सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा का मानना है कि इस वित्त वर्ष में ब्याज दरें सामान्य होने से मार्जिन में सुधार हो सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य कार्याधिकारी व प्रबंध निदेशक संजीव चड्ढा ने मनोजित साहा के साथ बातचीत में कहा कि क्रेडिट लागत में कमी जारी रहेगी, जिससे लाभप्रदता में सुधार होगा। संपादित अंश
बीओबी ने पहली तिमाही में वैश्विक अग्रिम में 18 फीसदी की वृद्धि हासिल की है, उद्योग से अधिक। क्या दूसरी तिमाही में भी यही स्थिति जारी रहेगी?
हम विकास के रुझान में मजबूती देख रहे हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार बेहतर वृद्धि हो सकती है। हालांकि यह याद रखना भी जरूरी है कि महामारी की दूसरी लहर के कारण पिछले वर्ष की पहली तिमाही सुस्त रही थी। जहां तक विकास का संबंध है हम कुछ नरमी देख सकते हैं। हां, यह पिछले साल की तुलना में बेहतर होगा।
कॉरपोरेट ऋण की मांग में भी सुधार हुआ है। क्या आपने नई परियोजनाओं के लिए मांग देखी है?
पिछले कुछ वर्षों में, उद्योग में समेकन की प्रवृत्ति रही है। मजबूत खिलाड़ियों के बीच क्षमता मजबूत हो रही है। मजबूत खिलाड़ियों की ओर से निवेश की काफी मांग आ रही है। मांग है पर यह अभी कम है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं क्षमता उपयोग में सुधार होता है, मांग का एक बड़ा हिस्सा इन क्षेत्रों से भी आएगा। यह ऋण की गुणवत्ता के लिए शुभ संकेत है। जहां तक खुदरा ऋण की बात है, असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण में अच्छी वृद्धि देखी गई है। मोटे तौर पर हमने देखा है कि खुदरा ऋणों में कॉरपोरेट ऋण की तुलना में अधिक तेज वृद्धि है। यह प्रवृत्ति बनी रहेगी।
बीओबी ने हाल में 6 फीसदी जमा दर की पेशकश करते हुए तिरंगा जमा योजना की घोषणा की। आपको लगता है कि इससे जमा दर में वृद्धि होगी या यही शीर्ष है?
तरलता अधिशेष के कारण दरें वास्तिवक रूप से नकारात्मक थीं। यह ऐसी स्थिति नहीं थी जो अनिश्चितकाल तक जारी रह सकती थीं, या जारी रहनी चाहिए थी। इसमें सुधार होगा और दरें बढ़ेंगी। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे दरें बढ़ने की भी गुंजाइश रहेगी। यह अर्थव्यवस्था और बैंकिंग के लिए अच्छा होगा।