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मुनाफा वृद्धि की घटी रफ्तार

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Last Updated- December 11, 2022 | 4:37 PM IST

पहली तिमाही के नतीजों की समीक्षा
► चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सालाना आधार पर कंपनियों का
► कुल मुनाफा 22.4 फीसदी बढ़ा
► बैंक, गैर-बैंकिंग ऋणदाता, तेल एवं एफएमसीजी फर्मों का अहम योगदान
► बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही की तुलना में कुल मुनाफा 16.9 फीसदी घटा
कंपनियों की आय चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में दो अंक में बढ़ी लेकिन उसकी वृद्धि की रफ्तार थोड़ी नरम पड़ी है। पहली तिमाही में कंपनी जगत की कमाई वित्त वर्ष 2022 के उच्च स्तर से खासी कम रही।

सभी क्षेत्रों की 2,981 सूचीबद्ध कंपनियों में से बिज़नेस स्टैंडर्ड के नमूने में शामिल कंपनियों का समेकित शुद्ध मुनाफा चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 22.4 फीसदी बढ़कर 2.24 लाख करोड़ रुपये रहा। इसमें बैंकों, गैर-बैंकिंग ऋणदाता, तेल एवं एफएमसीजी कंपनियों के मुनाफे में उछाल से कुछ मुनाफा बढ़ा है। हालांकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के कम आधार का भी फायदा दिखा है। इसके साथ ही अदाणी पावर, सुजलॉन एनर्जी, जुआरी एग्रो केमिकल्स, सन फ्लैग आयरन और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज जैसी चुनिंदा कंपनियों को असाधारण आय होने से भी पहली तिमाही में कंपनियों के समेकित मुनाफे में ज्यादा उछाल आई है।
बैंक, गैर-बैंकिंग ऋणदाता, बीमा कंपनियों और शेयर ब्रोकिंग फर्मों को निकाल दें तो नमूने में शामिल बाकी कंपनियों का समेकित मुनाफा सालाना आधार पर 16.3 फीसदी बढ़कर 1.58 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछली आठ तिमाहियों में सबसे कम वृद्धि है। इन गैर-बीएफएसआई कंपनियों का समेकित मुनाफा तिमाही आधार पर 22.3 फीसदी कम रहा है।
वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में सूचीबद्ध कंपनियों को रिकॉर्ड 203 लाख करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। नमूने में शामिल कंपनियों की समेकित मुनाफा पिछली चार तिमाहियों में सबसे कम रहा और जनवरी-मार्च 2022 तिमाही के 2.69 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड मुनाफे से 16.9 फीसदी कम रहा।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सालाना आधार पर कंपनियों के मुनाफे में ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, कोल इंडिया, अदाणी पावर और मंगलूर रिफाइनरी ऐंड पेट्रोकेमिकल्स का सबसे ज्यादा योगदान रहा। इन पांच कंपनियों ने 40,921 करोड़ रुपये की सालाना मुनाफा वृद्धि में 73 फीसदी का योगदान दिया है। ओएनजीसी ने अकेले करीब 25 फीसदी का योगदान दिया और रिलायंस की हिस्सेदारी 13.9 फीसदी तथा कोल इंडिया की हिस्सेदारी 13.8 फीसदी रही।
दूसरी तरफ सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां- इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) सबसे फिसड्डी रही, जिन्होंने वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही के दौरान आमदनी में तेज गिरावट दर्ज की। असल में बीपीसीएल और एचपीसीएल को तिमाही के दौरान शुद्ध घाटा हुआ है। आलोच्य तिमाही के दौरान सालाना आधार पर आमदनी में बड़ी गिरावट वाली अन्य प्रमुख कंपनियों में जेएसडब्ल्यू स्टील, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल), पावर ग्रिड कॉरपोरेशन, एनएमडीसी और टाटा स्टील शामिल रहीं।
पहली तिमाही के नतीजे सामग्री और ऊर्जा की ऊंची लागत के कारण कॉरपोरेट मार्जिन में गिरावट को दर्शाते हैं। पूरे नमूने का परिचालन या एबिटा मार्जिन सालाना आधार पर करीब 410 आधार अंक घटकर कुल आय का 22.5 फीसदी रहा। यह 9 तिमाहियों में सबसे कम है। कोर-ऑपरेटिंग मार्जिन (जिसमें अन्य आय को शामिल नहीं किया जाता) सालाना आधार पर 326 आधार अंक घटकर शुद्ध बिक्री का 19.63 फीसदी रहा, जो जनवरी-मार्च 2020 तिमाही से सबसे कम है। एक आधार अंक एक फीसदी का 100वां हिस्सा है।
बैंकों, गैर-बैंक ऋणदाताओं, बीमा और स्टॉक ब्रोकरों (बीएफएसआई) को छोड़कर अन्य कंपनियों के लिए मार्जिन में संकुचन और भी तेज रहा। वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में गैर-बीएफएसआई कंपनियों का परिचालन मार्जिन सालाना आधार पर 450 आधार अंक घटकर कुल आय का 15.3 फीसदी रहा, जो वित्त वर्ष 2021 तिमाही के बाद सबसे कम है। दूसरी तरफ इन कंपनियों का कोर परिचालन मार्जिन वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 407 आधार अंक फिसलकर शुद्ध बिक्री का 13.83 फीसदी रहा। यह पिछली आठ तिमाहियों में सबसे कम है।

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First Published - August 15, 2022 | 12:46 AM IST

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