बीएस बातचीत
औद्योगिक गतिविधियां रुक जाने के कारण देशबंदी के दौरान बिजली की मांग में रिकॉर्ड गिरावट आई है। इसकी वजह से 50,000 मेगावॉट से ज्यादा कोयला आधारित बिजली का उत्पादन बंद करना पड़ा। अप्रैल में पनबिजली की कुल बिजली उत्पादन में हिस्सेदारी बढ़कर 12.43 प्रतिशत हो गई, जो पिछले साल 10 प्रतिशत थी। एनएचपीसी लिमिटेड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एके सिंह ने श्रेया जय के साथ बातचीत में कहा कि अब पनबिजली क्षेत्र पर ध्यान फिर से केंद्रित होगा और इससे एनएचपीसी की विस्तार योजना को बल मिलेगा। संपादित अंश…
लॉकडाउन के दौरान बिजली की खपत घटी है, लेकिन पनबिजली की हिस्सेदारी बढ़ी है। ज्यादा मांग के समय और मांग के बदले तरीके का प्रबंधन एनएचपीसी कैसे कर रही है?
हमारी 72 बिजली इकाइयों में से 66 में बिजली उत्पादन के लिए तैयार हैं, और पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन नदी के प्रभाव पर निर्भर है। हमारे 5 पनबिजली स्टेशनों की कुल 1,548.2 मेगावॉट क्षमता रन आफ द रिवर (आरओआर) पर आधारित है। लोकटक प्लांट (105 मेगावॉट) का जलाशय है, जबकि शेष 3,798 मेगावॉट तालाबों के साथ आरओआर पर है। तालाबों/जलाशयों वाली इन इकाइयों का उपयोग मांग बढऩे पर किया जाता है।
स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एनएचपीसी की इकाइयां किस तरह काम कर रही हैं?
लॉकडाउन के बाद मेरी तात्कालिक प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना थी कि बिजली संयंत्रों में कामकाज सुचारु रूप से चले। पहला कदम यह था कि हमारे परिसर को सैनेटाइज किया जाए और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए हर सावधानी बरती जाए। हमने बिजली केंद्रों को चलाने के लिए न्यूनतम मानव संसाधन के बारे में फैसला किया और शेष कर्मचारियों को घर से काम करने पर लगाया गया। हमारी मेडिकल टीम कार्यस्थल और बिजली स्टेशनों पर होती है, जिससे सभी कर्मचारियों की उचित तरीके से स्क्रीनिंग हो सके। मुझे इस बात पर गर्व है कि कर्मचारी स्वस्थ हैं और सभी 24 बिजली स्टेशनों पर कामकाज चालू है।
क्या मौजूदा स्थिति में एनएचपीसी की इकाइयां ऑटोमेसन और रिमोट मॉनिटरिंग पर निर्भर हैं?
लॉकडाउन के ठीक पहले हमने एक बिजली स्टेशन रिमोट संचालित किया था। आगे हम अपनी 2 परियोजनाओं को रिमोट संचालित बनाने की कवायद कर रहे हैं। बहरहाल ऑटोमेशन और रिमोट ऑपरेशन हमारी योजना का मुख्य हिस्सा है।
5 अप्रैल को बिजली बंद करने के कार्यक्रम के दौरान ग्रिड की स्थिरता बरकरार रखने में पनबिजली ने अहम भूमिका निभाई थी। उस कार्यक्रम पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
नीति निर्माताओं के साथ चर्चा के दौरान मैंने हमेशा पनबिजली पर जोर दिया है और कहा है कि यह एनर्जी बास्केट में महत्त्वपूर्ण है। 5 अप्रैल को 9बजे9मिनट कार्यक्रम में कठिन वक्त में ग्रिड के प्रबंधन में पनबिजली ने अपनी श्रेष्ठता साबित की है। अब पवन और सौर ऊर्जा के एकीकरण बढऩे के साथ यह अहम हो गया है कि पनबिजली क्षेत्र की क्षमता बढ़ाई जाए। ऐसे में मुझे लगता है कि पनबिजली पर ध्यान बढ़ाए जाने की जरूरत है।
पिछले वित्त वर्ष में एनएचपीसी का पूंजीगत व्यय 5,000 करोड़ रुपये पार करने की संभावना थी। क्या इसके बारे में कोई अद्यतन सूचना है? साथ ही चालू वित्त वर्ष के लिए पूंजीगत व्यय की क्या योजना है?
पिछले साल हमारा पूंजीगत व्यय करीब 4,155 करोड़ रुपये था, जिसमें संयुक्त उद्यमों में इक्विटी निवेश भी शामिल है, जो 3,806 करोड़ रुपये एमओयू लक्ष्य से करीब 9 प्रतिशत ज्यादा है। चालू वित्त वर्ष के लिए हमारी पूंजीगत व्यय की योजना 5,253 करोड़ रुपये की है, जिसमें सब्सिडियरीज में 603 करोड़ रुपये का इक्विटी निवेश शामिल है।
एनएचपीसी ने निजी क्षेत्र की बेकार पड़ी 2 पनबिजली परियोजनाओं का अधिग्रहण दिवाला के माध्यम से किया। क्या आपकी नजर और अधिग्रहण पर है?
हमें देश में पनबिजली की पूरी क्षमता का दोहन करना चाहिए। हमने लैंको तीस्ता हाइड्रोपावर (तीस्ता-6) और जेएएल पावर का रंगित-4 परियोजनाओं का अधिग्रहण दिवाला के माध्यम से किया है। अगर हमारे पोर्टफोलियो से तालमेल के मुताबिक परियोजनाएं मिलती हैं तो और अधिग्रहण के लिए तैयार हैं।
सौर और पवन उर्जा परियोजनाओं को लेकर कंपनी की क्या योजना है? क्या कंपनी हाइब्रिड पॉवर प्रोजेक्ट की भी संभावना देख रही है?
हम अभी एक पवन और एक सौर बिजली स्टेशन चला रहे हैं। हमने 2000 मेगावॉट सौर क्षमता के लिए टेंडर पूरा किया है। हम लद्दाख क्षेत्र में हाइड्रो सोलर हाइब्रिड परियोजना की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
कंपनी की कितनी क्षमता निर्माणाधीन है?
पांच पनबिजली परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिनकी क्षमता 4,924 मेगावॉट है। इनके अलावा 11 परियोजनाएं मंजूरी के विभिन्न स्तरों पर हैं, जिनकी क्षमता 7,790 मेगावॉट है।