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क्रिप्टो सौदों की देनी होगी सूचना!

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Last Updated- December 11, 2022 | 8:37 PM IST

राजस्व विभाग बैंकों और क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंजों को वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों के लेनदेन की जानकारी देने के लिए कह सकता है क्योंकि सरकार 1 अप्रैल से क्रिप्टोकरेंसी से होने वाले पूंजीगत लाभ पर कर लगाना शुरू कर रही है।
अब तक कर विभाग वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों के लेनदेन के स्वैच्छिक खुलासे पर भरोसा कर रहा था। लेकिन नई कराधान व्यवस्था लागू होने के बाद डिजिटल संपत्तियों की खरीद-बिक्री को सालाना सूचना विवरण में दिखाना होगा। वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों से संबंधित लेनदेन का विवरण प्राधिकरण के पास तत्काल उपलब्ध होने के बाद इस तरह के लेनदेन से राजस्व चोरी की आशंका कम होगी या ऐसे लेनदेन पर नजर रखना भी आसान हो जाएगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘कराधान नियम लागू होने के बाद आयकर विभाग विचार कर सकता है कि डिजिटल संपत्तियों के लेनदेन की जानकारी को विशिष्ट वित्तीय लेनदेन में शामिल करना अनिवार्य किया जाए या नहीं।’ हालांकि विशिष्ट वित्तीय लेनदेन के तहत आम तौर पर तय सीमा से अधिक के लेनदेन की जानकारी दी जाती है, जिसमें किसी वित्त वर्ष में करदाता पर निवेश और खर्च आदि भी शामिल होता है। उक्त अधिकारी ने कहा, ‘हमें सलाह-मशविरा करना होगा और देखना होगा कि जानकारी के मकसद से कोई सीमा तय की जाए या नहीं।’
कर विशेषज्ञों का कहना है कि वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों के लेनदेन को सालाना सूचना विवरण का हिस्सा बनाने से जानकारी में विसंगति की आशंका कम होगी। अगर विसंगति (बेमेल) होती है तो करदाता इसके बारे में विभाग को सूचित कर सकता है। अगर करदाता विसंगति की सूचना नहीं देता है तो माना जा सकता है कि सालाना सूचना विवरण में दी गई जानकारी सही है और कर विभाग करदाता से कर रिटर्न और सालाना सूचना विवरण में विसंगति के बारे में पूछ सकता है।
खेतान ऐंड कंपनी में कर पार्टनर संजय सांघवी ने कहा, ‘वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों का ब्योरा सालाना सूचना विवरण में शामिल करना मददगार हो सकता है। इससे सभी तरह के लेनदेन पर नजर रखी जा सकती है और कर विभाग भी विवरण की समीक्षा कर सकता है।’
आयकर विभाग पहले ही विभिन्न स्रोतों से किसी व्यक्ति द्वारा प्राप्त आय और संबंधित लेनदेन के बारे में जानकारी जुटा रहा है। इसमें विभिन्न स्रोतों जैसे वेतन, लाभांश, बचत खाते पर ब्याज, आवर्ती जमा पर ब्याज, शेयरों, बॉन्ड और म्युचुअल फंडों की खरीद और बिक्री से होने वाली आय के बारे में जानकारियां शामिल होती हैं। विवरण में स्रोत पर कर कटौती, स्रोत पर कर संग्रह और कर मांग या रिफंड आदि की भी जानकारी होती है।
पिछले साल कंपनी मामलों के मंत्रालय ने कंपनियों के लिए क्रिप्टोकरेंसी या वर्चुअल करेंंसी में सभी तरह के लेनदेन का खुलासा अपनी बैलेंसशीट में करना अनिवार्य कर दिया था। यह नियम 1 अप्रैल, 2021 से प्रभावी हो गया है।

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First Published - March 23, 2022 | 11:12 PM IST

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