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श्वेत पत्र भावी पीढ़ी के लिए दस्तावेज- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

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देश को प्राथमिकता नहीं देने का आरोप लगाते हुए सीतारमण ने पूर्ववती सरकार की आलोचना की और कहा कि कोयला घोटाले के कारण देश को भारी नुकसान हुआ।

Last Updated- February 09, 2024 | 11:43 PM IST
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि संसद में लाए गए श्वेत पत्र में अर्थव्यवस्था पर तथ्यात्मक जानकारी दी गई है। यह आने वाली पीढि़यों के लिए एक दस्तावेज साबित होगा ताकि वे जान सकें कि भारत को उसका गौरव लौटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कितनी मेहनत की। 

श्वेत पत्र पर शुक्रवार को चर्चा का जवाब देते हुए सीतारमण ने यह भी कहा कि संप्रग सरकार के एक दशक के कार्यकाल की तुलना राजग सरकार के शासन से करने पर पता चलता है कि यदि कोई सरकार हालात को ईमानदारी से संभालती है तो हर किसी को उसके परिणाम नजर आते हैं। यह श्वेत पत्र एक गंभीर दस्तावेज है, जिसे संसद को सूचित करने की मंशा से तैयार किया गया है।

पूर्ववर्ती संप्रग सरकार पर भारत के हितों की रक्षा नहीं करने, परिवार को प्राथमिकता देने और देश को भंवरजाल में छोड़ देने जैसे आरोप लगाते हुए सीतारमण ने संसद में कहा कि वर्ष 2008 में वैश्विक मंदी के बाद देश के हालात कैसे थे और कोविड महामारी के बाद स्थिति को सरकार ने किस प्रकार संभाला। 

यदि सरकार की मंशा ईमानदार और पारदर्शी हो तो नतीजे अच्छे मिलते हैं। देश को प्राथमिकता नहीं देने का आरोप लगाते हुए सीतारमण ने पूर्ववती सरकार की आलोचना की और कहा कि कोयला घोटाले के कारण देश को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने, ‘आपने कोयले को राख में तब्दील कर दिया और हमने अपनी नीतियों के बल पर इसी कोयले को हीरा बना दिया।’

भारत की मेजबानी में हुए दो अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों की तुलना करते हुए सीतारमण ने कहा कि संप्रग कार्यकाल में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार के कारण देश की बदनामी हुई जबकि मोदी सरकार की मेजबानी में जी20 शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन से विश्वभर से प्रशंसा मिली।

वित्त मंत्री ने यूपीए सरकार पर संस्था के रूप में बैंकों का दुरुपयोग करने का भी आरोप लगाया और कहा कि इसके कारण फंसे हुए ऋण का भार बढ़ता गया जबकि मोदी सरकार ने ऐसे अनेक फैसले लिए जिनके चलते सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एनपीए 3.2 प्रतिशत घट गया और उनकी लाभप्रदता 1.08 लाख करोड़ पहुंच गई। 

वित्त मंत्री ने मुद्रास्फीति के मोर्चे पर भी संप्रग की पूर्ववर्ती सरकार को घेरा और कहा कि 2004 से 2014 के बीच औसत वार्षिक मुद्रास्फीति 8.2 प्रतिशत थी जो उनके अंतिम तीन वर्षों के शासन में 9 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। सीतारमण ने उज्ज्वला योजना, सौर और नवीकरणीय ऊर्जा जैसी योजनाओं के साथ-साथ ईडी की कार्रवाई को राजग सरकार की बड़ी उपलिब्धयां बताया।

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First Published - February 9, 2024 | 11:38 PM IST

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