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Women Reservation Bill: नई संसद में महिला आरक्षण विधेयक पेश

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को ही महिला आरक्षण विधेयक पर अपनी मंजूरी दे दी थी। इस पर बुधवार को लोकसभा में चर्चा होगी।

Last Updated- September 19, 2023 | 10:50 PM IST
Women Reservation Bill :

महिला आरक्षण विधेयक नए संसद भवन के उद्घाटन सत्र में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पेश किया गया पहला विधेयक बन गया। नारी श​क्ति वंदन अ​धिनियम, 128वें संविधान संशोधन विधेयक के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आर​क्षित करने का प्रस्ताव है। संसद की कार्यवाही आज से नए भवन में शुरू हुई है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को ही इस विधेयक पर अपनी मंजूरी दे दी थी। इस पर बुधवार को लोकसभा में चर्चा होगी। इस विधयेक को लाने का श्रेय लेने के लिए राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी शुरू हो गई। कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मामले में अपने कदम वापस खींच लिए थे, मगर आगामी चुनाव के मद्देनजर अब इस विधेयक को संसद में पेश किया है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इसे ‘हमारा’ होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने 2010 में ही इसे राज्यसभा में पारित कराने की को​शिश की थी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने इस विधेयक को समाप्त होने दिया या फिर उसकी करीबी पार्टियों ने इसे पेश होने से रोक दिया। विपक्ष ने यह भी कहा कि इस विधेयक में ऐसे प्रावधान किए गए हैं कि इसे 2034 से पहले और शायद उसके बाद भी लागू नहीं किया जा सकेगा।

विधेयक में अगला परिसीमन होने के बाद ही महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने की परिकल्पना की गई है। परिसीमन 2026 में होना था, लेकिन जनगणना के ताजा आंकड़ों के अभाव में इसकी संभावना नहीं दिखती है। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने 2021 की जनगणना नहीं की और अपनी अक्षमता के लिए वै​श्विक महामारी को जिम्मेदार ठहराया।

ऐसे में प्रस्तावित कानून का प्रभावी कार्यान्वयन करीब 5 साल के लिए स्थगित हो जाएगा। इस विधेयक में कोटा खत्म करने के लिए 15 साल का समय निर्धारित किया गया है जिसे बढ़ाया जा सकता है। विधयेक में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए इन समुदायों के लिए आरक्षित सीटों में ही आरक्षण देने का प्रावधान है।

यह विधेयक 2010 में राज्यसभा में पारित अपने पूर्ववर्ती 108वें संशोधन की ही तरह अनुच्छेद 239एए में संशोधन करने और अनुच्छेद 330ए, 332ए और 334ए को शामिल करने का प्रस्ताव करता है। अनुच्छेद 334ए एससी और एसटी के लिए सीटों का आरक्षण खत्म करने से संबंधित है। इससे पहले दोपहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में सभी सांसद पुराने संसद भवन से निकलकर नए संसद भवन गए।

मोदी ने पुराने संसद भवन का नाम संविधान सदन रखने का प्रस्ताव किया है। उन्होंने लोकसभा में घोषणा की कि नए संसद भवन में सरकार का इरादा पहले विधेयक के तौर पर महिला आरक्षण विधेयक लाने का है, जो 27 वर्षों से लंबित है। साथ ही उन्होंने इसे सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की।

प्रधानमंत्री ने जी20 में महिलाओं से संबंधित विकास और महिलाओं के लिए अपनी सरकार की योजनाओं का भी उल्लेख किया। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि 2010 में पेश विधेयक प्रभावी नहीं था जैसा कि कांग्रेस दावा करती है। 15वीं लोकसभा के विघटन के साथ ही यह समाप्त हो गया था क्योंकि राज्यसभा ने इसे लोकसभा में भेज दिया था।

बहरहाल, लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा बुधवार को होगी और संभवत: उसी दिन इसे पारित कर दिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद जताई है कि पांच दिनों के इसी विशेष सत्र में राज्यसभा से भी इस विधेयक को हरी झंडी मिल जाएगी।

विपक्ष का कहना है कि इस विधेयक को पारित करने के लिए सरकार की उत्सुकता और उसकी मंशा सही नहीं है। उसका कहना है कि वास्तव में दोनों सदनों से पारित होने के बावजूद इसे प्रभावी तौर पर लागू होने में करीब 5 साल अथवा उससे भी अधिक समय लगेगा।

बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) को छोड़कर अधिकतर विपक्षी दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया है। उनका कहना है कि वे प्रस्तावित कानून में सुधार का सुझाव देंगे और इसे महज चुनावी जुमला बनाए जाने का विरोध करेंगे। वे यह भी बताएंगे कि तृणमूल कांग्रेस अपनी एक तिहाई सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित करने की योजना पहले से ही बना रही है। बसपा ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग की है।

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First Published - September 19, 2023 | 10:50 PM IST

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