facebookmetapixel
Advertisement
टैक्स राहत के बाद भारतीय बॉन्ड बाजार में ग्लोबल फंड्स की बढ़ी दिलचस्पी, रुपये को मिला सहाराअमेरिका ने फिर ईरान पर किया हमला, बहरीन-कुवैत हमले के बाद ट्रंप का बड़ा एक्शनMSME लोन से बैंकिंग सेक्टर को रफ्तार! SBI, HDFC समेत ये बैंक शेयर बने ब्रोकरेज की पसंदITR Filing 2026: रिफंड चाहिए तो ITR के बाद तुरंत करें e-Verification, देरी हुई तो बढ़ सकती है परेशानीभारत की नजर अब Qatar और Bahrain पर, GCC से पहले इन देशों के साथ होगी व्यापारिक साझेदारी!3 जुलाई को होगा बड़ा फैसला! 2030 तक 2 लाख करोड़ डॉलर निर्यात लक्ष्य पर सरकार का मेगा प्लानGold, Silver Price Today: तेज शुरुआत के बाद सोना पड़ा सुस्त, चांदी में भी गिरावटFCNR-B Scheme बनेगी विदेशी पूंजी का बड़ा जरिया? Standard Chartered CEO ने किया बड़ा दावामेडिकल डिवाइस कंपनियों को बड़ी राहत! लाइसेंस मिलने में लगेगा कम समय, सरकार लाई नया प्रस्तावअमेरिकी टैरिफ और पश्चिम एशिया संकट के बीच तिरुपुर ने बनाया रिकॉर्ड, ₹46000 करोड़ का निर्यात

रिफंड दावा खारिज करने का आदेश रद्द

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 10:01 PM IST

बंबई उच्च न्यायालय ने जीएसटी अधिकारियों के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें उन्होंने एक आवेदक के रिफंड दावे को खारिज कर दिया था। अधिकारियों ने ऐसा इसलिए किया कि रिफंड दो वर्ष बाद दाखिल किया गया था जबकि नियम दो वर्ष के भीतर दाखिल करने का है। ऐसा करते हुए अधिकारियों ने सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले को ध्यान में नहीं रखा जिसमें 15 मार्च, 2020 और 2 अक्टूबर, 2021 तक की अवधि को कोविड की वजह से समय सीमा से बाहर रखा गया था।
हालांकि उच्च न्यायालय ने परिपत्र की वैधता और इसे रद्द करने के सवाल पर ध्यान नहीं दिया। 

संबंधित याची ने जीएसटी पोर्टल पर पहला रिफंड आवेदन 21 अगस्त, 2020 को जुलाई 2018 से सितंबर 2018 के लिए किया था। हालांकि, केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) के सहायक आयुक्त ने इस आवेदन को मुंबई में 5 सितंबर, 2020 को इस आधार पर रद्द कर दिया था कि अवेदन में कुछ कमियां थीं।     
इसी तरह, याची ने दूसरा रिफंड आवेदन 8 सितंबर, 2020 को दाखिल किया लेकिन इसे भी सहायक आयुक्त ने कुछ कमियां बताकर रद्द कर दिया।

इसके बाद, याची ने तीसरा रिफंड आवेदन 30 सितंबर, 2020 को दाखिल किया लेकिन इसे उक्त अधिकारी ने इस आधार पर रद्द कर दिया कि आवेदन दो वर्ष की समय सीमा के बाद दाखिल किया गया है जबकि केंद्रीय अप्रत्यक्ष और सीमा शुल्क बोर्ड की ओर जारी परिपत्र में शामिल जीएसटी नियमों में इसकी अवधि दो वर्ष निर्धारित की गई है।
नाराज याची ने बंबई उच्च न्यायालय में याचिका देकर मांग की कि रिफंड के लिए दो वर्ष की समय सीमा को संविधान का उल्लंघन घोषित किया जाए।  उसने यह भी मांग की कि आवेदन को खारिज करने के आदेश को रद्द किया जाए और उसके रिफंड आवेदन को बहाल किया जाए। 

उच्च न्यायालय ने कहा कि विवाद का विषय यह नहीं है कि पहले और दूसरे आवेदन को कुछ कमियों के आधार पर रद्द कर दिया गया था। तीसरे रिफंड आवेदन को जीएसटी नियमों के मुताबिक दो वर्ष के भीतर दाखिल किया जाना चाहिए था।
हालांकि, इस याची के मामले में ऐसी समयसीमा की अवधि 15 मार्च, 2020 और 2 अक्टूबर, 2021 के बीच में आई जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने अपने सभी कार्यवाहियों से बाहर रखा चाहे वह सामान्य कानून या फिर विशेष कानून से संबंधित हो।    

इससे पहले, सर्वोच्च न्यायालय ने स्वत: रिट याचिका में निर्देश जारी किया था कि किसी भी मुकदमे, अपील, आवेदन और या कार्यवाहियों में समय सीमा की गणना करते वक्त कोविड की लहरों के कारण 15 मार्च, 2020 से 2 अक्टूबर, 2021 तक की अवधि को इससे बाहर रखा जाएगा। 
इसी आधार पर उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि सीजीएसटी के सहायक आयुक्त को इस दौरान की समय सीमा को समय की गणना से बाहर रखें। अदालत ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता का तीसरा रिफंड आवेदन निर्धारित समय सीमा के भीतर था। इस मामले में उच्च न्यायालय ने पाया कि सीजीएसटी के अधिकारियों का आदेश सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के विपरीत था।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने उस परिपत्र की वैधता पर कोई टिप्पणी नहीं की जिसमें रिफंड दावों के लिए समयसीमा की बात कही गई है। अदालत के कहा कि इस पर किसी उपयुक्त मामले में विचार किया जा सकता है।

Advertisement
First Published - January 16, 2022 | 11:10 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement