वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि इस वर्ष कर संरचना को सरल बनाने वाले वस्तु एवं सेवा कर (GST) सुधारों के बाद अब सरकार अगली पीढ़ी के सीमा शुल्क सुधारों पर तत्परता से काम कर रही है।
दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में समापन व्याख्यान के दौरान सीतारमण ने कहा कि भारत अपनी आर्थिक ताकत के कारण मजबूती से और अलग तरह से खड़ा है और जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
वित्त मंत्री ने कहा, ‘मैं यह नहीं कह रही हूं कि हम अब विकसित देश बन गए हैं। विकसित भारत 2047 अभी हमसे दूर है। हमें जो सबसे अलग बनाता है, वह 2014 में 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से अब पांचवीं और फिर चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है। संभवतः जल्द ही तीसरे स्थान पर पहुंचने वाले हैं।’
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार को वित्त वर्ष 2025-26 में 4.4 प्रतिशत के वित्तीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने का भरोसा है और उसके बाद अगले वित्त वर्ष से ऋण से जीडीपी अनुपात पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सीतारमण ने कहा, ‘जब तक आपकी अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं होगी, आपकी वृहद आर्थिक धारणा मजबूत नहीं होगी, तब तक आप मजबूती से खड़े नहीं हो पाएंगे।’
भारत की ताकत पर सवाल उठाने वाली ‘अंतरराष्ट्रीय छीटाकशी’ का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि, ‘हमें यह विश्वास होना चाहिए कि हम इन लक्ष्यों को स्वयं प्राप्त कर रहे हैं और उन लोगों से प्रभावित नहीं होना चाहिए जो कहते हैं कि आपकी अर्थव्यवस्था इसके लायक नहीं है।’ उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में भारत उल्लेखनीय रूप से शानदार प्रदर्शन कर रहा है और 2.5 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकालने में सफल रहा है।
सीतारमण ने युवा अर्थशास्त्रियों से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि वैश्विक आर्थिक बहसों में भारत का पक्ष हिस्सा बने और कहा कि भारत से निकलने वाले आर्थिक सिद्धांत न सिर्फ भारत के लिए, बल्कि ग्लोबल साउथ के लिए भी अनुकूल होने चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा, ‘हमें जानकारी साझा करने की आवश्यकता है, ताकि चिंताएं न हों और अवसर नजर आएं।’
उन्होंने कहा कि भारत एक महत्त्वपूर्ण मोड़ पर है, जिसमें नई चीजें सामने आ रही हैं और इसमें तकनीक की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
सीतारमण ने कहा, ‘तकनीक इतनी बड़ी भूमिका निभा रही है कि हम सभी अर्थव्यवस्था के बारे में जो अध्ययन कर रहे हैं, उसका इसमें ध्यान रखने की जरूरत है। यह महत्त्वपूर्ण है कि जैसे-जैसे हम आगे बढ़ें, हम नीति निर्माताओं के साथ जुड़कर डेटा संचालित इनपुट प्रदान करें।’
वित्त मंत्री ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह इसने कर चोरी की पहचान करने में क्रांति ला दी। सीतारमण ने बुजुर्ग होती आबादी, शहरीकरण और ऑटोमेशन पर शोध की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ‘वैश्वीकरण के प्रभावी रूप से पीछे हटने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन के साथ अगले 2 दशकों में उच्च वृद्धि दर का औसत बनाए रखना निस्संदेह चुनौतीपूर्ण होगा। जब तक युवा मस्तिष्क हमारे सामने आने वाली चुनौतियों के लिए मजबूत समाधान नहीं खोजते हैं, तब तक आप भारत के विकासशील एजेंडे के साथ तालमेल नहीं बिठा पाएंगे।’