प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति की 3 से 5 दिसंबर को होने वाली बैठक में रीपो दर में बदलाव की उम्मीद नहीं है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के सर्वेक्षण में शामिल ज्यादातर प्रतिभागियों ने कहा कि मौद्रिक नीति का रुख तटस्थ के साथ नरम बना रहेगा। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मजबूत आंकड़े को देखते हुए मौद्रिक नीति समिति दर यथावत रख सकती है।
भारतीय स्टेट बैंक के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा, ‘कुछ दिन पहले तक रीपो में 25 आधार अंक की कटौती की उम्मीद की जा रही थी मगर अब ऐसा होता नहीं दिख रहा है। दूसरी तिमाही में वृद्धि दर के मजबूत आंकड़ों से दर यथावत रखने का निर्णय हो सकता है।’
मौद्रिक नीति समिति ने जून में रीपेा दर में 50 आधार अंक की कटौती की थी मगर उसके बाद दो बैठकों में दर में कोई बदलाव नहीं किया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि आरबीआई यथास्थिति बनाए रख सकता है क्योंकि ढील देने की गुंजाइश कम है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेन गुप्ता ने कहा, ‘आरबीआई से उम्मीद है कि वह मौजूदा स्थिति बनाए रखेगा क्योंकि ढील देने की गुंजाइश कम है और ऐसा तब किया जाना चाहिए जब तक कि वृद्धि दर में गिरावट का खतरा न हो।’
उन्होंने जमा वृद्धि को बढ़ावा देने का इशारा करते हुए कहा, ‘मौद्रिक नीति की असली चुनौती यह पुख्ता करना है कि जब जमा वृद्धि 10 फीसदी से नीचे हो तो बैंकिंग तंत्र 11-12 फीसदी ऋण वृद्धि का समर्थन कर सके। ऋण-जमा अनुपात 80 फीसदी के ऐतिहासिक उच्च स्तर के करीब बना हुआ है।’
स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक में इंडिया इकनॉमिक्स शोध प्रमुख अनुभूति सहाय ने कहा, ‘वृद्धि दर मजबूत है और राजकोषीय तथा मौद्रिक प्रोत्साहन पहले ही दिया गया है। ऐसे में दर कटौती से ज्यादा जोर बैंकिंग तंत्र में नकदी बढ़ाने पर होना चाहिए।’
अधिकतर अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि आरबीआई मौद्रिक नीति का रुख तटस्थ बनाए रखेगा लेकिन ओपन मार्केट ऑपरेशन जैसे उपाय से तरलता बढ़ा सकता है। बैंकिंग तंत्र को चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में तरलता समर्थन की जरूरत पड़ने की उम्मीद है क्योंकि रुपये में उठापटक को थामने के लिए आरबीआई मुद्रा बाजार में तेजी से दखल दे रहा है।
ज्यादातर अर्थशास्त्रियों को मौजूदा दर कटौती चक्र के लिए टर्मिनल दर 5.25 से 5.5 फीसदी के बीच रहने की उम्मीद है। आरबीएल बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री अनीता रंगन ने कहा, ‘अप्रैल से पहले दर कटौती की उम्मीद नहीं है। वैसे, फरवरी में इसकी संभावना बन सकती है।’
अधिकतर प्रतिभागियों को उम्मीद है कि आरबीआई चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई दर का अनुमान घटाकर 2 फीसदी कर सकता है और जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान भी बढ़ाकर 7 फीसदी से अधिक किया जा सकता है।