facebookmetapixel
Budget 2026 में रिसाइक्लिंग इंडस्ट्री की सरकार से मांग: GST कम होगा तभी उद्योग में आएगी तेजी27 जनवरी को बैंक हड़ताल से देशभर में ठप होंगी सरकारी बैंक सेवाएं, पांच दिन काम को लेकर अड़े कर्मचारीऐतिहासिक भारत-EU FTA और डिफेंस पैक्ट से बदलेगी दुनिया की अर्थव्यवस्था, मंगलवार को होगा ऐलानइलेक्ट्रिक टू व्हीलर कंपनियों ने सरकार से की मांग: PM E-Drive सब्सिडी मार्च 2026 के बाद भी रहे जारीसुरक्षित निवेश और कम सप्लाई: क्यों सोने की कीमत लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है?Budget decoded: सरकार की योजना आपके परिवार की आर्थिक स्थिति को कैसे प्रभावित करती है?गणतंत्र दिवस पर दिखी भारत की सॉफ्ट पावर, विदेशी धरती पर प्रवासी भारतीयों ने शान से फहराया तिरंगाIndia-EU FTA पर मुहर की तैयारी: कपड़ा, जूते-चप्पल, कार और वाइन पर शुल्क कटौती की संभावनाBudget 2026 से इंश्योरेंस सेक्टर को टैक्स में राहत की उम्मीद, पॉलिसीधारकों को मिल सकता है सीधा फायदा!Budget 2026 से बड़ी उम्मीदें: टैक्स, सीमा शुल्क नियमें में सुधार और विकास को रफ्तार देने पर फोकस

GST का 41% सिर्फ इन 5 राज्यों से, आपका राज्य लिस्ट में है क्या?

GST India: SBI की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश मिलकर देश का 41% GST टैक्स जमा करते हैं।

Last Updated- July 22, 2025 | 12:14 PM IST
GST Collection

1 जुलाई 2025 को भारत में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) को लागू हुए पूरे 8 साल हो गए। साल 2017 में GST की शुरुआत एक बड़े कर सुधार के तौर पर हुई थी, जिसका मकसद देश की जटिल टैक्स व्यवस्था को एकीकृत और आसान बनाना था। इसके जरिए पहले की तरह अलग-अलग राज्यों में लागू विभिन्न टैक्सों की जगह एक समान कर व्यवस्था लागू की गई।

GST आने से व्यापारियों को एक ही टैक्स रिटर्न भरने की सुविधा मिली, जिससे कारोबार करना आसान हो गया। अब एक राज्य से दूसरे राज्य में माल भेजने पर अलग-अलग टैक्स नहीं भरना पड़ता। इससे लॉजिस्टिक्स की रफ्तार भी बढ़ी है।

बड़े राज्यों की धमाकेदार परफॉर्मेंस, कुल GST का 41% वसूला

SBI की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश के 5 बड़े राज्य- महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश- देश के कुल GST कलेक्शन में 41% का योगदान दे रहे हैं। इन राज्यों का सालाना GST कलेक्शन ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा है। इनमें से महाराष्ट्र ₹3.59 लाख करोड़ के साथ सबसे आगे है, जिसके बाद कर्नाटक ₹1.59 लाख करोड़, गुजरात ₹1.36 लाख करोड़, तमिलनाडु ₹1.31 लाख करोड़ और उत्तर प्रदेश ₹1.12 लाख करोड़ के साथ हैं।

ये राज्य सिर्फ अपने राज्य में ही सामान बेचकर टैक्स नहीं देते, बल्कि ये दूसरे राज्यों को भी सामान और सेवाएं भेजते हैं। जब किसी राज्य से दूसरे राज्य में सामान या सर्विस जाती है, तो उस पर IGST लगता है। इस टैक्स में भी कुछ राज्यों की भागीदारी बहुत ज्यादा है। जैसे हरियाणा 59%, दिल्ली 55%, महाराष्ट्र 34% और कर्नाटक 37% IGST में योगदान देते हैं।

GST रजिस्ट्रेशन में भी बड़े राज्यों का वर्चस्व, लेकिन कुछ बड़े राज्य पीछे

GST रजिस्ट्रेशन की बात करें तो उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, जहां 20 लाख से ज्यादा एक्टिव GST टैक्सपेयर्स हैं। इसके बाद महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे समृद्ध राज्यों की GDP के मुकाबले वहां GST रजिस्ट्रेशन का प्रतिशत कम है। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में यह अनुपात ज्यादा है, जो इन राज्यों में टैक्सपेयर्स की संभावनाएं दिखाता है।

GST के तहत महिलाओं की बढ़ती भागीदारी एक बड़ा बदलाव

रिपोर्ट बताती है कि हर 5 GST रजिस्ट्रेशन में से 1 में महिला शामिल है। कुल GST रजिस्ट्रेशन का 14% पूरी तरह महिलाओं के नाम पर है। खास बात यह है कि LLP और प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों में महिलाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा (48.2% और 46.8%) है। इससे यह साबित होता है कि महिलाएं अब केवल नौकरी नहीं, बल्कि व्यापार की दुनिया में भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

GST रजिस्ट्रेशन और टैक्स कलेक्शन में जबरदस्त उछाल

31 मई 2025 तक देश में 1.52 करोड़ से ज्यादा एक्टिव GST रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। सिर्फ पांच सालों में GST कलेक्शन दोगुना हो गया है। जहां FY21 में कुल कलेक्शन ₹11.36 लाख करोड़ था, वहीं FY25 में यह ₹22.08 लाख करोड़ तक पहुंच गया। हर महीने औसतन ₹2 लाख करोड़ से ज्यादा का टैक्स जमा हो रहा है — जो टैक्स आधार के विस्तार औरCompliance में सुधार को दिखाता है।

राज्यवार GST कलेक्शन – कौन आगे, कौन पीछे

राज्य कुल GST कलेक्शन (₹ करोड़) IGST का हिस्सा (%)
महाराष्ट्र ₹3,59,855 34%
कर्नाटक ₹1,59,564 37%
गुजरात ₹1,36,748 33%
तमिलनाडु ₹1,31,115 31%
उत्तर प्रदेश ₹1,12,212 31%
हरियाणा ₹1,19,362 59%
दिल्ली ₹77,002 55%

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि बड़े राज्यों की मजबूत आर्थिक गतिविधियां दूसरे राज्यों की IGST वसूली को भी बढ़ावा दे रही हैं।

महंगाई पर भी पड़ा असर – राज्यों में कीमतों में समानता आई

GST लागू होने के बाद अलग-अलग राज्यों में वस्तुओं की कीमतों में जो फर्क हुआ करता था, वह अब काफी हद तक खत्म हो गया है। SBI के मुताबिक, साल 2021 से 2025 के बीच राज्यों के बीच कीमतों में अंतर सबसे कम हुआ है, जिससे महंगाई को संतुलित करने में भी यह टैक्स सिस्टम कारगर रहा है।

GST के चार टैक्स स्लैब – अलग चीज़ों पर अलग दरें

भारत में GST के चार मुख्य टैक्स स्लैब हैं – 5%, 12%, 18% और 28%। इसके अलावा कुछ वस्तुओं जैसे सोना, चांदी, हीरे, तंबाकू, गाड़ियां, और कोल्ड ड्रिंक्स पर विशेष टैक्स दर या सेस भी लगाया जाता है।

दुनिया भी अपना रही है GST जैसी व्यवस्था

भारत अकेला देश नहीं है जहां GST लागू है। आज की तारीख में 175 से ज्यादा देश या तो GST या VAT सिस्टम अपना चुके हैं। हाल ही में गिनी-बिसाऊ ने जनवरी 2025 से VAT लागू किया है।

First Published - July 22, 2025 | 12:14 PM IST

संबंधित पोस्ट