facebookmetapixel
Advertisement
शेयर बाजार की तरह फिल्मों में लगेगा पैसा! ₹22,000 करोड़ के सिनेमा बिजनेस में नए फंड्स की होगी एंट्रीदवाओं का आयात होगा आसान! सरकार बदलेगी 1945 का पुराना नियम, टेस्टिंग नियमों में ढील देने की तैयारीभारत में ‘मक्का क्रांति’ बहुत फायदेमंद, धान की जगह मक्के की खेती से पर्यावरण भी बचेगा व मुनाफा भी बढ़ेगाबॉन्ड मार्केट में फंड मैनेजर्स के अलग-अलग दांव: गिल्ट और डायनेमिक फंड्स में ड्यूरेशन को लेकर छिड़ी जंगरिकॉर्ड FII निकासी और ईरान संकट ने बढ़ाई टेंशन, चालू खाते का घाटा बढ़ने से रुपये पर भारी दबावEditorial: मॉनसून की सुस्त चाल ने बढ़ाई टेंशन, खेती और अर्थव्यवस्था पर मंडराया खतराअयोध्या राम मंदिर दान घोटाला: चंपत राय-अनिल मिश्रा का इस्तीफा, UP पुलिस ने 8 लोगों को किया गिरफ्तारAI पर दुनिया का महा-समझौता: भारत समेत 35 देशों ने मिलाया हाथ, अमेरिका की बड़ी पहल को मिला साथ‘विकसित भारत 2047 के लिए जिम्मेदारी से AI अपनाना जरूरी’, ICAI के मंच से PM मोदी का संदेशबंगाल सरकार का बड़ा फैसला: खत्म होगा शहरी भूमि सीमा अधिनियम, बड़े निवेश का रास्ता साफ

शेड्यूल-एम लागू करने के लिए छोटी दवा कंपनियों को मोहलत

Advertisement

मंत्रालय ने संशोधित शेड्यूल-एम दिशानिर्देश लागू करने के लिए एक साल की सशर्त छूट देते हुए इसकी अवधि 31 दिसंबर, 2025 तक के लिए बढ़ा दी है।

Last Updated- February 12, 2025 | 10:32 PM IST
Pharma and Healthcare stocks

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 250 करोड़ रुपये से कम कारोबार करने वाली लघु एवं मझोली दवा इकाइयों को राहत दी है। मंत्रालय ने संशोधित शेड्यूल-एम दिशानिर्देश लागू करने के लिए एक साल की सशर्त छूट देते हुए इसकी अवधि 31 दिसंबर, 2025 तक के लिए बढ़ा दी है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बुधवार को औषधि नियम, 1945 में संशोधन करते हुए अंतिम अधिसूचना जारी करके छोटी दवा कंपनियों के लिए संशोधित शेड्यूल-एम को लागू करने की समय सीमा बढ़ा दी है। दवा कंपनियों के लिए गुणवत्ता मानक और बेहतर विनिर्माण गतिविधियां (जीएमपी) निर्धारित करने वाले शेड्यूल-एम को स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले वर्ष जनवरी में अधिसूचित किया था। शुरुआत में 250 करोड़ रुपये से ज्यादा सालाना कारोबार करने वाली बड़ी दवा कंपनियों को इसके पहले संशोधित शेड्यूल-एम लागू करने के लिए 6 महीने का वक्त दिया गया था, जबकि 250 करोड़ रुपये या इससे कम कारोबार वाली कंपनियों को 12 महीने वक्त दिया गया था।

बहरहाल कुछ एमएसएमई उद्योग निकायों ने दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए 2 साल के विस्तार की मांग की और उन्होंने मशीनरी खरीद में धन की कमी और कर्मचारियों के प्रशिक्षण में चुनौतियों का हवाला देते हुए समय से नियम के अनुपालन में बाधा का हवाला दिया। फेडरेशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स (एफओपीई), आरएसएस से जुड़े लघु उद्योग भारती सहित उद्योग संगठनों और विभिन्न राज्य औषधि विनिर्माण संगठनों ने इसे लागू करने के लिए दिसंबर 2026 तक का वक्त देने का अनुरोध किया था। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले महीने हिस्सेदारों से राय लेने के लिए मसौदा अधिसूचना जारी किया था।

Advertisement
First Published - February 12, 2025 | 10:32 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement