एक टॉप सरकारी अधिकारी ने बुधवार को कहा कि भारत ने 2020 में शुरू की गई PLI स्कीम के तहत प्राइवेट कंपनियों से 13 अरब डॉलर से अधिक के निवेश के बाद लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए इन्सेंटिव के रूप में 1.02 अरब डॉलर का भुगतान किया है। 1.97 ट्रिलियन रुपये ($24 बिलियन) की उत्पादन-लिंक्ड इन्सेंटिव योजना (PLI) भारत की प्रमुख औद्योगिक नीति है और इसमें इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों से लेकर ड्रोन तक 14 सेक्टर्स को शामिल किया गया है।
PLI ने देश और विदेश से कई कंपनियों को किया आकर्षित
भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में स्थापित करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण इस योजना ने ऐप्पल, फॉक्सकॉन, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी प्रमुख वैश्विक और भारतीय कंपनियों को आकर्षित किया है।
उद्योग के अनुमान के अनुसार, इसकी मदद से 31 मार्च 2024 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में मोबाइल फोन निर्यात 15 अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारत के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के शीर्ष अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने कहा कि योजना का अच्छा प्रभाव पड़ा है और इन्सेंटिव वितरण में भी तेजी आई है।
PLI ने देश की अर्थव्यवस्था को दिया दम
उन्होंने आगे बताया कि भारत ने उत्पादन से जुड़ी इन्सेंटिव योजना (PLI) के तहत 3-3.5 ट्रिलियन रुपये का सामान निर्यात किया है। मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स और फूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर में उत्पादन “तेजी से बढ़ा है”। व्हाइट गुड्स और ड्रोन में भी वृद्धि हुई है।
योजना के क्रियान्वयन की देखरेख करने वाले अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने बताया कि कपड़ा और स्पेशियलिटी स्टील क्षेत्रों में कुछ देरी हो रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि इन क्षेत्रों में इन्सेंटिव को बेहतर बनाने की आवश्यकता हो सकती है। भारत नियमित रूप से योजना की प्रगति का मूल्यांकन करता है। हालांकि, अधिकारी के अनुसार, अन्य क्षेत्रों में इन्सेंटिव बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)