facebookmetapixel
Trump का बड़ा वार! रूसी तेल खरीदने पर भारत पर 500% टैरिफ का खतरा?UIDAI ने ‘उदय’ नामक शुभंकर किया पेश, लोगों को आधार के बारे में समझने में होगी आसानीSEBI का बड़ा फैसला: नई इंसेंटिव स्कीम की डेडलाइन बढ़ी, अब 1 मार्च से लागू होंगे नियमSEBI ने बदले 30 साल पुराने स्टॉकब्रोकरों के नियमों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिलेगा बढ़ावाRegular vs Direct Mutual Funds: देखें छिपा कमीशन कैसे 10 साल में निवेशकों की 25% वेल्थ खा गयाJioBlackRock MF ने लॉन्च किए 2 नए डेट फंड, ₹500 से SIP शुरू; इन फंड्स में क्या है खास?Titan Share: ऑल टाइम हाई पर टाटा का जूलरी स्टॉक, अब आगे क्या करें निवेशक; जानें ब्रोकरेज की रायQ3 नतीजों से पहले चुनिंदा शेयरों की लिस्ट तैयार: Airtel से HCL Tech तक, ब्रोकरेज ने बताए टॉप पिकBudget 2026: बजट से पहले सुस्त रहा है बाजार, इस बार बदलेगी कहानी; निवेशक किन सेक्टर्स पर रखें नजर?LIC के शेयर में गिरावट का संकेत! डेली चार्ट पर बना ‘डेथ क्रॉस’

तेल की खपत 6.1% बढ़ी, चुनावों और आर्थिक गतिविधियों से मिला बढ़ावा

यह वृद्धि देश में चुनावों और आर्थिक गतिविधियों में तेजी के कारण हुई है।

Last Updated- May 07, 2024 | 10:32 PM IST
OMC के शेयरों में और बढ़त की गुंजाइश, Scope for further growth in OMC shares

तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग ऐंड एनॉलिसिस सेल (पीपीएसी) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में ईंधन की मांग पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 6.1 प्रतिशत बढ़ी है। भारत इस समय विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, जिसे देखते हुए यह आंकड़े महत्त्वपूर्ण हैं। यह आंकड़ा देश में तेल खपत का भी संकेतक है।

कॉर्पोरेट रेटिंग एजेंसी इक्रा के सह प्रमुख और वाइस प्रेसीडेंट प्रशांत वशिष्ट ने कहा, ‘अप्रैल में तेल की खपत में बढ़ोतरी की वजह देश में चुनाव के कारण बढ़ी गतिविधियां हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि भारत के ईंधन की मांग 3 से 4 प्रतिशत बढ़ेगी, क्योंकि जीडीपी में वृद्धि तय है। खपत में सबसे बड़ी भूमिका पेट्रोल और डीजल की बेहतर मांग की हो सकती है। हवाई यात्रा की संख्या में भी बेहतर वृद्धि हुई है।’

आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल में कुल खपत 198.6 लाख टन रही है, जो पिछले साल के 187.1 लाख टन की तुलना में अधिक है। मार्च महीने में मासिक आधार पर मांग 5.8 प्रतिशत कम हुई थी और कुल खपत 210.9 लाख टन थी।

ट्रकों और वाणिज्यिक इस्तेमाल वाले वाहनों में इस्तेमाल होने वाले डीजल की बिक्री अप्रैल महीने में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 1.4 प्रतिशत बढ़कर 79.3 लाख टन हो गई। अप्रैल में पेट्रोल की बिक्री पिछले साल से 14 प्रतिशत बढ़कर 32.8 लाख टन हो गई। सड़क बनाने में काम आने वाले बिटुमेन की मांग पिछले साल से 5 प्रतिशत कम हुई है।

रसोई गैस या तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की बिक्री करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 23.6 लाख टन हो गई है, जबकि नाफ्था की बिक्री पिछले साल अप्रैल की तुलना में 3.9 प्रतिशत बढ़कर 11.6 लाख टन हो गई है। एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था अपने प्रमुख प्रतिस्पर्धियों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है और भारत की जीडीपी इस वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है।

पिछले सप्ताह के एक कारोबारी सर्वे से पता चलता है कि भारत के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्दि दर अप्रैल महीने में मामूली सुस्त हुई है, लेकिन तेज मांग के कारण इसमें तेजी बनी हुई है। इसकी वजह से फर्में कच्चा माल खरीदने के लिए प्रेरित हुई हैं।

First Published - May 7, 2024 | 10:32 PM IST

संबंधित पोस्ट