facebookmetapixel
JioBlackRock MF ने लॉन्च किए 2 नए डेट फंड, ₹500 से SIP शुरू; इन फंड्स में क्या है खास?Titan Share: ऑल टाइम हाई पर टाटा का जूलरी स्टॉक, अब आगे क्या करें निवेशक; जानें ब्रोकरेज की रायQ3 नतीजों से पहले चुनिंदा शेयरों की लिस्ट तैयार: Airtel से HCL Tech तक, ब्रोकरेज ने बताए टॉप पिकBudget 2026: बजट से पहले सुस्त रहा है बाजार, इस बार बदलेगी कहानी; निवेशक किन सेक्टर्स पर रखें नजर?LIC के शेयर में गिरावट का संकेत! डेली चार्ट पर बना ‘डेथ क्रॉस’500% टैरिफ का अल्टीमेटम! ट्रंप ने भारत को सीधे निशाने पर लियाAmagi Media Labs IPO: 13 जनवरी से खुलेगा ₹1,789 करोड़ का इश्यू, प्राइस बैंड तय; चेक करें जरुरी डिटेल्स$180 मिलियन के शेयर सौदे पर सेबी की सख्ती, BofA पर गोपनीय जानकारी लीक करने का आरोपसोने को पछाड़कर आगे निकली चांदी, 12 साल के निचले स्तर पर पहुंचा गोल्ड-सिल्वर रेशियोStock To Buy: हाई से 40% नीचे मिल रहा आईटी स्टॉक, ब्रोकरेज ने कहा- खरीद लें; 71% तक चढ़ सकता है शेयर

RBI रहा बीते एक दशक के दौरान डॉलर का शुद्ध खरीदार

विश्व में विदेशी मुद्रा भंडार के शीर्ष चार देशों में भारत है। भारत ने 2023-24 तक अपना विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाकर 28.4 अरब डॉलर कर दिया है।

Last Updated- December 20, 2023 | 10:31 PM IST
Hidden forex charges bothering you? Expert explains what RBI's rules change

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बीते एक दशक के दौरान वायदा बाजार में मुख्यतौर पर खरीदार रहा है और केवल दो बार वित्त वर्ष 2018-19 और 2022-23 में शुद्ध विक्रेता रहा है। इस वित्त वर्ष में भी केंद्रीय बैंक शुद्ध खरीदार ही रहा है। इसने वर्ष 2013 की तुलना में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार का स्तर दोगुना से अधिक करने में महत्त्वपूर्ण रूप से योगदान दिया है।

इस वित्त वर्ष में केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर तक शुद्ध रूप से 1.7 अरब डॉलर की खरीदारी की। विश्व में विदेशी मुद्रा भंडार के शीर्ष चार देशों में भारत है। भारत ने 2023-24 तक अपना विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाकर 28.4 अरब डॉलर कर दिया है।

आरबीआई ने जोरदार ढंग से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की उस रिपोर्ट का जोरदार ढंग से खंडन किया है जिसमें भारत की विनिमय दर व्यवस्था को फ्लोटिंग से स्थिर व्यवस्था में पुनर्वगीकृत किया गया है। केंद्रीय बैंक कई बार जोर देकर कहा कि विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने का उद्देश्य केवल महंगाई पर लगाम कसना है, न कि विनिमय दर में हेरफेर करना।

हालांकि यह रुख 2022 में चुनौतीपूर्ण हो गया। इसका कारण यह था कि डॉलर के मुकाबले रुपये में 10 प्रतिशत की गिरावट आई थी। हालांकि वर्ष 2023 में भारत की मुद्रा ने महत्त्वपूर्ण रूप से स्थिरता प्रदर्शित की।

First Published - December 20, 2023 | 10:25 PM IST

संबंधित पोस्ट