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2025 तक रोजाना 15 लाख करोड़ रुपये डिजिटल लेनदेन!

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Last Updated- December 15, 2022 | 4:27 AM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अनुमान जताया है कि अगले पांच वर्ष में डिजिटल माध्यम से होने वाला भुगतान रोजाना 1.5 अरब लेन-देन के साथ 15 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच सकता है।
रिजर्व बैंक में भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग के मुख्य महाप्रबंधक पी वासुदेवन के मुताबिक फिलहाल 5 लाख करोड़ रुपये के लिए रोजाना औसतन 10 करोड़ लेनदेन होता है। कोविड महामारी के आरंभ से पहले रोजाना लेनदेन का औसत करीब 12.5 करोड़ था जो कि जून 2016 में होने वाले डिजिटल लेनदेन के पांच गुने से भी अधिक है। वह फिनटेक कनवर्जेंस काउंसिल (एफसीसी) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की ओर से आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में डिजिटल भुगतान के भविष्य पर गठित समूह का हिस्सा थे। वासुदेवन ने कहा कि डिजिटल भुगतानों में यूनीफाइड पेमेंट सिस्टम (यूपीआई) जैसे विभिन्न मोबाइल भुगतान सुविधाओं के अलावा क्रेडिट और डेबिट कार्डों से होने वाला लेनदेन भी शामिल है। डिजिटल भुगतानों को इस ऊंचाई पर पहुंचाने की योजना को रिजर्व बैंक समर्थित ऐसे अभिनव प्रयोगशालाओं का सहयोग मिल रहा है जो इंटरनेट की अच्छी कनेक्टिविटी के बिना ही या फिर बेसिक फोन या फोन के बिना भी लेनदेन की सुविधा ईजाद करने पर काम कर रही हैं।
रिजर्व बैंक के इस अधिकारी ने कहा कि ये सुविधाएं 2024 से शुरू हो सकती हैं।
इसके अलावा एक एक्सेप्टेंस डेवलपमेंट फंड (एडीएफ) की स्थापना की गई है जिसमें रिजर्व बैंक ने बढ़-चढ़ कर योगदान दिया है। भुगतान सेवा प्रदाता भी वृहद स्तर पर कार्ड की स्वीकार किए जाने के लिए बुनियादी ढांचा विकसित कर रहे हैं।
वासुदेवन ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि नकद लेनदेन बीते जमाने की बात हो जाएगी।’ आने वाले समय में हो सकता है कि भुगतान के लिए पासवर्ड और पिन के स्थान पर आंख की पुतली से काम हो जाए।
एनपीसीआई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी दिलीप अस्बे के मुताबिक भारत में, डिजिटल लेनदेन में सकल घरेलू उत्पाद के 30 से 40 फीसदी पर पहुंच जाने की संभावना है। हालांकि, इस बात की संभावना नहीं है कि डिजिटल भुगतानों की सुविधा बिना मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के ही दी जा सकती है।

मोबाइल बैंकिंग बन सकता है तरजीही माध्यम
भारतीय स्टेट बैंंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि आने वाले दिनों में इंटरनेट बैंकिंग से ज्यादा तरजीही मोबाइल बैंकिंग हो सकता है। इस समय स्टेट बैंक के 100 लेन देन में से सिर्फ 9 शाखाओं से हो रहा है। वहीं नोटबंदी के दौरान एटीएम से लेनदेन 55 प्रतिशत था, जो अब घटकर 30 प्रतिशत के करीब आ गया है। वहीं अब डिजिटल और मोबाइल बैंकिंग 25-30 प्रतिशत से बढ़कर अब 55 प्रतिशत हो गया है। कुमार ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में कहा कि आने वाले समय में मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग में तेजी आएगी। बहरहाल उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में बैंकों की डिजिटल मौजूदगी के साथ भौतिक मौजूदगी भी जरूरी है। बीएस

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First Published - July 22, 2020 | 11:58 PM IST

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