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‘आप भी तो खरीदते हो!’ रूस से तेल पर भारत का अमेरिका-यूरोप को तीखा जवाब

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भारत ने ट्रंप के आरोपों और टैरिफ की धमकी पर करारा जवाब दिया। बोला – तेल खरीद हमारी ज़रूरत है, न कि मुनाफाखोरी। अमेरिका-यूरोप खुद भी रूस से व्यापार कर रहे हैं।

Last Updated- August 05, 2025 | 8:20 AM IST
Modi Trump

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए आरोपों और टैरिफ बढ़ाने की धमकी पर भारत ने कड़ा जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि रूस से तेल खरीदना भारत की जरूरत है, और इस पर सवाल उठाना अनुचित और दोहरा मापदंड है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा, “भारत ने रूस से तेल खरीद इसलिए शुरू की, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बाद ट्रेडिशनल सप्लाई यूरोप की ओर मुड़ गई थीं। उस समय खुद अमेरिका ने भारत को यह खरीद करने के लिए प्रोत्साहित किया था, ताकि ग्लोबल एनर्जी मार्केट स्थिर बना रहे।”

रूस से तेल खरीद भारत की ज़रूरत

भारत इस समय अपनी कुल तेल ज़रूरत का करीब एक तिहाई हिस्सा रूस से आयात करता है, और चीन के बाद रूस का दूसरा सबसे बड़ा ग्राहक है। मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला सस्ती कीमतों और जनता की ऊर्जा ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

बयान में कहा गया, “भारत ने तेल अपने फायदे या मुनाफे के लिए नहीं खरीदा, बल्कि देश की जनता को सस्ती और लगातार ऊर्जा मिलती रहे, इसलिए ये जरूरी कदम उठाया गया।”

पश्चिमी देशों की आलोचना पर भारत ने उठाया सवाल

मंत्रालय ने पश्चिमी देशों की आलोचना को पाखंडपूर्ण बताया और कहा कि खुद अमेरिका और यूरोप रूस के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार कर रहे हैं। यूरोप ने 2024 में रूस से 16.5 मिलियन टन LNG (तरलीकृत गैस) खरीदी, जो रिकॉर्ड स्तर है। यूरोपीय संघ का रूस के साथ 2024 में €67.5 बिलियन का वस्तु व्यापार और 2023 में €17.2 बिलियन का सेवा व्यापार हुआ। अमेरिका भी रूस से यूरेनियम, पैलेडियम, फर्टिलाइज़र और केमिकल्स मंगा रहा है।

मंत्रालय ने कहा, “जो देश हमें आलोचना कर रहे हैं, वो खुद भी रूस से सामान खरीद रहे हैं – लेकिन उनके लिए ये मजबूरी नहीं है, बस एक विकल्प है।”

यह भी पढ़ें: अमेरिकी टैरिफ से बचाने के लिए भारत सरकार निर्यातकों को करेगी मदद, कपड़ा और रसायन क्षेत्र को राहत की उम्मीद

ट्रंप की धमकी और भारत का जवाब

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा कि भारत रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदता है और फिर उसे मुनाफे में बेचता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत को यूक्रेन में मर रहे लोगों की कोई परवाह नहीं है। इसके चलते उन्होंने भारत से आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी।

ट्रंप ने लिखा, “मैं भारत पर लगने वाले टैक्स को बहुत ज्यादा बढ़ाऊंगा। धन्यवाद!”

भारत ने ट्रंप के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा, “हमारे फैसले राष्ट्रीय हित में लिए जाते हैं। भारत एक संप्रभु देश है और अपनी आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर जरूरी कदम उठाएगा।”

यह भी पढ़ें: रूसी क्रूड को लेकर Trump की धमकी हुई फेल, भारतीय रिफाइनरीज़ ने मंगवाया लाखों बैरल कच्चा तेल

तेल आयात तुरंत नहीं रोका जा सकता

सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने भी बताया कि रूस से तेल आयात लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट के तहत हो रहा है। ऐसे समझौते को एक झटके में खत्म करना संभव नहीं। भारत ने जनवरी से जून 2025 के बीच रोज़ाना औसतन 1.75 मिलियन बैरल रूसी तेल आयात किया, जो पिछले साल से थोड़ा ज्यादा है।

भारत की रणनीति साफ: राष्ट्रीय हित सर्वोपरि

यूक्रेन युद्ध और दुनियाभर के तनाव के बीच भारत ने फिर साफ कर दिया है कि वह अपने फैसले खुद लेगा। तेल की जरूरत और बाहरी दबावों के बीच संतुलन बनाते हुए भारत ने दुनिया को यह साफ संदेश दिया है – “हम अपनी नीति किसी की आलोचना देखकर नहीं, बल्कि अपने देश के हित में बनाते हैं।”

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First Published - August 5, 2025 | 8:06 AM IST

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