक्टर बने काश पटेल, भगवद गीता पर ली शपथ [Watch Video]

इस दौरान ट्रंप ने टैरिफ से जुड़ा एक मजेदार किस्सा भी सुनाया। उन्होंने कहा, “पहले ‘टैरिफ’ मेरा पसंदीदा शब्द था, लेकिन मुझे इसे चौथे नंबर पर रखना पड़ा। मैंने ‘परिवार’, ‘प्यार’ और ‘भगवान’ को पहले रख दिया।”

ट्रंप ने मजाकिया लहजे में कहा, “भगवान को पहले रखना जरूरी है क्योंकि हम कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। एक बार मैंने ‘टैरिफ’ को अपना फेवरेट शब्द कहा था, तो फेक न्यूज वालों ने मुझसे पूछा—’भगवान, परिवार और रिश्तों का क्या?’ फिर मैंने कहा, ‘आप सही कह रहे हैं।'”

ट्रंप की यह बात सुनकर कमरे में मौजूद लोग हंस पड़े। उन्होंने कहा, “अब मैंने ‘टैरिफ’ को अपना चौथा पसंदीदा शब्द बना लिया है।”

यह भी पढ़ें: ट्रंप का भारत को सख्त संदेश: ‘जो शुल्क आप लगाओगे, वही हम भी लगाएंगे’

क्या होता है रेसिप्रोकल टैरिफ?

रेसिप्रोकल टैरिफ वह कर या व्यापारिक प्रतिबंध है, जिसे एक देश तब लागू करता है जब दूसरा देश उसके उत्पादों पर शुल्क बढ़ाता है या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगाता है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यापार संतुलन बनाए रखना और घरेलू उद्योगों की रक्षा करना होता है।

अगर कोई देश किसी उत्पाद पर आयात शुल्क बढ़ाता है, तो दूसरा देश भी उसी तरह की प्रतिक्रिया दे सकता है और उस देश से आने वाले सामानों पर टैरिफ लगा सकता है। यह कदम स्थानीय उद्योगों को सुरक्षित रखने और रोजगार को प्रभावित होने से बचाने के लिए उठाया जाता है।

हालांकि, ऐसे टैरिफ से व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे सप्लाई चेन बाधित हो सकती है, उपभोक्ताओं को महंगे उत्पाद खरीदने पड़ सकते हैं, और आर्थिक विकास धीमा हो सकता है। इसलिए, व्यापारिक मतभेदों को हल करने के लिए टैरिफ लगाने के बजाय आपसी बातचीत और समझौते को प्राथमिकता देना बेहतर होता है।

-एजेंसी इनपुट के साथ

First Published - February 23, 2025 | 8:37 AM IST

संबंधित पोस्ट