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भारत-फिनलैंड के रिश्ते रणनीतिक साझेदारी की ओर, डिजिटल और स्थिरता पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर स्टब की वार्ता में डिजिटल तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और 6G जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने तथा वैश्

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अर्चिस मोहन   
Last Updated- March 06, 2026 | 9:57 AM IST

भारत और फिनलैंड ने गुरुवार को अपने संबंधों को डिजिटलाइजेशन और स्थिरता के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी तक आगे बढ़ाने की दिशा में पहल की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और फिनलैंड इस बात पर सहमत हैं कि कोई भी मुद्दा सैन्य संघर्ष के जरिये हल नहीं किया जा सकता है फिर चाहे वह यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया में छिड़ा संघर्ष। अमेरिका द्वारा बुधवार को श्रीलंका के तटीय इलाके में ईरानी युद्धपोत को डुबा देने के बाद प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष पर पहली बार टिप्पणी की है।

बाद में एक संबंधित घटनाक्रम में भारत ने औपचारिक रूप से ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामनेई की मौत पर अपनी शोक संवेदना प्रकट की। विदेश सचिव विक्रम मिस्री नई दिल्ली में ईरानी दूतावास पहुंचे और उन्होंने भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली को भारत का संदेश दिया और भारत सरकार की ओर से शोक पुस्तिका में हस्ताक्षर किए।

इससे इतर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरानी विदेशमंत्री सैयद अब्बास अरागची से फोन पर बातचीत की। खामनेई की 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के एक हमले में मौत हो गई थी। भारत ने खामनेई की हत्या पर इससे पहले कोई वक्तव्य जारी नहीं किया था। कांग्रेस और वाम धड़े सहित कई विपक्षी दलों ने खामनेई के निधन पर प्रतिक्रिया नहीं देने के लिए सरकार की आलोचना की थी।

विपक्ष ने अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी नौसैनिक जहाज को डुबोने पर सरकार की ‘चुप्पी’ की आलोचना भी की है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि, जैसा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ईरानी जहाज भारत का मेहमान था और वह भारत द्वारा आयोजित ‘इंटरनैशनल फ्लीट रिव्यू 2026’ से बिना हथियारों के लौट रहा था। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस चाहती है कि भारत ‘अंधाधुंध ईरान के पक्ष में खड़ा हो’, जबकि देश की विदेश नीति राष्ट्रीय हित और नागरिकों की सुरक्षा द्वारा निर्देशित होनी चाहिए, न कि कांग्रेस की ‘पुरानी वैचारिक प्रतिक्रियाओं’ की मजबूरी से।

नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर स्टब के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारत और फिनलैंड दोनों विधि के शासन को मानते हैं। वे संवाद और कूटनीति में यकीन करते हैं। हम इस बात से सहमत हैं कि कोई भी मुद्दा केवल सैन्य संघर्ष से हल नहीं होता। चाहे यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, हम संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने और शांति बहाली के हर प्रयास का समर्थन करते रहेंगे।’
चार दिवसीय भारत यात्रा पर आए फिनलैंड के राष्ट्रपति ने भारत में देखे गए आर्थिक चमत्कार और बदलाव के लिए प्रधानमंत्री को बधाई दी। वह इससे पहेल 2013 में भारत आए थे। उन्होंने भारत को यूरोप का अहम रणनीतिक साझेदार बताते हुए मोदी की विदेश नीति की सराहना की।

स्टब ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति में यह बात पसंद है ‘कि आप कभी भ्रम में नहीं रहे, आपने हमेशा अपनी विदेश नीति को व्यावहारिक और यथार्थवादी दृष्टिकोण पर आधारित किया है।’ उन्होंने कहा, ‘आपने दुनिया को दिखाया है कि रणनीतिक सावधानी और स्वायत्तता की रक्षा का बहुत महत्व है, साथ ही बहुपक्षीयता और वैश्विक सहयोग का समर्थन भी किया है।’
उन्होंने आगे कहा, ‘मेरा व्यक्तिगत विश्वास है कि हम सभी को थोड़ा और भारत जैसा बनना चाहिए।’

भारत और फिनलैंड ने तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें भारतीय छात्रों और कामगारों के फिनलैंड में प्रवास और आवागमन को सुगम बनाना शामिल है। दोनों पक्षों ने आठ और घोषणाओं को सूचीबद्ध किया, जिनमें भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हाल ही में संपन्न वार्ताओं का लाभ उठाकर 2030 तक वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की प्रतिबद्धता भी शामिल है।
स्टब जिन्होंने बाद में वार्षिक रायसीना डायलॉग का उद्घाटन किया और इसके मुख्य वक्ता भी रहे, ने यह संकेत किया कि भारत की उनकी यात्रा से पहले किसी फिनलैंड के राष्ट्रपति की भारत यात्रा 1996 में हुई थी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में फिनलैंड के प्रधानमंत्री (एआई इंपैक्ट समिट में) और अब वे स्वयं भारत आए हैं। स्टब उन कुछ विश्व नेताओं में से हैं जिनसे अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप संवाद करते हैं। दोनों ने पिछले वर्ष फ्लोरिडा में साथ में गोल्फ खेला था और उनके बीच नियमित संपर्क के बारे में जाना जाता है।

राष्ट्रपति स्टब ने कहा कि दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया में संघर्ष और यूक्रेन के खिलाफ रूस के ‘आक्रामक युद्ध’ पर चर्चा की। उन्होंने कहा, ‘हम सहमत हैं कि युद्ध को समाप्त करना सभी के हित में है। स्थायी शांति वही होगी जो संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का सम्मान करती हो।’

संयुक्त मीडिया ब्रीफिंग में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘आज दुनिया अस्थिरता और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। यूक्रेन से लेकर पश्चिम एशिया तक, दुनिया के कई हिस्से संघर्ष की स्थिति का सामना कर रहे हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि ऐसे वैश्विक वातावरण में भारत और यूरोप, जो दुनिया की दो प्रमुख कूटनीतिक शक्तियां हैं, अपने संबंधों के सुनहरे दौर में प्रवेश कर रहे हैं।
हाल के महीनों में कई यूरोपीय नेता भारत आए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ का मुक्त व्यापार समझौता फिनलैंड के साथ व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग बढ़ाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि नोकिया मोबाइल फ़ोन और दूरसंचार नेटवर्क ने भारत और दुनिया भर में लाखों लोगों को जोड़ा है, और चेनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल तथा नुमालिगढ़ में दुनिया की सबसे बड़ी बांस-से-बायोएथेनॉल रिफाइनरी फिनलैंड की मदद से बनाई गई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्टब की यात्रा आर्टिफिशल इंटेलिजेंस से लेकर 6G दूरसंचार तक, और स्वच्छ ऊर्जा से लेकर क्वांटम कंप्यूटिंग तक कई उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊर्जा प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि फिनलैंड भारतीय छात्रों और प्रतिभा के लिए तेजी से एक पसंदीदा जगह बनता जा रहा है। उन्होंने शिक्षक प्रशिक्षण, स्कूल-से-स्कूल साझेदारी तथा शिक्षा के भविष्य पर अनुसंधान में सहयोग बढ़ाने के समझौते को भी रेखांकित किया। 2022 में भारत का फिनलैंड के साथ कुल व्यापार (वस्तु और सेवा) 3 अरब यूरा था और यह भारत के पक्ष में था। दिसंबर 2022 तक वहां 21,359 भारतीय मूल के लोग थे, जिनमें 8,245 अनिवासी भारतीय और 13,114 ओसीआई शामिल थे। वर्तमान में लगभग 1,200 भारतीय छात्र फिनलैंड में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

First Published : March 6, 2026 | 9:57 AM IST