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भारत में चौड़ी होती अमीर और गरीब के बीच की खाई

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Last Updated- December 11, 2022 | 11:01 PM IST

देश में अमीर और गरीब के बीच की खाई चौड़ी होती जा रही है। 2021 में देश की कुल राष्ट्रीय आय का करीब 20 फीसदी महज एक फीसदी लोगों के हाथों में है। दूसरी ओर निचले तबके की आधी आबादी कुल राष्ट्रीय आय की महज 13.1 फीसदी कमाई करती है। यह जानकारी विश्व असमानता रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में आर्थिक सुधार और उदारीकरण का ज्यादातर लाभ शीर्ष एक फीसदी लोगों को मिला है।
दुनिया भर में असमानता पर साक्ष्य आधारित शोध करने वाली फ्रांस की विश्व असमानता लैब द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भारत में काफी गरीबी और असमानता है, जबकि यहां का एक वर्ग अकूत संपत्ति का मालिक है।’
इस रिपोर्ट को विश्व असमानता लैब के सह-निदेशक लुकस चांसेल ने तैयार किया है, जिसमें फ्रांस के अर्थशास्त्री थॉमस पिकेटी आदि ने सहयोग किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 में भारत में एक फीसदी अमीरों के पास देश की कुल आय का 22 फीसदी है। शीर्ष 10 फीसदी अमीरों के पास कुल आय का 57 फीसदी है।
2021 में भारत में वयस्क आबादी की औसत राष्ट्रीय आय 2,04,200 रुपये सालाना रही। हालांकि रिपोर्ट में इसे स्पष्ट किया गया है कि औसत राष्ट्रीय आय असमानता को ढक देती है। 2020 में शीर्ष 10 फीसदी और निचले तबके की 50 फीसदी आबादी की आय का अंतर 1 से 22 फीसदी रहा।
रिपोर्ट से पता चला है भारत दुनिया में सर्वाधिक असमानता वाले देशों में से एक है। ब्रिक्स देशों में दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में भारत की तुलना में आय की असमानता कहीं ज्यादा है। दक्षिण अफ्रीका में शीर्ष 10 फीसदी और नीचे के 50 फीसदी की आय में अंतर 63 फीसदी है जबकि ब्राजील में यह अंतर 29 फीसदी है। चीन और रूस में यह अंतर 14 फीसदी है। दुनिया की बात करें तो कुल आबादी के 10 फीसदी अमीरों के पास अभी वैश्विक आय की 52 फीसदी आय पहुंचती है, जबकि निचले तबके वाली 50 फीसदी आबादी के हिस्से महज 8.5 फीसदी आय आती है।
हालांकि 2018 विश्व असमानता रिपोर्ट में भी भारत के शीर्ष एक फीसदी के पास कुल आय का 22 फीसदी हिस्सा जाता था और 2014 में शीर्ष 10 फीसदी के हाथों में करीब 56 फीसदी कमाई होती थी। इसका मतलब है कि आय का वितरण तब से लेकर अब तक कमोबेश उतना ही बना हुआ है। भारत में संपत्ति की बात करें तो असमानता की खाई और चौड़ी होती जा रही है। निचले तबके के 50 फीसदी परिवारों के पास तकरीबन नगण्य संपत्ति है। मध्य वर्ग भी अपेक्षाकृत गरीब है और कुल संपत्ति का 29.5 फीसदी उनके पास है, जबकि शीर्ष 10 फीसदी के पास 65 फीसदी और एक फीसदी के हाथों में कुल संपत्ति का 33 फीसदी है।
देश में लोगों की औसत संपत्ति 4,200 डॉलर है। मध्य वर्ग की औसत संपत्ति 26,400 डॉलर (7,23,930 रुपये) है। शीर्ष 10 फीसदी लोगों के पास औसतन 2,31,300 डॉलर (63.54 लाख रुपये) और एक फीसदी के पास औसतन 61 लाख डॉलर (32.44 करोड़ रुपये) है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत में असमानता का स्तर ब्रिटिश राज की तुलना में कहीं ज्यादा हो गया है। उस समय शीर्ष 10 फीसदी आबादी के पास कुल राष्ट्रीय आय का करीब 50 फीसदी था। आजादी के बाद यह हिस्सेदारी घटकर 35 से 40 फीसदी पर आ गई। 1980 के दशक के मध्य से उदारीकरण की नीतियों से दुनिया भर में आय और संपत्ति की असमानता बढ़ी है। आर्थिक सुधारों से सबसे ज्यादा लाभ शीर्ष एक फीसदी लोगों को हुआ है जबकि मध्य और कम आय वर्ग के लोगों को इसका कम लाभ मिला और गरीबी की स्थिति जस की तस बनी रही। रिपोर्ट में सरकार द्वारा जारी आंकड़ों की पारदर्शिता पर भी प्रतिकूल टिप्पणी की गई है।

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First Published - December 7, 2021 | 11:19 PM IST

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