सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स पुर्जा विनिर्माण योजना (ईसीएमएस) के तहत 41,863 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव वाले 22 और आवेदनों को आज मंजूरी दे दी। इसके साथ ही इस योजना के तहत सरकार की मंजूरी पाने वाली कंपनियों की कुल संख्या 46 हो गई है, जिससे कुल 54,567 करोड़ रुपये का निवेश होगा।
इस चरण में जिन कंपनियों को मंजूरी दी गई है उनमें टीडीके इंडिया, बीपीएल, विप्रो हाइड्रोलिक्स, मदरसन इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, फॉक्सकॉन, सैमसंग डिस्प्ले, डिक्सन और हिंडाल्को आदि शामिल हैं। जिन कंपनियों को आज मंजूरी मिली है वे कैपेसिटर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के लिए लीथियम-आयन सेल, कॉपर-क्लैड लैमिनेट, एन्क्लोज़र, एनोड मटीरियल, कनेक्टर, डिस्प्ले और कैमरा मॉड्यूल जैसे पुर्जे बनाएंगी।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सभी कंपनियों को अपनी खुद की डिजाइन टीम बनानी चाहिए, चाहे इसमें कितना भी खर्च या मेहनत क्यों न लगे। वैष्णव ने कहा, ‘भले ही डिजाइन टीम में कुछ कर्मचारी हों मगर टीम तो होनी ही चाहिए। अगर बड़ी टीम होती है तो इसका स्वागत है।’
वैष्णव ने यह भी सुझाव दिया कि जिन कंपनियों को इस योजना के तहत मंज़ूरी मिली है, उन्हें शैक्षणिक संस्थान में मानक डिजाइन सुविधा विकसित करने के लिए उद्योग निकाय के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि कंपनियों, खास तौर पर छोटे-मझोले उपक्रमों को उनका फायदा मिल सके।
वैष्णव ने कंपनियों और उनके संबंधित उद्योग संगठन से छह हफ़्ते के अंदर ठोस योजना बनाने को भी कहा, जिसमें देसी इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैकेनिकल डिजाइन सेंटर बनाने के लिए जरूरी टूल, सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर पर इनपुट का ब्योरा हो।
वैष्णव ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों को भी सिक्स सिग्मा स्टैंडर्ड्स का सख्ती से पालन करना चाहिए ताकि यह पक्का हो सके कि उनके संयंत्र से निकलने वाले उत्पाद सबसे अच्छी गुणवत्ता के हों और दुनिया भर में मुकाबला कर सकें।