आज का अखबार

आरबीआई ने सीएमआई को बैंक वित्त के नियम कड़े किए, लिवरेज और शुल्क आय पर असर संभव

नए नियमों में यह भी आवश्यक है कि सीएमआई को दी जाने वाली सभी ऋण सुविधाएं पूरी तरह से सुरक्षित हों। इसका मतलब है कि बैंकों के पास लोन के बदले 100 प्रतिशत गिरवी होना चाहिए।

Published by
सुब्रत पांडा   
मनोजित साहा   
Last Updated- March 06, 2026 | 9:52 AM IST

भारतीय रिजर्व बैंक के प्रोपराइटरी ट्रेडिंग सहित बैंक वित्त से कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज (सीएमआई) के मानदंड कड़ा करने से निजी बैंकों पर अधिक असर पड़ने की आशंका है। बैंकिंग उद्योग के सूत्रों के मुताबिक निजी बैंकों की इस खंड में अधिक भागीदारी भी है।

कुछ निजी बैंकों का सीएमआई में नॉन-फंड-बेस्ड एक्सपोजर लगभग दो प्रतिशत है। नियामक ने पिछले महीने नए नियम जारी किए थे। इसके तहत ब्रोकरों द्वारा प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए बैंक फाइनैंस पर रोक लगा दी गई। प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग में वित्तीय संस्थान जैसे स्टॉक ब्रोकर अपने कोष का उपयोग ट्रेड करने और मुनाफा कमाने के लिए करते हैं। रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंकों को किसी सीएमआई को अपने खाते पर प्रतिभूतियां खरीदने के लिए धन मुहैया नहीं करवाना चाहिए।

नए नियमों में यह भी आवश्यक है कि सीएमआई को दी जाने वाली सभी ऋण सुविधाएं पूरी तरह से सुरक्षित हों। इसका मतलब है कि बैंकों के पास लोन के बदले 100 प्रतिशत गिरवी होना चाहिए। इसके अलावा पूंजी गिरवी पर कटौती को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर कम से कम 40 प्रतिशत कर दिया गया है। लिहाजा ऐसे में बैंक अब 100 रुपये की गिरवी होने पर 60 रुपये उधार दे सकता है। प्रोप्राइटरी ट्रेड के लिए बैंक फंडिंग पर प्रतिबंध को खंड के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दरअसल, ब्रोकर बैंक गारंटी पर निर्भर रहते थे क्योंकि उन्हें दोगुना लिवरेज मिलता था। रिजर्व बैंक ने पिछले महीने अंतिम नियम जारी किए थे।

इसके बाद आईआईएफएल कैपिटल ने पिछले महीने जारी नोट में कहा, ‘प्रोप ट्रेडिंग के लिए फंडिंग पर प्रतिबंध से प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स के लिए उपलब्ध लिवरेज (50 प्रतिशत तक) कम हो जाएगा जो आमतौर पर डेरिवेटिव और इक्विटी वॉल्यूम (30-50 प्रतिशत) का बड़ा हिस्सा योगदान करते हैं। बैंक सपोर्ट को प्रतिबंधित करने से प्रोप्राइटरी पोजिशन अधिक महंगी या पूंजी सघन हो जाती हैं।’ सूत्रों ने कहा कि नियामक को बैंक खातों में प्रणालीगत जोखिम बढ़ने की चिंता थी। इस कारण नियमों को कड़ा किया गया। लिहाजा ब्रोकरों के लिए बैंक लोन मुश्किल हो जाएंगे। इसके परिणामस्वरूप उधारदाताओं के लिए शुल्क आय कम हो जाएगी क्योंकि वे उन गारंटियों के लिए शुल्क अर्जित करते थे।

एक सूत्र ने कहा, ‘बैंक उन बैंक गारंटियों से भी शुल्क आय अर्जित कर रहे थे जो वे जारी कर रहे थे। यह बैंकों के लिए लाभदायक प्रस्ताव हुआ करता था, इस तथ्य को देखते हुए कि ब्रोकर और इंटरमीडियरीज उचित मात्रा में गिरवी रखते थे। यदि इस वजह से बीजी जारी करने की मात्रा कम हो जाती है, तो यह निश्चित रूप से बैंकों की शुल्क आय को नुकसान पहुंचाएगा।’

एसोसिएशन ऑफ एनएसई मैंबर्स ऑफ इंडिया ने एक्सचेंजों में लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये के बीजी का अनुमान लगाया है। इसमें खंड की गैर निष्पादित आस्तियां का स्तर दो दशकों में लगभग शून्य रहा है।

First Published : March 6, 2026 | 9:52 AM IST