उत्तर प्रदेश

UPPTCL का फ्यूचर रोडमैप: ग्रीन एनर्जी, डिजिटल ग्रिड और मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क पर फोकस

यूपीपीटीसीएल देश के सबसे बड़े और जटिल ट्रांसमिशन नेटवर्क में से एक का प्रबंधन करता है ताकि भौगोलिक और औद्योगिक विविधता वाले इस बड़े प्रदेश को सहजता से बिजली मिल सके

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वीरेंद्र सिंह रावत   
Last Updated- December 29, 2025 | 9:55 PM IST

उत्तर प्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीटीसीएल) राज्य का बिजली ट्रांसमिशन ढांचा संभालता है। यूपीपीटीसीएल के प्रबंध निदेशक मयूर माहेश्वरी ने वीरेंद्र सिंह रावत के साथ साक्षात्कार में बताया कि यह उपक्रम पर्यावरण अनुकूल, भरोसेमंद और तकनीक आधारित ट्रांसमिशन नेटवर्क तैयार करने में जुटा है। प्रमुख अंश-

यूपीपीटीसीएल के अधीन कौन सी परिसंपत्तियां और कितना बड़ा ट्रांसमिशन ढांचा आता है?

यूपीपीटीसीएल देश के सबसे बड़े और जटिल ट्रांसमिशन नेटवर्क में से एक का प्रबंधन करता है ताकि भौगोलिक और औद्योगिक विविधता वाले इस बड़े प्रदेश को सहजता से बिजली मिल सके। इस समय हमारे पास 59,169 सर्किट किलोमीटर की एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (ईएचवी) ट्रांसमिशन लाइन हैं। इनमें 765 केवी, 400 केवी, 220 केवी और 132 केवी की लाइनें हैं। इसके अलावा कुल 703 एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज सबस्टेशन हैं जिनमें सात 765 केवी के, चालीस 400 केवी के, 170 सबस्टेशन 220 केवी के और 486 सबस्टेशन 132 केवी के हैं। इसके जरिये ग्रिड का मजबूत आधार तैयार होता है। दो लाख एमवीए से अधिक की ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता, जो बड़े पैमाने पर जनरेटर से वितरण इकाइयों तक बिजली का जाना संभव बनाती है।

उत्तर प्रदेश बिजली खपत में अनुमानित वृद्धि को पूरा करने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। यूपीपीटीसीएल की क्या तैयारी है?

यूपीपीटीसीएल ने 2030-35 तक की अनुमानित लोड वृद्धि को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक और दूरदर्शी क्षमता वृद्धि कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत पर्याप्त संख्या में ईएचवी सबस्टेशन तथा अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता की योजना बनाई गई है।

योगी आदित्यनाथ की सरकार 22,000 मेगावॉट तक सौर ऊर्जा हासिल करना चाहती है। यूपीपीटीसीएल इस लक्ष्य से कैसे जुड़ा है?

यूपीपीटीसीएल सौर ऊर्जा क्षमता विकास में महत्त्वपूर्ण सक्षम भूमिका निभा रहा है। यह पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा ग्रिड विकसित कर मुख्यमंत्री के 22,000 मेगावाट सौर क्षमता लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विवेकपूर्ण ऊर्जा मिश्रण का उपयोग करने के मार्ग पर है। इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा की अस्थिरता को प्रबंधित करने हेतु रिएक्टिव पावर क्षतिपूर्ति और स्वचालित मांग-आपूर्ति संतुलन का एकीकरण तथा शून्य-कार्बन परिचालन प्रथाओं, डिजिटलीकरण और पूर्वानुमानित परिसंपत्ति प्रबंधन को बढ़ावा देना आदि कई पहलों पर काम चल रहा है।

बिजली औद्योगिक वृद्धि की बुनियादी जरूरत है। यूपीपीटीसीएल इसके लिए किस प्रकार तैयार है।

हमने कई तैयारियां की हैं। उदाहरण के लिए औद्योगिक क्लस्टर्स के लिए प्लग ऐंड प्ले ईएचवी कनेक्शन, निर्माण जोन, रक्षा कॉरिडोर, आईटी पार्क और लॉजिस्टिक्स हब बनाए जा रहे हैं। यूपी डिफेंस कॉरिडोर, फिल्म सिटी, डेटा सेंटर्स, एक्सप्रेसवे और इंडस्ट्री कॉरिडोर्स के लिए समर्पित ट्रांसमिशन योजना बनाई जा रही है।

यूपीपीटीसीएल ट्रांसमिशन नुकसान रोकने तथा बचत के लिए क्या योजनाएं बना रहा है?

वास्तव में यूपीपीटीसीएल का ट्रांसमिशन घाटा भारत में सबसे कम के करीब है। 3.18 फीसदी की स्वीकृत सीमा की तुलना में यह 3.22 फीसदी है। इससे पता चलता है कि हम ग्रिड अनुशासन के मामले में कितने बेहतर हैं। सभी प्रमुख एसटीयू और जिनका मांग नुकसान समान यानी 3-4 फीसदी के बीच है, इसे कम करने के लिए 400/220/132 केवी स्तरों पर अनुकूलित लोड फ्लो योजना और रणनीतिक नेटवर्क सुदृढ़ीकरण करने पर काम किया जा रहा है।

यूपीपीटीसीएल के भविष्य के लिहाज से तैयारी?

यूपीपीटीसीएल के भविष्य के खाके के कुछ प्रमुख आधार हैं। इसमें पूरी तरह डिजिटल और रिमोट संचालित सबस्टेशन, डिजिटल ग्रिड 2030-35 का विकास, एआई संचालित एनालिटिक्स और दूर से संचालन तथा टेलिकॉम ऑप्टिक फाइबर लीजिंग और नॉन टैरिफ राजस्व बढ़ाने वाले मॉडल को अपनाया जा रहा है।

First Published : December 29, 2025 | 9:50 PM IST