प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
देश भर में हवा की खराब गुणवत्ता और पेयजल की कम उपलब्धता के बीच माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद अपनी आगामी बैठक में एयर और वॉटर प्यूरीफायर्स पर कर में कटौती पर विचार कर सकती है। मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक परिषद घरेलू एयर और वॉटर प्यूरीफायर्स पर कर दर को मौजूदा 18 फीसदी से कम करके 5 फीसदी करने पर विचार कर सकती है और इन्हें आम उपभोक्ता वस्तुओं के बजाय जन स्वास्थ्य के लिए जरूरी उपकरणों की श्रेणी में डाल सकती है।
उद्योग जगत का अनुमान है कि कम जीएसटी दर में कमी के बाद खुदरा कीमतों में 10 से 15 फीसदी की गिरावट आ सकती है जिससे यह तकनीक कम आय वाले परिवारों के लिए किफायती हो सकेगी। हालांकि इस बात को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है कि जीएसटी परिषद की अगली बैठक कब होगी। समाचार लिखे जाने तक वित्त मंत्रालय को भेजे गए एक ईमेल का जवाब नहीं आया।
परिषद की पिछली बैठक में प्यूरीफायर्स पर लगने वाली कर दरों को अपरिवर्तित रखा गया था। अधिकारियों ने कहा कि इस समय यह मामला विचाराधीन है लेकिन दरों में किसी भी कमी के लिए सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों के बीच सहमति बनानी होगी। पिछले कुछ हफ्तों में परिषद पर दबाव तेज हो गया है। 24 दिसंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सरकार से कहा कि वह जल्द से जल्द जीएसटी परिषद की बैठक बुलाए। फिर चाहे वर्चुअल रूप से हो या भौतिक रूप से।
ऐसा इसलिए ताकि एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी को कम करने या समाप्त करने पर विचार किया जा सके, क्योंकि दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है। केंद्र ने अदालत से कहा कि इससे ऐसा सिलसिला शुरू हो जाएगा जिसे रोकना मुश्किल होगा। लेकिन उसने यह भी जोड़ा कि इस मामले पर ‘विचार किया जाएगा’।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरामन ने जीएसटी परिषद की भौतिक बैठक पर जोर देते हुए कहा कि इन्हें वीडियो कांफ्रेंस से नहीं आयोजित किया जा सकता। उन्होंने कहा, ‘यह एक प्रक्रिया है…हम नहीं कह रहे कि ये होगा या नहीं।’ अदालत का यह हस्तक्षेप अधिवक्ता कपिल मदन द्वारा दायर एक जनहित याचिका के बाद आया, जिसमें तर्क दिया गया था कि प्यूरीफायर को ‘लक्जरी’ वस्तु मानकर उन पर 18 प्रतिशत कर लगाना सार्वजनिक स्वास्थ्य को कमजोर करता है।
इस विषय पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ गया है। नवंबर में, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र से एयर और वॉटर प्यूरीफायर दोनों पर जीएसटी समाप्त करने का आग्रह किया। उद्योग और व्यापार संगठनों ने भी सरकार को प्रतिनिधित्व दिया है, जिसमें दर को घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग की गई है।
इन मांगों को मजबूती देते हुए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन पर संसदीय स्थायी समिति ने अपनी दिसंबर रिपोर्ट में सिफारिश की कि एयर और वॉटर प्यूरीफायर तथा उनके उपभोग वाले हिस्सों पर जीएसटी को घटाया या समाप्त किया जाना चाहिए। समिति ने कहा कि नागरिकों को स्वच्छ हवा और सुरक्षित पेयजल प्राप्त करने की कोशिश के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए। रस्तोगी चैंबर्स के संस्थापक अभिषेक ए. रस्तोगी ने कहा कि जीएसटी को 5 प्रतिशत तक घटाना एक व्यावहारिक और नीतिगत रूप से संगत कदम होगा।
उन्होंने कहा, ‘प्रदूषण नियंत्रण पर न्यायिक निगरानी के सख्त होने और स्वच्छ हवा व पानी को आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकता के रूप में बढ़ती मान्यता के साथ, इन उत्पादों को अब लक्जरी वस्तुओं के रूप में नहीं माना जा सकता। कम जीएसटी दर आवश्यक शुद्धिकरण तकनीकों तक पहुँच को लोकतांत्रिक बनाएगी और अप्रत्यक्ष कर नीति को स्थिरता और स्वास्थ्य-समता लक्ष्यों के साथ संरेखित करेगी।‘
रस्तोगी ने यह भी उल्लेख किया कि निर्माताओं को उच्च जीएसटी दरों के कारण घटकों और कच्चे माल पर अतिरिक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा होने का जोखिम है, जिससे दर संरचना को तार्किक बनाने का मामला और मजबूत होता है।