facebookmetapixel
Advertisement
स्काईरूट के रॉकेट विक्रम-1 के साथ अंतरिक्ष जाएगा ‘मिशन एम्ब्रेस’, कचरा हटाने वाली तकनीक का होगा सफल परीक्षणराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस का भाजपा-संघ पर बड़ा हमला, ट्रस्ट को भंग करने की मांग कीभारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक रक्षा समझौता, $60 करोड़ में ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल खरीदेगा जकार्ताकम गुणवत्ता वाले शेयरों का अत्यधिक मूल्यांकन है सबसे बड़ा जोखिम: विनय पहाड़ियाक्विक कॉमर्स में एमेजॉन और फ्लिपकार्ट की एंट्री से मचा हड़कंप, वितरकों ने FDI नियमों पर उठाए सवालबाजार में स्थिरता आते ही कंपनियों ने QIP से जुटाए ₹16,990 करोड़, अदाणी ग्रुप की डील से आई भारी तेजीकल्ट फिट ने आईपीओ के लिए सेबी के पास जमा किए पेपर, 950 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारीसन फार्मा ने ऑर्गनन का 11.75 अरब डॉलर में किया अधिग्रहण, SBI समेत 11 अलग-अलग बैंकों ने दिया कर्जकनेक्टेड कारों और EVs में हैकिंग का खतरा बढ़ा, सरकार ने वाहन कंपनियों को दिया साइबर ऑडिट का निर्देश53 कंपनियों में प्री-लिस्टिंग लॉक-इन तीन महीने में होगी समाप्त, निवेशकों की रहेगी नजर 

निजी क्षेत्र के पुराने बैंकों की बाजार हिस्सेदारी घटी

Advertisement
Last Updated- December 05, 2022 | 4:32 PM IST

दुन ऐंड ब्राडस्ट्रीट द्वारा मंगलवार को जारी की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी क्षेत्र के पुराने भारतीय बैंकों की बाजार हिस्सेदारी तेजी से घटती जा रही है।


इसकी जगह नए प्रतिस्पर्ध्दियों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। निजी क्षेत्र के पुराने बैंकों को व्यावसायिक ग्रोथ में मंदी का सामना करना पड़ रहा है।


रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी क्षेत्र के पुराने बैकों की जमाओं में वर्ष मार्च 2007 को समाप्त हुए वर्ष के दौरान छह प्रतिशत की वृध्दि हुई जबकि इसी अवधि में अग्रिम में 12 प्रतिशत का इजाफा हुआ।


रिपोर्ट के मुताबिक इसी अवधि के लिए औसत औद्योगिक ग्रोथ जमाओं के लिए 25 प्रतिशत और अग्रिमों के लिए 31 प्रतिशत था।
रिपोर्ट में 80 अनूसूचित वाणिज्यिक बैंकों को शामिल किया गया। इनमें 23 निजी क्षेत्र के बैंक भी शामिल थे।


निजी क्षेत्र के बैंकों में पुराने बैंकों जैसे फेडेरल बैंक, साउथ इंडियन बैंक, करूर वैश्य बैंक, सिटी यूनियन बैंक एवं अन्य शामिल किए गए थे।


निजी क्षेत्र के नए आक्रामक बैंकों में आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, ऐक्सिस बैंक एवं कोटक महिन्द्रा बैंक आदि को शामिल किया गया था।


दुन ऐंड ब्राडस्ट्रीट ने इंगित किया है कि एकीकरण आने वाले समय में भारतीय बैंकिंग उद्योग में एक महत्वपूर्ण विषय बन कर उभरेगा।


इसने कहा है कि भारतीय बैंकिंग उद्योग वैश्विक मानकों के हिसाब से काफी बिखड़ा हुआ माना गया था क्योंकि बैंकिंग परिसंपत्ति का 65 प्रतिशत शीर्ष के 10 था और परिसंपत्तियों के 27 प्रतिशत में लगभग 40 बैंकों की हिस्सेदारी थी।

Advertisement
First Published - March 12, 2008 | 8:51 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement