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सरकार की महत्त्वाकांक्षी इलेक्ट्रॉनिक नैशनल एग्रीकल्चरल मार्केट (ई-नाम) के दूसरे संस्करण को शुरुआती गड़बड़ियों का सामना करना पड़ रहा है। इसकी प्रायोगिक परियोजना नवंबर की शुरुआत से राजस्थान में चल रही है और राज्य ने इसमें आने वाली समस्याओं को लेकर चिंता जताई है।
सूत्रों ने कहा कि राजस्थान ने नवंबर की शुरुआत से ही कई पत्र लिखकर पुराने प्लेटफॉर्म से नए प्लेटफॉर्म पर आंकड़ों को लाने में आ रही कठिनाओं के बारे में जानकारी दी है, जिसकी वजह से मंडियों में पूरा कारोबार फिर से मैनुअल हो गया है।
ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि 3 नवंबर से राज्य में नया मॉड्यूल लागू होने के बाद ई-नाम के पुराने संस्करण ने काम करना बंद कर दिया है।
ई-नाम के दूसरे संस्करण को लागू करने के लिए राजस्थान और तमिलनाडु को प्रायोगिक तौर पर चुना गया है। राजस्थान ने नवंबर की शुरुआत से प्रायोगिक परियोजना शुरू कर दी है, जबकि तमिलनाडु को अभी इसे शुरू करना है।
राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हम यह नहीं कह रहे हैं कि नया प्लेटफॉर्म त्रुटिपूर्ण है, लेकिन हम पुराने से नए संस्करण में जाने में कई कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। इसकी वजह से अंतिम समाधान नहीं मिल पा रहा है।’ उन्होंने कहा कि राजस्थान में करीब 1.5 लाख ट्रेडर्स और 16 लाख किसानों का पुराने ई-नाम में पंजीकरण हुआ था, लेकिन इन सभी को बाधारहित तरीके से नई व्यवस्था में लाने में कई कठिनाइयां आ रही हैं।
नई व्यवस्था राज्य की करीब 173 मंडियों में लागू की गई है। अधिकारी ने कहा, ‘हमें सभी किसानों और ट्रेडर्स का नए सिरे से पंजीकरण करना होगा, क्योंकि नई व्यवस्था में बाधारहित तरीके से माइग्रेशन नहीं हो पा रहा है। नए सिरे से पंजीकरण कठिन काम है, क्योंकि अभी फसलों के आने का मौसम है।’
उन्होंने कहा कि जब किसान अपने उत्पाद ट्रक में भरकर मंडियों में ला रहे हैं, ऐसे में माल की बिक्री के लिए उनसे आधार व बैंक का ब्योरा मांगने और नए सिरे से उनका पंजीकरण करने में बड़ी समस्या है।
सूत्रों ने कहा कि मूल योजना के अनुसार ई-नाम 2.0 को जून 2025 के अंत तक लागू किया जाना था, लेकिन काफी देरी के बाद इसे 4 नवंबर 2025 से राजस्थान में लॉन्च किया गया।