आयकर विभाग को 950 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता चला है। विभाग के अनुसार वॉलमार्ट नियंत्रित फ्लिपकार्ट समूह की एक कंपनी और फूड डिलिवरी करने वाली स्टार्टअप स्विगी की जांच में कर से जुड़ी ‘कर अनियमितताओं’ का पता चला है। आयकर विभाग को शुरुआती जांच में इन कंपनियों द्वारा कर छुपाए जाने का अंदेशा है। पिछले सप्ताह स्विगी और इंस्टाकार्ट के कार्यालय में पड़ताल अभियान के बाद जांच शुरू हुई थी।
इस पूरे मामले की जानकारी रखने वाले एक कर अधिकारी ने कहा, ‘दोनों कंपनियों की हुई पड़ताल में ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे टीडीएस सहित दूसरी तरह की कर अनियमितताओं का पता चला है।’ अधिकारी ने कहा कि 650 करोड़ रुपये का कर फ्लिपकार्ट की कंपनी से जुड़ा है जबकि शेष रकम स्विगी से जुड़ी है।
अधिकारी के अनुसार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत कथित तौर पर अवैध इनपुट टैक्स के्रडिट के मामले में इन दोनों कंपनियों पर सर्वेक्षण किए गए थे, लेकिन इस कार्रवाई के दौरान कर से जुड़ी कई दूसरी अनियिमितताएं भी सामने आई हैं। इस मामले में जांच के बाद सभी दस्तावेज की जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट इस महीने के अंत तक प्रत्यक्ष कर बोर्ड को भेजी जाएगी।
इस मामले पर पूछे गए सवाल के जवाब में फ्लिपकार्ट के प्रवक्ता ने कहा, ‘कर अधिकारियों से हमें इस संबंध में कोई जानकारी नहींं मिली है। पड़ताल के दौरान हमने पूरा सहयोग दिया और कर अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार उन्हें सभी दस्तावेज मुहैया कराए हैं। हमारे वरिष्ठ अधिकारी आवश्यकता पडऩे पर कर अधिकारियों के समक्ष पेश हुए हैं और सभी तरह की सूचनाएं एवं जरूरी स्पष्टीकरण दिए हैं। कर अधिकारियों से हमें जब भी कोई निर्देश मिलेगा तो हम उसके अनुसार सहयोग के लिए तैयार रहेंगे।’
स्विगी के प्रवक्ता ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया और कर छुपाने की बात से इनकार किया। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें इस संबंध में आय कर विभाग से किसी तरह का संवाद प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ‘स्विगी कानूनों का हमेशा पालन करती है और सभी तरह के करों का भुगतान समय रहते किया है। हाल में हुर्ई पड़ताल में हमने आयकर विभाग को पूरा सहयोग दिया है। अगर उनके पास कोई और सवाल है तो उनका जवाब देने के लिए भी हम तैयार हैं।’
विभाग सब-कॉन्ट्रैक्टरों को किए गए भुगतान की भी जांच कर रहा है। अधिकारी के अनुसार जांच में सब-कॉन्ट्रैक्टर द्वारा बड़ी कर चोरी का भी पता चला है। अधिकारी ने कहा कि हालांकि इन कंपनियों का सब-कॉन्ट्रैक्टरों के कराधान से कोई सीधा संबंध नहीं है, लेकिन संदेह की गुंजाइश तो बनती है।
अधिकारियों ने कहा कि कॉन्ट्रैक्टरों के दावे की जांच फिलहाल चह रही है। मौजूदा नियमों के अनुसार ई-कॉमर्स पोर्टल जो रकम रखती है उस पर टीडीएस लगता है। यह रकम आपूर्तिकर्ता द्वारा दिया गया कमीशन होता है इसलिए यह आयकर कानून के 194एच के तहत आता है। इसी तरह डिलिवरी बॉय या एजेंसी को दी गई रकम पर भी टीडीएस लागू होता है।