facebookmetapixel
Advertisement
ऑटो PLI पर फॉरेक्स असर: वाहन कंपनियों ने फिक्स्ड एक्सचेंज रेट की मांग उठाईट्रैक्टर से आगे बढ़कर फुल-स्केल फार्म मशीनीकरण पर महिंद्रा का बड़ा दांवEditorial: आश्चर्यजनक वृद्धि, लेकिन आगे की राह चुनौतियों भरीविदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए RBI ने खोले रास्ते, बॉन्ड बाजार में बड़ा बदलाव‘ब्रांड इंडिया’ के लिए सबसे बड़ा खतरा: भारत के जर्जर और असफल होते शहरबाजार हलचल : एक जैसा मगर अलग, अदाणी ग्रुप को फंड्स का सहारामिरे असेट CIO नीलेश सुराणा बोले: गिरावट का दौर पीछे छूटा, वैल्यूएशन के कारण दोबारा रेटिंग की गुंजाइशमिडकैप-स्मॉलकैप की मजबूती से मई में कैश मार्केट 22 महीने के हाई पर, F&O ट्रेडिंग सुस्त बनी रहीनकदी मुहैया कराने वालों के लिए हो अलग फ्रेमवर्क, लिक्विडिटी घटने का जताया डर: ब्रोकरपश्चिम एशिया संकट से होटल उद्योग की रफ्तार धीमी, लेकिन मांग में सुधार की उम्मीद बरकरार

प्याज खरीद के नियम तो बदले पर किसान खुश नहीं, मांग: असली समस्या मिल रहे कम दाम से, उसे बढ़ाना जरूरी

Advertisement

किसानों का कहना है कि इस फैसले से उन्हें बहुत कम राहत मिलेगी। उनका मानना है कि असली समस्या नियमों की नहीं, बल्कि प्याज के मिल रहे कम दामों की है

Last Updated- June 07, 2026 | 11:52 AM IST
Onion
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

महाराष्ट्र के प्याज उत्पादकों (किसानों) के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने सरकारी खरीद के नियमों में ढील देते हुए प्याज के साइज और क्वालिटी के पैमानों को आसान बना दिया है। पहले जहां सिर्फ 45 से 65 मिलीमीटर (mm) साइज के प्याज ही खरीदे जाते थे, वहीं अब सरकार ने इसका दायरा बढ़ाकर 35 से 70 मिलीमीटर कर दिया है। इसके अलावा प्याज के रंग-रूप, मामूली दाग-धब्बों, त्वचा के डिफेक्ट और धूप से हुए हल्के नुकसान जैसी शर्तों में भी छूट दी गई है।

हालांकि, किसान संगठनों ने इस ढील का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही इसे नाकाफी बताया है। किसानों का कहना है कि इस फैसले से उन्हें बहुत कम राहत मिलेगी। उनका मानना है कि असली समस्या नियमों की नहीं, बल्कि प्याज के मिल रहे कम दामों की है। किसान अब सरकार से प्याज की न्यूनतम खरीद कीमत 3,000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं।

1580 रुपये का भाव मंजूर नहीं, किसानों ने खोला मोर्चा

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संगठन के नासिक जिला अध्यक्ष जयदीप भदाणे ने कहा कि नियम आसान होने से थोड़ा फायदा तो होगा, लेकिन किसान अभी भी घाटे में हैं। असली सवाल यह है कि किसानों को प्याज की सही कीमत कब मिलेगी। उन्होंने बताया कि पुराने नियमों के तहत अगर कोई किसान 30 क्विंटल प्याज बेचने जाता था, तो कड़े पैमानों के कारण केवल 25 क्विंटल ही पास हो पाता था और बाकी बची फसल को कम दामों में बेचना पड़ता था। नए नियमों का फायदा तभी होगा जब जमीनी स्तर पर इसे सही से लागू किया जाएगा।

Also Read: रबी की अच्छी फसल के बाद भी कृषि विकास दर में गिरावट, वित्त वर्ष 26 में GVA घटकर 3% रहने का अनुमान

किसानों का दावा है कि इस समय NAFED और NCCF जैसी सरकारी एजेंसियां करीब 1,580 रुपये प्रति क्विंटल का भाव दे रही हैं। यह रेट बाजार की उम्मीदों से बहुत कम है और इससे खेती की लागत भी नहीं निकल पा रही है। संगठन के अध्यक्ष भारत दिघोड़े ने बताया कि एक क्विंटल प्याज उगाने में किसान का औसतन 1,800 रुपये का खर्च आता है। ऐसे में लागत से भी कम दाम पर प्याज बेचना किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।

पारदर्शिता और 1500 रुपये सब्सिडी की मांग

प्याज उत्पादक संगठन ने पूरी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि नैफेड और NCCF को हर दिन उन किसानों की लिस्ट जारी करनी चाहिए जिनसे प्याज खरीदा गया है। इसके अलावा यह खरीद कृषि उपज मंडी समितियों (APMCs) के जरिए होनी चाहिए ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके और किसानों को सही कॉम्पिटिटिव रेट मिल सके।

किसानों ने सरकार के सामने एक और बड़ी मांग रखी है। उनका कहना है कि पिछले चार-पांच महीनों के दौरान जिन लाखों किसानों को मंदी के कारण औने-पौने दामों पर अपनी फसल बेचनी पड़ी थी, उन्हें सरकार 1,500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से सब्सिडी (मुआवजा) दे।

इधर, महाराष्ट्र सरकार ने प्याज की खरीद को तेज करने और लागत कम करने के लिए NAFED और NCCF के ट्रांजैक्शन पर लगने वाली मंडी (APMC) फीस को माफ कर दिया है। लेकिन किसान नेताओं का कहना है कि इस फीस माफी का सीधा फायदा सरकारी एजेंसियों को ही मिलेगा, किसानों को इसका लाभ तभी होगा जब प्याज के खरीद दाम बढ़ाए जाएंगे। देश की सबसे बड़ी प्याज मंडियों में से एक नासिक की लासलगांव मंडी के किसानों का साफ कहना है कि असली न्याय तभी होगा जब उन्हें सही दाम मिलेगा और पुराने नुकसान की भरपाई होगी।

(PTI के इनपुट के साथ)

Advertisement
First Published - June 7, 2026 | 11:52 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement