facebookmetapixel
Advertisement
Fusion Klassroom IPO Listing: GMP ने नहीं दिया था मुनाफे का संकेत, फिर भी 7% प्रीमियम पर लिस्ट हुआ शेयरUS Birthright Citizenship: ट्रंप का नया दांव, भारतीयों पर क्या होगा असर? H-1B और Visitor Visa का समझें पूरा ग​णितनए ग्राहक जोड़ने की तैयारी में Swiggy, Toing के जरिए Gen Z पर दांव; शेयर पर 54% तक का टारगेटMDR लागू हुआ तो UPI से लेनदेन होगा महंगा? ग्राहक या दुकानदार किस पर पड़ेगा बोझ, वित्त मंत्री ने क्या कहाLIC के नए कारोबार से मुनाफा 61% उछला, ब्रोकरेज बुलिश; शेयर में 42% तक तेजी की उम्मीदHero MotoCorp Q1: हाई बेस से मुनाफे पर दबाव, 17% की गिरावट; बिक्री में 23% की दमदार बढ़तGold silver price today: ग्लोबल तनाव के बीच भी सोना ₹497 चढ़ा, चांदी ₹2,157 उछलीLIC Agents: डिजिटल दौर में भी LIC के एजेंटों का दबदबा, 93% नया कारोबार इन्हीं के जरिएBrent Crude: FY27 में 82 डॉलर रह सकती है औसत कीमत, ब्रोकेरज ने बताए क्या हैं बड़े जोखिमDefence Stocks: HAL और Solar Industries पर ब्रोकरेज बुलिश, बताया FY27-FY28 में क्यों बढ़ सकते हैं ऑर्डर?

इंस्टाकार्ट और स्विगी में कर अनियमितताएं!

Advertisement
Last Updated- December 12, 2022 | 9:52 AM IST

आयकर विभाग को 950 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता चला है। विभाग के अनुसार वॉलमार्ट नियंत्रित फ्लिपकार्ट समूह की एक कंपनी और फूड डिलिवरी करने वाली स्टार्टअप स्विगी की जांच में कर से जुड़ी ‘कर अनियमितताओं’ का पता चला है। आयकर विभाग को शुरुआती जांच में इन कंपनियों द्वारा कर छुपाए जाने का अंदेशा है। पिछले सप्ताह स्विगी और इंस्टाकार्ट के कार्यालय में पड़ताल अभियान के बाद जांच शुरू हुई थी।
इस पूरे मामले की जानकारी रखने वाले एक कर अधिकारी ने कहा, ‘दोनों कंपनियों की हुई पड़ताल में ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे टीडीएस सहित दूसरी तरह की कर अनियमितताओं का पता चला है।’ अधिकारी ने कहा कि 650 करोड़ रुपये का कर फ्लिपकार्ट की कंपनी से जुड़ा है जबकि शेष रकम स्विगी से जुड़ी है।
अधिकारी के अनुसार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत कथित तौर पर अवैध इनपुट टैक्स के्रडिट के मामले में इन दोनों कंपनियों पर सर्वेक्षण किए गए थे, लेकिन इस कार्रवाई के दौरान कर से जुड़ी कई दूसरी अनियिमितताएं भी सामने आई हैं। इस मामले में जांच के बाद सभी दस्तावेज  की जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट इस महीने के अंत तक प्रत्यक्ष कर बोर्ड को भेजी जाएगी।
इस मामले पर पूछे गए सवाल के जवाब में फ्लिपकार्ट के प्रवक्ता ने कहा, ‘कर अधिकारियों से हमें इस संबंध में कोई जानकारी नहींं मिली है। पड़ताल के दौरान हमने पूरा सहयोग दिया और कर अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार उन्हें सभी दस्तावेज मुहैया कराए हैं। हमारे वरिष्ठ अधिकारी आवश्यकता पडऩे पर कर अधिकारियों के समक्ष पेश हुए हैं और सभी तरह की सूचनाएं एवं जरूरी स्पष्टीकरण दिए हैं। कर अधिकारियों से हमें जब भी कोई निर्देश मिलेगा तो हम उसके अनुसार सहयोग के लिए तैयार रहेंगे।’
स्विगी के प्रवक्ता ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया और कर छुपाने की बात से इनकार किया। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें इस संबंध में आय कर विभाग से किसी तरह का संवाद प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, ‘स्विगी कानूनों का हमेशा पालन करती है और सभी तरह के करों का भुगतान समय रहते किया है। हाल में हुर्ई पड़ताल में हमने आयकर विभाग को पूरा सहयोग दिया है। अगर उनके पास कोई और सवाल है तो उनका जवाब देने के लिए भी हम तैयार हैं।’
विभाग सब-कॉन्ट्रैक्टरों को किए गए भुगतान की भी जांच कर रहा है। अधिकारी के अनुसार जांच में सब-कॉन्ट्रैक्टर द्वारा बड़ी कर चोरी का भी पता चला है। अधिकारी ने कहा कि हालांकि इन कंपनियों का सब-कॉन्ट्रैक्टरों के कराधान से कोई सीधा संबंध नहीं है, लेकिन संदेह की गुंजाइश तो बनती है।
अधिकारियों ने कहा कि कॉन्ट्रैक्टरों के  दावे की जांच फिलहाल चह रही है। मौजूदा नियमों के अनुसार ई-कॉमर्स पोर्टल जो रकम रखती है उस पर टीडीएस लगता है। यह रकम आपूर्तिकर्ता द्वारा दिया गया कमीशन होता है इसलिए यह आयकर कानून के  194एच के तहत आता है। इसी तरह डिलिवरी बॉय या एजेंसी को दी गई रकम पर भी टीडीएस लागू होता है।

Advertisement
First Published - January 13, 2021 | 11:36 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement