facebookmetapixel
Advertisement
9 दिन बाद संभला रुपया, RBI के दखल और कच्चे तेल में नरमी से मिली बड़ी राहतआपकी SIP कैसे रुपये को कर रही है कमजोर? Jefferies ने बताई इसकी कड़वी सच्चाई  LIC Q4FY26 Results: मुनाफा 23% बढ़कर ₹23,420 करोड़, ₹10 के डिविडेंड का ऐलानअब मुंबई की बारिश पर भी लगेगा दांव, हर बूंद का होगा सौदा; समझिए Rain Futures ट्रेडिंग कैसे होगीअब एक OTP नहीं, दो की होगी जरूरत, बुजुर्गों के पैसे रहेंगे पूरी तरह सुरक्षित; जानें डीटेलयूपी में जल्द जमीन पर उतरेंगे ₹7 लाख करोड़ के निवेश, डिफेंस कॉरिडोर पर योगी सरकार का बड़ा दांवITC Q4FY26 Results: मुनाफा 74% घटकर ₹5,113 करोड़ पर आया, ₹8 के डिविडेंड का ऐलान Explainer: 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड क्या है और इस पर सबकी नजर क्यों रहती है? भारत का बॉन्ड मार्केट क्यों दे रहा खतरे का इशारा? नीतिगत राहत के बावजूद निवेशक क्यों हैं नाखुश?IPO प्राइस से नीचे फिसला टाटा कैपिटल, एक्सपर्ट ने बताई आगे की ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी

पिछले छह दशक में पहली बार घटी चीन की आबादी, देश में जन्म दर घटने का जनसंख्या पर दिखा असर

Advertisement
Last Updated- January 17, 2023 | 11:29 PM IST
India's concern increased due to increase in Kovid in China

पिछले साल छह दशकों में पहली बार चीन की आबादी में गिरावट दर्ज की गई। इससे चीन की आबादी में गिरावट की लंबी अवधि के शुरू होने का संकेत मिलता है जिसका प्रभाव चीन की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ दुनिया पर भी दिखेगा। चीन ने बढ़ती बुजुर्गों की आबादी और घटती जन्म दर के बीच पहली बार अपनी आबादी में गिरावट की घोषणा की है।

चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, देश में पिछले वर्ष की तुलना में 2022 के अंत में आबादी 8,50,000 कम रही। ब्यूरो ने मंगलवार को बताया कि 1.041 करोड़ लोगों की मौत के मुकाबले 95.6 लाख लोगों के जन्म के साथ देश की आबादी 1.411.75 अरब रह गई। इनमें से 72.206 करोड़ पुरुष और 68.969 करोड़ महिलाएं हैं।

चीन में वर्ष 2016 में ‘एक परिवार एक बच्चा’ नीति खत्म कर दी गई थी। साथ ही देश में परिवार के नाम को आगे बढ़ाने के लिए पुरुष संतान को तरजीह देने का चलन है। इस नीति को खत्म किए जाने के बाद चीन ने परिवारों को एक से अधिक बच्चों के जन्म के लिए प्रोत्साहित किया लेकिन उसे अधिक सफलता नहीं मिल पाई।

चीन के शहरों में बच्चों के पालन-पोषण के अत्यधिक खर्च को इसकी एक वजह बताया जाता है। पूर्वी एशिया के अधिकतर हिस्सों में भी ऐसा दिखता है जहां जन्म दर में तेजी से गिरावट आई है।

भारत में हरेक दस साल बाद जनगणना होती है और 2021 में उसकी जनगणना होनी थी लेकिन वै​श्विक महामारी के कारण उसमें देरी हो रही है। लंबी अव​धि के लिहाज से संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि 2050 तक चीन की आबादी में करीब 10.9 करोड़ की कमी आएगी जो 2019 में उसके पिछले अनुमान के मुकाबले तिगुनी गिरावट है।

चीन लंबे समय से दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश रहा है, लेकिन जल्द ही भारत के इसे पीछे छोड़ने की संभावना है। भारत की अनुमानित आबादी अभी 1.4 अरब है और जो लगातार बढ़ रही है।

ब्यूरो के अनुसार, चीन में 16 से 59 साल की उम्र के यानी कामकाजी आयु के कुल 87.556 करोड़ लोग हैं जो देश की कुल आबादी का 62.0 फीसदी है। वहीं 65 वर्ष और उससे अधिक आयु वालों की कुल संख्या 20.978 करोड़ है जो कुल आबादी का 14.9 फीसदी है।

वर्ष 2022 में स्थायी शहरी आबादी 64.6 करोड़ से बढ़कर 92.071 करोड़ हो गई जो कुल आबादी का 65.22 फीसदी है जबकि ग्रामीण आबादी में 73.1 लाख की गिरावट आई।

कोविड-19 महामारी के प्रकोप के कारण जनसंख्या आंकड़ों पर संभावित प्रभाव के बारे में कोई सीधी टिप्पणी नहीं की गई है। संक्रमण का पहला मामला वुहान शहर में सामने आया था।

Advertisement
First Published - January 17, 2023 | 11:11 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement