पूरी दुनिया जब 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रही है, तो सभी आर्थिक संकेतक इस बात के गवाह हैं कि भारत में महिलाओं के लिए काम के अवसर पहले के मुकाबले बहुत बेहतर हुए हैं। हालांकि कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी और उपलब्ध नौकरियों की गुणवत्ता में बड़ा अंतर बना हुआ है।
विभिन्न देशों की तुलना से पता चलता है कि भारत अभी भी महिला श्रम बल भागीदारी दर में कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं से पीछे है। अवैतनिक देखभाल जिम्मेदारियां और असुरक्षित रोजगार के कारण श्रम बाजार में महिलाओं की भागीदारी को आकार दे रहा है। ये संकेतक महिलाओं के लिए चुनौती और आर्थिक भागीदारी को बेहतर बनाने के लिए नीतिगत बदलाव की आवश्यकता, दोनों पर प्रकाश डालते हैं।
वर्ष 2024 में भारत की महिला श्रम बल भागीदारी दर 32 प्रतिशत थी, जो कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है। वियतनाम (69 प्रतिशत), थाईलैंड (60 प्रतिशत) और चीन (59 प्रतिशत) जैसे देशों ने श्रम बल में महिलाओं की बहुत अधिक भागीदारी दर्ज की है।
भारत में लैंगिक अंतर भी व्यापक रहा। महिलाओं की तुलना में पुरुष श्रम बल भागीदारी दोगुनी से अधिक दर्ज की गई। जो महिलाएं काम कर भी रही हैं, उनमें अधिकांश असुरक्षित कामों में जुटी हैं। श्रम बल में लगभग 78 प्रतिशत महिलाएं असुरक्षित रोजगार में हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 69 प्रतिशत है। यह चीन (33%) या ब्राजील (22 %) जैसे देशों की तुलना में काफी अधिक है। यह दर्शाता है कि भारत में महिलाओं के लिए नौकरी की सुरक्षा और औपचारिक रोजगार के अवसर बहुत सीमित हैं।