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‘कंपनी ने हमें मुश्किल में छोड़ दिया है’, BluSmart की अचानक ‘ब्रेक’ ने हजारों ड्राइवरों को बेरोजगार किया

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बुधवार को कंपनी ने अचानक दिल्ली-एनसीआर और बेंगलूरु समेत देश के प्रमुख शहरों में अस्थायी रूप से बुकिंग लेनी बंद कर दीं।

Last Updated- April 18, 2025 | 11:00 PM IST
BluSmart
फोटो क्रेडिट: BluSmart

पेशे से ड्राइवर तीर्थंकर हर रोज सुबह उठकर पहले अपने बच्चे को स्कूल छोड़ते और फिर बुकिंग लेने के लिए नेहरू प्लेस इलाके में स्थित ब्लूस्मार्ट हब पर पहुंच जाते। लेकिन उन्हें क्या पता था कि आज उनके लिए अन्य दिनों की तरह सामान्य रूटीन नहीं था। जब वह हब में अपने इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी चार्ज कर रहे थे, तभी उन्हें कैब-सेवा प्रदाता कंपनी का मेसेज मिला, जिसे पढ़कर वह हक्के-बक्के रह गए। उसमें लिखा था:

प्रिय प्राइवेट पार्टनर,

वाहनों के ऑडिट के कारण कुछ दिनों के लिए कैब संचालन अस्थायी रूप से रोका जा रहा है। ऑडिट पूरा होने और संचालन दोबारा शुरू होने पर आपको तुरंत वापस बुला लिया जाएगा। आपको स्लॉट बुकिंग के लिए संदेश मिलेगा। कृपया हमारे साथ सहयोग करें। आपका धैर्य और सहयोग हमारे लिए बहुत मूल्यवान है।

आपको दिल से धन्यवाद, टीम ब्लूस्मार्ट

इन चंद लाइनों के मेसेज ने तीर्थंकर को हैरान-परेशान कर दिया। वह कहते हैं, ‘मेरा बेटा अभी कक्षा एक में आया है। वैसे वह सरकारी स्कूल में पढ़ता है, लेकिन पहले की अपेक्षा खर्च काफी बढ़ गया है। मैं अपने परिवार में अकेला कमाने वाला हूं। अब क्या करुं?’

इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी)-आधारित कैब सेवा देने वाले प्लेटफॉर्म ब्लूस्मार्ट का संचालन करने वाली मुख्य कंपनी जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड (जीईएल) में मची वित्तीय उथल-पुथल के कारण बुधवार को इसने अचानक दिल्ली-एनसीआर और बेंगलूरु समेत देश के प्रमुख शहरों में अस्थायी रूप से बुकिंग लेनी बंद कर दीं। ब्लूस्मार्ट ने यह कदम भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा जेनसोल इंजीनियरिंग और उसके प्रमोटर- अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी को धन के दुरुपयोग और कॉरपोरेट गवर्नेंस चूक के आरोपों पर प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित करने के एक दिन उठाया है।

सेबी ने अपनी जांच में पाया कि जेनसोल इंजीनियरिंग ने इरेडा और पीएफसी जैसे संस्थानों से 977.75 करोड़ रुपये का टर्म लोन लिया था। इस राशि में से 663.89 करोड़ रुपये 6,400 इलेक्ट्रिक गाडि़यां (ईवी) खरीदने के लिए निर्धारित किए गए थे। हालांकि, कंपनी ने केवल 567.73 करोड़ रुपये के 4,704 वाहन ही खरीदे। सेबी के अनुसार शेष 262.13 करोड़ रुपये की राशि का कोई हिसाब नहीं है। 

तीर्थंकर अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं, जिनके समक्ष अचानक रोजी-रोटी का संकट आ खड़ा हुआ है। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने ब्लूस्मार्ट के साथ जुड़े हजारों वाहन चालकों को एक झटके में बेरोजगार कर दिया। अनुमान के मुताबिक इससे 10,000 से अधिक ड्राइवर प्रभावित हुए हैं। तीर्थंकर की तरह ही दिल्ली-एनसीआर में कंपनी के लिए कार चलाने वाले एक अन्य ड्राइवर धरम (नाम परिवर्तित) को भी इसी तरह का संदेश मिला। उन्होंने अन्य ड्राइवरों से बात की, जिन्होंने ‘ब्रेकडाउन’ होने की सूचना दी।  यह शब्द वे उस समय इस्तेमाल करते हैं जब सेवाएं बंद कर दी जाती हैं। सभी के राइड स्लॉट रद्द कर दिए गए और उन्हें अब और राइड आवंटित नहीं की जा रही थीं। उन्होंने कहा, ‘हमने कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन ज्यादातर को नाकामी ही हाथ लगी। जो किसी तरह अधिकारियों से मिल पाए, उन्हें बताया गया कि सब के पास एकमात्र यही मेसेज है। उन्होंने हमें मुश्किल हालात में फंसा कर छोड़ दिया है।’

उन्होंने कहा, ‘कंपनी ने कुछ चालकों को पिछले सप्ताह का भुगतान कर दिया था। हमें प्रति सप्ताह लगभग 8,000 रुपये मिलते हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। अन्य कैब-सेवा कंपनियों की तरह हम अपनी खुद की कारें नहीं चलाते हैं। ओला और उबर में ड्राइवरों के पास अपनी कारें होती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में वे व्यक्तिगत काम कर सकते हैं, लेकिन हमें कारें ब्लूस्मार्ट ही देती थी, इसलिए हमारे पास कुछ नहीं बचा। अब हम कहां जाएं।’

गिग वर्कर्स एसोसिएशन ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है। एसोसिएशन के आयोजन सचिव नितेश कुमार दास कहते हैं, ‘हमने कंपनी को पत्र लिखा है। फर्म से हमारी चार मांगें हैं- बकाया रकम का तत्काल भुगतान हो, तीन महीने के वेतन के बराबर मुआवजा दें, वैकल्पिक रोजगार का इंतजाम करें और चालक द्वारा खरीदा गया चार्जर वापस लिया जाए।’ उन्होंने कहा, ‘यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो हम विरोध के लिए सड़कों पर उतरेंगे।’

बड़ी बात यह कि कंपनी का चार्जर चालकों के गले की फांस बन गया है। नाम न छापने की शर्त पर एक ड्राइवर ने कहा, ‘घर पर कार रखने वाले चालकों को कंपनी से 5,000 रुपये में चार्जर खरीदने की शर्त जुड़ी थी। यह सिक्योरिटी राशि की तरह है। लेकिन अब जब कंपनी ने सेवाएं बंद कर दी हैं तो चालक इस चार्जर का क्या करें? कंपनी इसे वापस ले और हमें हमारे 5,000 रुपये वापस करे।’

बातचीत में कई अन्य चालक बताते हैं कि उन्हें कुछ गलत होने का आभास हो रहा था, क्योंकि नई गाडि़यों की स्टैपनी पुरानी में लगाई जा रही थीं। आपस में इसे लेकर चर्चा भी करते थे, लेकिन यह सब इतनी जल्दी और अचानक हो जाएगा, इसका पता नहीं था।

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First Published - April 18, 2025 | 10:55 PM IST

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