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भारत ने यूके से की बासमती चावल पर शुल्क घटाने की मांग, मिल रही पाकिस्तान से चुनौती

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इस महीने तक 10 दौर की बातचीत हो चुकी है। इस सिलसिले में अगले दौर की बातचीत जून के अंत में शुरू होगी

Last Updated- June 18, 2023 | 10:31 PM IST
Rice export

वैश्विक बाजार में भारत को पाकिस्तान से बासमती चावल के निर्यात के लिए कड़़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। माना जा रहा है कि भारत मुक्त व्यापार समझौते के तहत यूनाइटेड किंगडम (यूके)से बासमती चावल की विभिन्न किस्मों पर आयात शुल्क घटाने की आवाज उठाएगा। यूके ने बीते कुछ वर्षों में बासमती चावल की कुछ किस्मों को मंजूरी दी है, इन पर शुल्क घटाने की मांग की जाएगी। व्यापार और उद्योग के सूत्रों के मुताबिक भारत अपने घरेलू उत्पादों की यूके के बाजार में पहुंच बढ़ाने के लिए भी मांग करेगा।

बासमती चावल की पारंपरिक किस्मों को शुल्कों में रियायत मिली हुई है। लेकिन अब इस सूची में बासमती चावल की नई किस्मों को शामिल किया गया है। माना यह जा रहा है कि भारत अधिक शुल्क घटाने की मांग भी उठाएगा। इस मामले के एक जानकार ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘भारत-यूके व्यापार समझौते की बातचीत में एक प्रमुख मुद्दा बासमती चावल पर शुल्क घटाना है।’

अभी यूके ब्राउन चावल पर करीब 56 पाउंड और सफेद चावल पर 125 पाउंड शुल्क लगाता है। सफेद चावल के अंतर्गत ही बासमती चावल आता है। आमतौर पर गैरपॉलिश वाले चावल में ब्राउन चावल आता है। कुछ कारोबारियों के अनुसार भारत पूरी यूरोपियन यूनियन (इसका हाल तक यूके भी हिस्सा था) को करीब 4,50,000 टन बासमती चावल का निर्यात करता था लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण यह गिरकर सालाना 2,00,000-2,25,000 टन आ गया।

यूके के चावल बाजार में भारत का प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान है। कुछ सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2017 में पाकिस्तान का यूके को बासमती चावल का आयात करीब 640 लाख डॉलर था और यह 2021 में बढ़कर 10.4 करोड़ डॉलर हो गया। व्यापार समझौते की वार्ता पूरी नहीं हुई है। इसलिए अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यूके शुल्क में कितनी छूट मुहैया कराने में सहज होगा। इस महीने तक 10 दौर की बातचीत हो चुकी है। इस सिलसिले में अगले दौर की बातचीत जून के अंत में शुरू होगी।

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कारोबार और व्यापार नीति के विशेषज्ञों के एक समूह के मुताबिक भारत को केवल बासमती चावल पर शुल्क घटाने के लिए बातचीत नहीं करनी चाहिए बल्कि गैर बासमती चावल की अन्य किस्मों के साथ यूके के बाजार में आसान पहुंच के लिए करनी चाहिए।

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पुस्तक ‘बासमती राइस – द नैचुरल हिस्ट्री ज्योग्राफिक्ल इंडिकेटर’ के लेखक एस. चंद्रशेखरन ने कहा, ‘चावल के बारे में भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते की रणनीति मुख्य तौर पर इसकी व्यापक किस्मों जैसे सुगंधित और विशेष चावल पर अनिवार्य रूप से केंद्रित हो। बासमती चावल की ही तरह पोन्नी या सोना मसूरी चावल या गोविंद भोग महत्त्वपूर्ण हैं। भारत को देश की मिठाइयों, नमकीन, पापड़ और रेडी टू ईट के लिए शुल्क रियायत की बात करनी चाहिए। यह यूके में ‘भारतीय रेस्टोरेंट’ के नए रुझान की स्थापना कर सकता है।’

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First Published - June 18, 2023 | 10:31 PM IST

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