facebookmetapixel
वेनेजुएला संकट: भारत के व्यापार व तेल आयात पर भू-राजनीतिक उथल-पुथल से फिलहाल कोई असर नहींसोमनाथ मंदिर: 1026 से 2026 तक 1000 वर्षों की अटूट आस्था और गौरव की गाथाT20 World Cup: भारत क्रिकेट खेलने नहीं आएगी बांग्लादेश की टीम, ICC से बाहर मैच कराने की मांगसमान अवसर का मैदान: VI को मिलने वाली मदद सिर्फ उसी तक सीमित नहीं होनी चाहिए1985–95 क्यों आज भी भारत का सबसे निर्णायक दशक माना जाता हैमनरेगा भ्रष्टाचार का पर्याय बना, विकसित भारत-जी राम-जी मजदूरों के लिए बेहतर: शिवराज सिंह चौहानLNG मार्केट 2025 में उम्मीदों से रहा पीछे! चीन ने भरी उड़ान पर भारत में खुदरा बाजार अब भी सुस्त क्यों?उत्पाद शुल्क बढ़ते ही ITC पर ब्रोकरेज का हमला, शेयर डाउनग्रेड और कमाई अनुमान में भारी कटौतीमझोले और भारी वाहनों की बिक्री में लौटी रफ्तार, वर्षों की मंदी के बाद M&HCV सेक्टर में तेजीदक्षिण भारत के आसमान में नई उड़ान: अल हिंद से लेकर एयर केरल तक कई नई एयरलाइंस कतार में

बढ़ी कर दर लागू होने से पहले कुछ निवेश निकाल सकते हैं एफपीआई

विशेषज्ञों का अनुमान है कि कर की बढ़ी दर प्रभावी होने से पहले कुछ ​निवेश की निकासी हो सकती है।

Last Updated- February 02, 2025 | 11:18 PM IST
FPI

सरकार ने कर व्यवस्था में विसंगति दूर की है। इसके बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को सूचीबद्ध बॉन्डों, ऋणपत्रों, डेट म्युचुअल फंडों और सूचीबद्ध तरजीही शेयरों पर कर की कम दर का लाभ नहीं मिल पाएगा। आम बजट में स्पष्ट किया गया है कि एफपीआई को ऐसी निवेश प्रतिभूतियों पर 12.5 फीसदी की दर से लंबी अवधि का पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) कर देना होगा जो अभी तक 10 फीसदी लगता रहा है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि कर की बढ़ी दर प्रभावी होने से पहले कुछ ​निवेश की निकासी हो सकती है। यह संशोधन 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और कर निर्धारण वर्ष 2026-27 और आगे के वर्षों में लागू होगा। वित्त विधेयक 2025 में इसे स्पष्ट किया गया है।

ग्रांट थॉर्नटन भारत में पार्टनर विवेक अय्यर ने कहा कि एफपीआई निवेश को आमतौर पर हॉट मनी के रूप में जाना जाता है और यह कर दरों जैसे वैरिएबल के प्रति ज्यादा संवेदनशील होता है। ऋण प्रतिभूतियों की कर दरों में बदलाव से कर-बाद के रिटर्न पर काफी असर पड़ सकता है जो निवेश के फैसलों में एक महत्त्वपूर्ण कारक होता है।

उन्होंने कहा कि अधिक कर भुगतान वाली प्रतिभूतियों में आवंटन घटने की संभावना है। हालांकि भारत में समग्र निवेश में बदलाव नहीं हो सकता है क्योंकि निवेशक देश में अपने समग्र निवेश को कम करने के बजाय अन्य परिसंपत्ति वर्गों में धनराशि दोबारा आवंटित कर सकते हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि सरकार ने पिछले बजट में एफपीआई को मिलने वाले अंतर को खत्म कर दिया है। पहले, सरकारी प्रतिभूतियों और अन्य ऋण प्रतिभूतियों जैसी परिसंपत्तियों पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर 10 फीसदी था जबकि इक्विटी म्युचुअल फंडों के लिए इसे बढ़ाकर 12.5 फीसदी किया गया था। इस विसंगति को अब दूर किया गया है। एक अन्य कर सलाहकार ने सुझाव दिया कि पिछला अंतर शायद एक चूक थी जिसे अब ठीक कर लिया गया है।

निशीथ देसाई एसोसिएट्स के एक नोट में कहा गया है कि एफपीआई के लिए कर की दरें धारा 115 एडी में निर्दिष्ट हैं, न  कि धारा 112 में। वित्त (नंबर 2) अधिनियम, 2024 ने सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों के हस्तांतरण से उत्पन्न होने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) पर 12.5 फीसदी कर लगाने के लिए धारा 115 एडी में संशोधन किया (साथ ही लागू अधिभार और उपकर) गया है। हालांकि अन्य सभी परिसंपत्तियों पर एलटीसीजी पर 10 फीसदी कर लगाया जाता रहा। इस विसंगति को अब विधेयक के जरिए ठीक किया जा रहा है। आगे एफपीआई को मिलने वाले एलटीसीजी पर 12.5 फीसदी की दर से कर लगेगा।

एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार 2024 में भारतीय बाजारों में ऋण में शुद्ध एफपीआई निवेश 1.1 लाख करोड़ रुपये था जबकि डेट म्युचुअल फंडों में निवेश 507 करोड़ रुपये था। वॉलेंटरी रिटेंशन रूट (वीआरआर) के माध्यम से ऋण में शुद्ध निवेश 13,000 करोड़ रुपये था और एफएआर के रास्ते से लगभग 29,000 करोड़ रुपये था।

First Published - February 2, 2025 | 11:18 PM IST

संबंधित पोस्ट