सेबी ने सभी नियमन वाली संस्थाओं को निर्देश दिया है कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिभूति बाजार से जुड़ी कोई भी सामग्री पोस्ट करते समय अपना पंजीकृत नाम और पंजीकरण संख्या का प्रमुखता से खुलासा करें। यह निर्देश शेयर ब्रोकरों, पोर्टफोलियो प्रबंधकों, म्युचुअल फंडों के साथ-साथ वितरकों जैसी इंटरमीडियरीज और एजेंटों पर भी लागू होगा। नए नियम 1 मई से प्रभावी होंगे।
सेबी के अनुसार इस कदम का मकसद निवेशकों की मदद करना है जिससे कि उन्हें पंजीकृत और नियमन वाली संस्थाओं की सामग्री और सोशल मीडिया पर काम करने वाली अपंजीकृत या अनियमित संस्थाओं की सामग्री के बीच स्पष्ट अंतर का पता चले।
यह अनिवार्यता सभी प्रकार की सामग्री पर लागू होगी। इसमें वीडियो, लिखित पोस्ट और अन्य प्रकाशित वह सभी सामग्री शामिल हैं, जो ओपन प्लेटफार्मों के साथ-साथ यूट्बूब, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सऐप, एक्स, लिंक्डइन, रेडिट और थ्रेड्स जैसे प्लेटफार्मों पर क्लोज्ड या सेमी क्लोज्ड समूहों में साझा की जाती हैं।
सेबी ने परिपत्र में कहा, विनियमित संस्थाएं और उनके एजेंट अपने सोशल मीडिया हैंडल के होम पेज के साथ-साथ उनके द्वारा अपलोड किए गए प्रतिभूति बाजार से संबंधित हर वीडियो या सामग्री की शुरुआत में अपने पंजीकृत नाम और पंजीकरण संख्या का प्रमुखता से खुलासा करेंगे।
हाल के वर्षों में नियामक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके समन्वित स्टॉक हेरफेर या पंप-ऐंड-डंप योजनाओं को चलाने वाली कई फर्मों व लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। बाजार के जानकारों का कहना है कि सामग्री की स्पष्ट पहचान से निवेशकों को सोच-समझकर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।