facebookmetapixel
Advertisement
वैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमणसरकार का बड़ा फैसला: पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों में नहीं मिलेगा एलपीजी सिलिंडरकोटक बैंक ने सावधि जमा धोखाधड़ी मामले में दर्ज की शिकायत

भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते और मालदीव साझेदारी से सीफूड निर्यात और मत्स्यपालन क्षेत्र को जबरदस्त बढ़ावा

Advertisement

ब्रिटेन और मालदीव के साथ हुए समझौतों से भारत ने सीफूड निर्यात, मत्स्यपालन निवेश और ग्रामीण रोजगार को नई दिशा दी है।

Last Updated- July 27, 2025 | 10:29 PM IST
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत और अमेरिका के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार करार पर अभी अनिश्चितता जारी है। मगर भारत के समुद्री वस्तुओं और जलीय कृषि क्षेत्र में बीते दिनों दो बड़े घटनाक्रम हुए हैं, जिससे इस क्षेत्र की संभावनाएं कई गुना बढ़ गई हैं।

सबसे पहले, भारत और ब्रिटेन के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते से भारत के सीफूड और समुद्री वस्तुओं का निर्यात के लिए आकर्षक यूरोपीय बाजार का दरवाजा खुल गया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मालदीव की अपनी यात्रा के दौरान वहां एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए। समझौते की एक बड़ी बात है कि मालदीव द्वारा समुद्री वस्तुओं के उत्पादों के बुनियादी ढांचे के निर्माण में निवेश किया जाएगा।

अमेरिका, भारत के सीफूड के निर्यात का सबसे बड़ा गंतव्य है, लेकिन शुल्क के प्रति अनिश्चितता के कारण बीते कुछ महीनों से वहां होने वाले निर्यात पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पशुपालन डेरी और मत्स्यपालन विभाग द्वारा कुछ दिन पहले जारी बयान के मुताबिक, भारत-ब्रिटेन के बीच हुए व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते के तहत ब्रिटेन के शुल्क शेड्यूल श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले सभी मछली और मत्स्यपालन जिंसों जिन्हें ‘ए’ श्रेणी के तौर पर वर्गीकृत किया गया है वे अब समझौता लागू होने की तारीख से 100 फीसदी शुल्क मुक्त हो जाएंगे। फिलहाल, ब्रिटेन को भारत जो सीफूड निर्यात करता है उनमें मुख्य रूप से वन्नमेई झींगा, फ्रोजन स्किव्ड, लॉबस्टर, फ्रोजन पॉमफ्रेट और ब्लैक टाइगर झींगा शामिल हैं। पहले इन उत्पादों पर शून्य से लेकर 21.5 फीसदी तक शुल्क लगते थे, जिन्हें अब पूरी तरह से हटा दिया गया है। इससे अब ब्रिटेन के बाजार में लागत प्रतिस्पर्धा में काफी सुधार हुआ है। आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘मगर एचएस601 (सॉसेज और उस जैसे उत्पाद) के अंतर्गत आने वाले उत्पाद स्टेजिंग श्रेणी यू के अंतर्गत आते हैं और उन्हें किसी तरह की तरजीही सुविधा नहीं दी जाती है।’

साल 2024-25 में ब्रिटेन को भारत का समुद्री वस्तुओं का निर्यात 10.4 करोड़ डॉलर यानी 879 करोड़ रुपये आंका गया था, जिसमें फ्रोजन झींगा की अकेले करीब 77 फीसदी यानी 8 करोड़ डॉलर की हिस्सेदारी थी। मगर ब्रिटेन के 5.4 अरब डॉलर के सीफूड निर्यात बाजार में भारत की महज 2.25 फीसदी हिस्सेदारी है।

सरकारी बयान में कहा गया है, ‘व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता लागू होने के साथ उद्योग का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में ब्रिटेन को समुद्री वस्तुओं के निर्यात में करीब 70 फीसदी का इजाफा होगा।’

इस व्यापार करार पर कंपाउंड लाइवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीएलएफएम) के चेयरमैन दिव्य कुमार गुलाटी ने कहा, ‘हमें विश्वास है कि इस करार से ग्रामीण रोजगार, कृषि प्रसंस्करण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और भारत के पशु प्रोटीन परिवेश में मूल्य संवर्धन में तेजी आएगी। यह समावेशी, निर्यात संचालित कृषि क्षेत्र की वृद्धि की दिशा में एक कदम है।’ बयान में कहा गया है कि कुल मिलाकर 2024-25 में भारत का सीफूड निर्यात 7.38 अरब डॉलर यानी 60,523 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो 17.8 लाख टन के बराबर है।

मालदीव के साथ हुए समझौता ज्ञापन के तहत, मेजबान देश कोल्ड स्टोरेज अवसंरचना में निवेश के जरिये हैचरी के विकास, बेहतर उत्पादन क्षमता और संवर्धित प्रजातियों के विविधीकरण के जरिये कृषि क्षेत्र को मजबूत कर अपनी मछली प्रसंस्करण क्षमताओं को बढ़ाएगा। 

आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, मालदीव का मत्स्य क्षेत्र टूना पर बहुत अधिक निर्भर करता है, जिसमें स्किपजैक टूना (कात्सुवोनस पेलामिस) और येलोफिन टूना (थुन्नस अल्बाकारेस) की करीब 98 फीसदी हिस्सेदारी है। साल 2015 में मत्स्य क्षेत्र ने मालदीव के 11 फीसदी कार्यबल को रोजगार दिया था।

Advertisement
First Published - July 27, 2025 | 10:29 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement