facebookmetapixel
Advertisement
E20 फ्यूल से गाड़ी का इंजन खराब होगा और माइलेज कम मिलेगा? इस मुद्दे पर ऑटो दिग्गजों ने रखा अपना पक्षकिसानों को बड़ी राहत! सरकार ने प्याज की सरकारी खरीद कीमत 13.3% बढ़ाई, अब मिलेगा यह नया भावक्या कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस के बाद भी आपको हॉस्पिटल को देना पड़ा पैसा? एक्सपर्ट से जानिए इसकी असली वजहDividend Stocks: अगले हफ्ते एक्सिस बैंक, टाटा, JSW समेत 45 कंपनियां बाटेंगी बंपर मुनाफा, नोट करें रिकॉर्ड डेटटेलीग्राम पर सरकार का सख्त, फिल्मों-वेब सीरीज की पायरेसी रोकने के लिए दिया 15 दिन का अल्टीमेटममुफ्त शेयरों की बरसात! अगले हफ्ते ये 2 कंपनियां दे रही हैं बोनस शेयर, नोट कर लें रिकॉर्ड डेटशेयर बाजार में धमाका: अगले हफ्ते ये 2 कंपनियां दे रही हैं 1 के बदले 10 शेयर, नोट कर लें तारीख!यूपी सरकार ने FY27 के लिए तय किया ₹71,278 करोड़ का भारी-भरकम आबकारी लक्ष्य, पहले तीन महीने में रिकॉर्ड कमाईअब उत्तर प्रदेश से सीधे विदेश जाएगा आम, हॉट वेपर ट्रीटमेंट की व्यवस्था राज्य में ही करने जा रही योगी सरकारउत्तर प्रदेश में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए कोल इंडिया और UPRVUNL के बीच हुआ बड़ा समझौता

आयकर रिफंड 10 प्रतिशत घटा

Advertisement
Last Updated- December 15, 2022 | 4:28 AM IST

कोविड-19 महामारी को देखते हुए कर रिफंड तेज करने की सरकार की कवायदों के बावजूद प्रत्यक्ष कर रिफंड में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 10 प्रतिशत कमी आई है। रिफंड या आयकर विभाग से नकदी का प्रवाह इस वित्त वर्ष में 18 जुलाई तक 74,000 करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले साल की समान अवधि में 82,000 करोड़ रुपये था।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक सिर्फ उन रिफंड को रोका गया है, जिनमें करदाता की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है और जिन मामलों को जांच के लिए रखा गया है।
सीबीडीटी के अधिकारी ने कहा, ‘जो भी दिया जाना था, हमने दे दिया है। उन मामलों में ही रिफंड नहीं हुआ है, जहां करदाताओं की ओर से जवाब अपेक्षित है। जब वे जवाब भेज देंगे, शेष रिफंड भी जारी कर दिया जाएगा। इसके अलावा कुछ मामले ऐसे भी हैं, जहां कर मांग है। आयकर कानून के प्रावधानों के मुताबिक जांच के दौरान रिफंड रोका जा सकता है।’  उन्होंने कहा कि हमने ऐसा  कोई रिफंड नहीं रोका है, जिन्हें नहीं रोका जाना चाहिए। कुछ कर अधिकारियों ने कहा कि कर रिफंड में गिरावट की एक वजह लॉकडाउन के कारण कर्मचारियों की संख्या कम होना है, जिससे ऐसे बड़े रिफंड में देरी हो रही है, जिनमें अधिकारियों की मंजूरी की जरूरत होती है।
इस राशि में अन्य वर्षों की बकाया मांग का समायोजन भी शामिल है। अधिकारी ने कहा, ‘जिन मामलों में करदाता से पिछले वर्षों की कर मांग लंबित रहती है, रिफंड प्रक्रिया चलती है, लेकिन पिछली मांग में उसका समायोजन कर दिया जाता है, जिसे करदाता अपीली अधिकारियों के समक्ष चुनौती दे सकता है। इस तरह से उन मामलों में तकनीकी रूप से रिफंड जारी कर दिया जाता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से सरकार की ओर से धन नहीं जाता है।’
करीब 35,000 करोड़ रुपये का कर रिफंड अटका हुआ है, जिसे जांच में डाला गया है। जब तक इनकी जांच चलेगी, रिफंड अटका रहेगा। दो तिहाई रिफंड कंपनियों के और एक तिहाई रिफंड व्यक्तिगत करदाताओं के होते हैं। पिछले सप्ताह आयकर विभाग की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक 19.79 लाख मामलों में 24,603 करोड़ रुपये रिफंड करदाताओं को जारी किया गया है और वहीं कंपनियों के 1.45 लाख मामलों में इस अवधि के दौरान 46,626 करोड़ रुपये रिफंड दिया गया है।
7 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक रिफंड के बाद प्रत्यक्ष कर संग्रह में 23.4 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह 1.4 लाख करोड़ रुपये रहा है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 1.83 लाख करोड़ रुपये था। कर विशेषत्रों ने कहा, ‘व्यावहारिक अनुभव के मुताबिक इसमें ज्यादातर रिफंड छोटी राशियों के हैं, जबकि बड़े रिफंड जारी करने में अभी हिचकिचाहट है।’

Advertisement
First Published - July 22, 2020 | 11:47 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement