केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान | फाइल फोटो
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कहा कि संसद में पेश किए जाने वाला नया बीज विधेयक विदेशी बीजों के भारत में आने का नहीं रास्ता खोलेगा बल्कि नियामक प्रणाली को मजबूत करेगा। इससे बीजों को हमारी कृषि, जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल होने या नहीं होने के पूर्ण मूल्यांकन के बाद ही मंजूरी दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि नए विधेयक में घटिया बीज बेचने पर मौजूदा दंड 500 रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दिया गया है। यदि घटिया बीज जानबूझकर बेचे या उनको उत्पादन जाता है तो इस विधेयक में तीन साल तक की सजा का भी प्रावधान किया गया है।
चौहान ने संवाददाताओं को नए बीज विधेयक के बारे में बताया कि यह दशकों पुराने बीज अधिनियम 1966 व बीज (नियंत्रण) आदेश 1983 के स्थान पर आएगा।
चौहान ने इस विधेयक को लेकर चिंताओं को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसानों की पैदावार, बोआई, बचत, एक्सचेंज और खेत के बीजों को बेचने के अधिकार की सुरक्षा करता है। इसके अलावा विधेयक गैरकानूनी बीजों के उत्पादन और बेचने पर कड़े दंड का प्रावधान करता है। उन्होंने कहा, ‘यह गलत धारणा फैलाई गई है कि यह पारंपरिक बीजों को प्रभावित करेगा। यह सही नहीं है।’
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मंत्री ने स्पष्ट किया कि विधेयक के प्रावधान पांरपरिक किस्मों सहित किसानों व किसानों की फसलों की किस्मों पर लागू नहीं होते हैं। उन्होंने कहा, ‘किसान अपने बीज बो सकते हैं। किसान दूसरे किसानों को बीज दे सकते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि पारंपरिक प्रणाली में किसान बोआई के समय बीज उधार लेते हैं और बाद में उसकी सवा गुना राशि लौटाते हैं, यह प्रणाली बिना किसी बाधा के जारी रहेगी।
बीज विधेयकों में आखिरी बार 1960 के दशक में संशोधन किया गया था। इसके बाद से विधेयकों में ठोस बदलाव करने के कई प्रयास किए गए हैं, लेकिन कोई भी प्रयास सफल नहीं हो सका।
कृषि मंत्रालय मसौदा विधेयक पर प्राप्त 9,000 सुझावों सहित आवेदनों पर कार्रवाई कर रहा है। सरकार का लक्ष्य अगले महीने बजट सत्र के पहले चरण में इस विधेयक को पेश करना है।