दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव और अमेरिका ईरान संबंधों में अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों का माहौल बदल दिया है। निवेशकों में सतर्कता बढ़ी है और इसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। सुरक्षित निवेश के रूप में सोना और चांदी फिर केंद्र में आ गए हैं।
सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 5,160 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। यह तीन हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर है। सोना इसलिए महंगा हुआ क्योंकि अमेरिका में व्यापार को लेकर फिर से उलझन पैदा हो गई है। वहां के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दूसरे देशों से आने वाले सामान पर लगने वाला टैक्स 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया जा सकता है।
इससे पहले अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने उनके पुराने टैरिफ वाले फैसले को रद्द कर दिया था। इन फैसलों से बाजार में असमंजस बढ़ गया है। जब ऐसी अनिश्चितता बढ़ती है तो लोग सुरक्षित जगह पैसा लगाते हैं, इसलिए सोने की मांग बढ़ गई और कीमत ऊपर चली गई।
अमेरिका के फैसलों का असर दूसरे देशों पर भी दिखने लगा है। यूरोप ने कहा है कि वह अभी अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते को मंजूरी नहीं देगा। भारत ने भी अमेरिका के साथ होने वाली अस्थायी व्यापार बातचीत को फिलहाल टाल दिया है। इन सब वजहों से दुनिया में व्यापार का माहौल उलझ गया है। ऊपर से अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते पर बातचीत भी अटकी हुई है। इससे देशों के बीच तनाव बढ़ने का डर बना हुआ है।
सोने के साथ चांदी की कीमत भी बढ़ रही है। चांदी का भाव 86 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंच गया है। यह लगातार चौथा दिन है जब इसके दाम बढ़े हैं। अमेरिका के व्यापार अधिकारी ने कहा है कि चीन, यूरोप, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ जो पुराने व्यापार समझौते हैं, वे अभी जारी रहेंगे। फिर भी बाजार में डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। लोग अभी भी सावधानी से निवेश कर रहे हैं।
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के हेड क्राइटेरिया, मॉडल डेवलपमेंट एंड रिसर्च राजीव शरण का कहना है कि सोने के दाम इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि दुनिया में फिर से तनाव बढ़ गया है। उनका कहना है कि जब देशों के बीच झगड़े बढ़ते हैं या व्यापार को लेकर उलझन होती है, तो लोग डर जाते हैं। ऐसे समय में लोग अपना पैसा सुरक्षित जगह लगाना चाहते हैं। सोना ऐसी ही सुरक्षित चीज माना जाता है। इसलिए जब माहौल खराब होता है तो लोग सोना खरीदने लगते हैं और उसके दाम बढ़ जाते हैं। इस समय भी सोना लोगों के लिए मुश्किल हालात से बचाव का सहारा बना हुआ है।
कोटक म्युचुअल फंड के फंड मैनेजर सतीश डोंडापाटी के अनुसार, यह तेजी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के ज्यादातर टैरिफ रद्द किए जाने के बाद आई, जिससे डॉलर कमजोर हुआ और सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी। मध्य पूर्व तनाव ने भी कीमतों को सहारा दिया। आगे टैरिफ, ब्याज दरों पर फैसले और अमेरिका ईरान वार्ता की खबरें कीमती धातुओं की दिशा तय करेंगी।
राजीव शरण का कहना है कि अगर सामान पर लगने वाला टैक्स बार बार बदलेगा और विदेशी पैसों की कीमत ऊपर नीचे होगी, तो इसका असर कई कारोबारों पर पड़ेगा। खासकर वे कंपनियां जो अपना सामान विदेश भेजती हैं, जहाज से माल ढोने वाली कंपनियां, माल पहुंचाने का काम करने वाली कंपनियां, दुकानों का कारोबार और दवा बनाने वाली कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं। उनकी कमाई घट सकती है। अगर यह अस्थिरता लंबे समय तक चली, तो उन बैंकों और वित्त कंपनियों पर भी असर पड़ सकता है जिन्होंने इन कारोबारों को ज्यादा कर्ज दे रखा है। ऐसे कर्ज की वसूली में दिक्कत आ सकती है। हालांकि सोना गिरवी रखकर दिए गए कर्ज फिलहाल सुरक्षित माने जा रहे हैं, क्योंकि उनके बदले में असली सोना रखा होता है। जब तक गिरवी रखा गया सोना सही और मजबूत है, तब तक ऐसे कर्ज में ज्यादा खतरा नहीं माना जाता।