महाराष्ट्र के प्याज उत्पादकों (किसानों) के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने सरकारी खरीद के नियमों में ढील देते हुए प्याज के साइज और क्वालिटी के पैमानों को आसान बना दिया है। पहले जहां सिर्फ 45 से 65 मिलीमीटर (mm) साइज के प्याज ही खरीदे जाते थे, वहीं अब सरकार ने इसका दायरा बढ़ाकर 35 से 70 मिलीमीटर कर दिया है। इसके अलावा प्याज के रंग-रूप, मामूली दाग-धब्बों, त्वचा के डिफेक्ट और धूप से हुए हल्के नुकसान जैसी शर्तों में भी छूट दी गई है।
हालांकि, किसान संगठनों ने इस ढील का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही इसे नाकाफी बताया है। किसानों का कहना है कि इस फैसले से उन्हें बहुत कम राहत मिलेगी। उनका मानना है कि असली समस्या नियमों की नहीं, बल्कि प्याज के मिल रहे कम दामों की है। किसान अब सरकार से प्याज की न्यूनतम खरीद कीमत 3,000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं।
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संगठन के नासिक जिला अध्यक्ष जयदीप भदाणे ने कहा कि नियम आसान होने से थोड़ा फायदा तो होगा, लेकिन किसान अभी भी घाटे में हैं। असली सवाल यह है कि किसानों को प्याज की सही कीमत कब मिलेगी। उन्होंने बताया कि पुराने नियमों के तहत अगर कोई किसान 30 क्विंटल प्याज बेचने जाता था, तो कड़े पैमानों के कारण केवल 25 क्विंटल ही पास हो पाता था और बाकी बची फसल को कम दामों में बेचना पड़ता था। नए नियमों का फायदा तभी होगा जब जमीनी स्तर पर इसे सही से लागू किया जाएगा।
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किसानों का दावा है कि इस समय NAFED और NCCF जैसी सरकारी एजेंसियां करीब 1,580 रुपये प्रति क्विंटल का भाव दे रही हैं। यह रेट बाजार की उम्मीदों से बहुत कम है और इससे खेती की लागत भी नहीं निकल पा रही है। संगठन के अध्यक्ष भारत दिघोड़े ने बताया कि एक क्विंटल प्याज उगाने में किसान का औसतन 1,800 रुपये का खर्च आता है। ऐसे में लागत से भी कम दाम पर प्याज बेचना किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
प्याज उत्पादक संगठन ने पूरी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि नैफेड और NCCF को हर दिन उन किसानों की लिस्ट जारी करनी चाहिए जिनसे प्याज खरीदा गया है। इसके अलावा यह खरीद कृषि उपज मंडी समितियों (APMCs) के जरिए होनी चाहिए ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके और किसानों को सही कॉम्पिटिटिव रेट मिल सके।
किसानों ने सरकार के सामने एक और बड़ी मांग रखी है। उनका कहना है कि पिछले चार-पांच महीनों के दौरान जिन लाखों किसानों को मंदी के कारण औने-पौने दामों पर अपनी फसल बेचनी पड़ी थी, उन्हें सरकार 1,500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से सब्सिडी (मुआवजा) दे।
इधर, महाराष्ट्र सरकार ने प्याज की खरीद को तेज करने और लागत कम करने के लिए NAFED और NCCF के ट्रांजैक्शन पर लगने वाली मंडी (APMC) फीस को माफ कर दिया है। लेकिन किसान नेताओं का कहना है कि इस फीस माफी का सीधा फायदा सरकारी एजेंसियों को ही मिलेगा, किसानों को इसका लाभ तभी होगा जब प्याज के खरीद दाम बढ़ाए जाएंगे। देश की सबसे बड़ी प्याज मंडियों में से एक नासिक की लासलगांव मंडी के किसानों का साफ कहना है कि असली न्याय तभी होगा जब उन्हें सही दाम मिलेगा और पुराने नुकसान की भरपाई होगी।
(PTI के इनपुट के साथ)